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शिक्षकों के लिए जरूरी हुई TET परीक्षा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से MP में बढ़ी हलचल

By Admin|14 May 2026, 9:05 PM
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भोपाल 

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 मध्यप्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षकों को देश की सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के मामले पर सुनवाई करते हुए एक स्पष्ट निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि- पात्रता परीक्षा के नियमों में जो भी ढील दी जानी थी, वह पहले ही दी जा चुकी है, ऐसे में अब बिना परीक्षा पास किए कोई भी शिक्षक नहीं बन सकता है। बता दें कि साल 1998 से 2009 के बीच नियुक्त किए गए शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट देने की मांग करते हुए याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं।

'बिना परीक्षा पास किए कोई टीचर नहीं बन सकता'
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मध्यप्रदेश में शिक्षकों की पात्रता परीक्षा में छूट दिए जाने की मांग को लेकर दायर की गई पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि पात्रता परीक्षा के नियमों में जो भी ढील दी जानी थी, वह पहले दी जा चुकी है। अब इसमें कोई छूट की गुंजाइश नहीं है और शिक्षक बनने के लिए टीईटी पास करना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2017 में जब नियम लागू हुए थे, उसके बाद 5 साल की रियायत दी गई थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। हालांकि इस मामले में अभी कोर्ट का अंतिम फैसला आना बाकी है।

सुप्रीम कोर्ट का पुराना आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 1998-2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के TET एक्जाम को लेकर 1 सितंबर 2025 को कहा था कि 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षक जो मेरिट के आधार पर भर्ती हुए थे उनके लिए भी TET अनिवार्य है। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर मांग की थी कि पुराने शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर छूट दी जाए। पूर्व में कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि जो शिक्षक इस परीक्षा को पास करने में विफल रहेंगे, उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है।

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क्या है TET परीक्षा ?
शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) एक अनिवार्य योग्यता है जिसे NCTE ने 2010 में लागू किया था। यह सुनिश्चित करता है कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों में न्यूनतम शैक्षणिक स्तर और कौशल मौजूद है। मध्य प्रदेश में वर्तमान में स्थिति यह है कि अगर कोर्ट राहत नहीं देता है, तो करीब 1.5 लाख अनुभवी शिक्षकों को फिर से छात्र बनकर परीक्षा देनी होगी। TET परीक्षा में दो पेपर होते हैं जिनमें से एक में पहली से पांचवी और दूसरे में पांचवी से आठवीं तक के लिए परीक्षा होती है।

जातीय और श्रेणीवार विवरण की मांग
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार से शिक्षकों का विस्तृत डेटा मांगा है। अधिवक्ता पृथ्वीराज सिंह के अनुसार, कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पूर्व शिक्षकों की एक श्रेणीवार (Category-wise) सूची प्रस्तुत की जाए।

इसमें सामान्य, ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के शिक्षकों की सटीक संख्या स्पष्ट होनी चाहिए। बता दें कि मध्य प्रदेश में लगभग 1.50 लाख शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने अब तक टीईटी पास नहीं की है, उनके भविष्य के लिए यह फैसला निर्णायक साबित होगा।

सुप्रीम कोर्ट के पहले का क्या था आदेश?-सुप्रीम कोर्ट ने 1998-2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के TET एक्जाम को लेकर 1 सितंबर 2025 को कहा था कि 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षक जो मेरिट के आधार पर भर्ती हुए थे उनके लिए भी TET अनिवार्य है। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर मांग की थी कि पुराने शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर छूट दी जाए। पूर्व में कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि जो शिक्षक इस परीक्षा को पास करने में विफल रहेंगे, उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मध्यप्रदेश के 1.50 लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट आ गया था। गौरतलब है कि TET परीक्षा में दो पेपर होते हैं जिनमें से एक में पहली से पांचवी और दूसरे में पांचवी से आठवीं तक के लिए परीक्षा होती है।

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