छत्तीसगढ़

चक्रधर समारोह 2025: हास्य, वीर रस और व्यंग्य का अद्भुत काव्य संध्या अनुभव

By Admin|04 Sep 2025, 9:51 PM
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रायपुर,

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अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह में आठवें दिन हास्य, वीर रस और व्यंग्य के साथ काव्य पाठ और मधुर गीत-गायन-संगीत  की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह की आठवीं शाम छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि पद्मश्री स्व.डॉ.सुरेन्द्र दुबे की स्मृतियों को नमन करते हुए एक विशेष काव्य संध्या का आयोजन रायगढ़ के रामलीला मैदान में हुआ। पद्मश्री डॉ.दुबे, जिन्होंने हास्य और व्यंग्य को वैश्विक पहचान दिलाई, अनेक बार इस मंच पर अपनी रचनाओं से श्रोताओं को गुदगुदा चुके थे। उनकी स्मृतियों को समर्पित इस संध्या में प्रदेश के ख्यात कवियों ने वीर रस, हास्य और व्यंग्य की रचनाओं से दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

समारोह में राजनांदगांव के पद्मलोचन मुंहफट ने हास्य, व्यंग्य और पैरोडी से हंसी की फुहारें बिखेरीं। भिलाई के किशोर तिवारी ने अपने मधुर गीतों से श्रोताओं के दिलों को छू लिया। मुंगेली के देवेन्द्र परिहार ने ओजस्वी वीर रस की कविताओं ने वातावरण को ऊर्जावान बना दिया। रायपुर की शशि सुरेन्द्र दुबे ने गीत और व्यंग्य की रचनाओं से श्रोताओं को गुदगुदाया और सोचने पर विवश किया। रायगढ़ के नरेन्द्र गुप्ता ने वीर रस की कविताओं ने देशभक्ति और पराक्रम की भावना को जीवित किया।

बिलाईगढ़ के बंशीधर मिश्रा ने हास्य कविताओं की चुटीली पंक्तियों से माहौल को खुशनुमा बना दिया। कवर्धा के अभिषेक पांडे ने युवा ऊर्जा और समकालीन व्यंग्य से भरी हास्य कविताओं ने मंच को जीवंत किया। बता दे कि गत वर्ष आयोजित 39वें चक्रधर समारोह में डॉ.दुबे ने अपनी चिरपरिचित पैनी व चुटीली कविताओं से मंच को हँसी और व्यंग्य से गूंजा दिया था। अब वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी साहित्य साधना और कला अवदान अमर है। इस काव्य संध्या ने उनके योगदान को सच्ची श्रद्धांजलि दी।

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शशि सुरेंद्र दुबे-छत्तीसगढ़ की जानीमानी कवयित्री और दिवंगत डॉ.सुरेंद्र दुबे की धर्मपत्नी हैं। उन्होंने ‘वाह वाह क्या बात है‘ जैसे कई टीवी कार्यक्रमों और दूरदर्शन पर काव्य पाठ किया है। उनका काव्य संग्रह ‘पट्टी खोलो गांधारी‘ प्रकाशित हो चुका है। किशोर तिवारी-मधुर गीतकार हैं, जो वाह वाह क्या बात है समेत विभिन्न राष्ट्रीय मंचों, आकाशवाणी और दूरदर्शन पर काव्य पाठ कर चुके हैं। पद्मलोचन मुंहफट-पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे के शिष्य, पद्मलोचन हास्य-व्यंग्य और पैरोडी के लिए मशहूर हैं। उन्होंने देश के 16 राज्यों में काव्य पाठ कर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। देवेन्द्र परिहार-वीर रस के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने ज़ी न्यूज़ के कवि युद्ध सहित कई राष्ट्रीय और प्रादेशिक चौनलों पर काव्य पाठ किया है। नरेंद्र गुप्ता-रायगढ़ के मूल निवासी और वीर रस के कवि हैं। उन्हें अटल साहित्य सम्मान और दिनकर साहित्य सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। बंशीधर मिश्रा-ख्यात हास्य कवि, जो देश के कई राज्यों में काव्य पाठ और मंच संचालन कर चुके हैं। वे वाह भाई वाह टीवी शो में भी 6 एपिसोड में शामिल हुए थे। उनकी हास्य संग्रह ‘भूतहा लोरी‘ प्रकाशित हो चुकी है और उन्हें धुरंधर हास्य सम्मान 2025 से सम्मानित किया गया है। अभिषेक पांडे-युवा कवि, वक्ता और आयोजक हैं, जो अपनी वक्ता कला के लिए युवा पुरस्कार से सम्मानित हैं। वे दूरदर्शन सहित विभिन्न निजी चौनलों पर काव्य पाठ कर चुके हैं।

सुप्रसिद्ध संगीतकार एवं गायक अर्नव चटर्जी ने अपनी अनूठी प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जन्में और ऑल इंडिया रेडियो, मुंबई से प्रमाणित गायक अर्नव चटर्जी ने भजन, गज़ल और गीतों की प्रस्तुति दी। उनकी मधुर आवाज़ और सुर-ताल की अद्भुत संगति ने श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान अर्नव चटर्जी ने फिल्म, टीवी सीरियल, म्यूज़िक एल्बम और डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के लिए किए गए अपने सृजनात्मक योगदान की झलक भी प्रस्तुत की। संगीत प्रेमियों ने उन्हें खड़े होकर तालियों से सम्मानित किया। चक्रधर समारोह की इस संध्या में उनकी प्रस्तुति ने न केवल भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा को जीवंत किया बल्कि अर्नव चटर्जी की संगीतमयी संध्या ने समारोह को अविस्मरणीय बना दिया।

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