छत्तीसगढ़

तेंदुए की खाल की तस्करी पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, 9 आरोपी गिरफ्तार

By Admin|24 Mar 2026, 7:11 PM
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रायपुर

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वन्यजीव संरक्षण को लेकर राज्य में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में 19 मार्च 2026 को केशकाल वनमंडल और राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए तेंदुए की खाल की तस्करी में शामिल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
          
वन्य जीव संरक्षण का अर्थ जंगली जानवरों, पक्षियों और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा करना है, ताकि जैव विविधता बनी रहे और पारिस्थितिक संतुलन न बिगड़े। भारत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत अवैध शिकार, व्यापार और आवास विनाश को रोकना और वन्य प्रजातियों की रक्षा करना अनिवार्य है। यह पारिस्थितिक तंत्र के लचीलेपन और भावी पीढ़ियों के लिए प्रकृति के संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण है।
         
यह कार्रवाई मुखबिर की सूचना के आधार पर की गई। वन विभाग की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया, जिसमें एक कर्मचारी ने खरीदार बनकर तस्करों से संपर्क किया। जैसे ही आरोपी मोटरसाइकिल और एक वाहन में तेंदुए की खाल लेकर रसगांव-बड़ेडोंगर मार्ग स्थित ग्राम बैलगांव पहुंचे, टीम ने उन्हें घेरकर पकड़ लिया। मौके से 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उन्होंने बताया कि तेंदुए का शिकार लगभग 7 महीने पहले अवैध हथियार (भरमार बंदूक) से किया गया था। आरोपियों की निशानदेही पर मुख्य आरोपी को अगले दिन नारायणपुर जिले के ग्राम बोरावण्ड से गिरफ्तार किया गया तथा शिकार में प्रयुक्त बंदूक भी जब्त की गई। बरामद तेंदुए की खाल की लंबाई 195 सेंटीमीटर और चौड़ाई 45 सेंटीमीटर पाई गई।
         
वनमंडलाधिकारी दिव्या गौतम के निर्देशन में आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 (संशोधित 2022) के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपी कोंडागांव, दंतेवाड़ा, बस्तर और नारायणपुर जिलों के निवासी हैं। इस अभियान में राज्य स्तरीय टीम के अधिकारियों एवं वन विभाग के कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका रही। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों के शिकार और अवैध व्यापार को रोकने के लिए आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। राज्य शासन की वन एवं वन्यजीव संरक्षण संबंधी योजनाओं के तहत जैव विविधता संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

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