छत्तीसगढ़

तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की बेटियों की बड़ी उड़ान, बस्तर का नाम किया रोशन

By Admin|05 Jun 2026, 6:23 PM
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बस्तर की बेटियों ने पेश की सफलता की मिसाल, तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की रुद्राणी और डालेश्वरी ने बढ़ाई अंचल की शान

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शिक्षा प्रोत्साहन योजना से मिला संबल, हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में बेटियों ने लहराया परचम

सांसद महेश कश्यप ने सुशासन तिहार में सौंपे 15-15 हजार रुपये के चेक, उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं

रायपुर,
आर्थिक कठिनाइयों और सीमित संसाधनों को मात देकर बस्तर जिले की दो बेटियों ने सफलता की एक नई इबारत लिखी है। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों से ताल्लुक रखने वाली रुद्राणी कश्यप और डालेश्वरी बघेल ने हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपने माता-पिता, गांव और पूरे बस्तर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

सीमित संसाधनों में गढ़ी सफलता की कहानी 

            बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम उलनार की निवासी रुद्राणी कश्यप ने सेजेस (स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय) करपावंड से और डालेश्वरी बघेल ने शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल उलनार से पढ़ाई करते हुए यह शानदार उपलब्धि हासिल की है। दोनों छात्राओं ने साबित कर दिया है कि यदि लगन और अनुशासन हो, तो प्रतिभा किसी भी अभाव की मोहताज नहीं होती।

शिक्षा प्रोत्साहन योजना से मिली नई उड़ान 

           तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए संचालित श्शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत दोनों छात्राओं को 15-15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है। हाल ही में ग्राम उलनार में आयोजित सुशासन तिहार शिविर के दौरान बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप ने दोनों होनहार बेटियों को प्रोत्साहन राशि के चेक प्रदान किए। इस मौके पर सांसद ने दोनों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए स्मृति स्वरूप पौधे भी भेंट किए।

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           माता-पिता ने जताया आभार, बेटियों के सपनों को मिले पंख रुद्राणी कश्यप की माता श्रीमती कुंती कश्यप ने बताया कि बेटी की रुचि जीव विज्ञान (बायोलॉजी) में है और पूरा परिवार उसकी आगे की पढ़ाई में हरसंभव सहयोग करेगा। वहीं, डालेश्वरी बघेल के पिता श्री लम्बोदर बघेल ने इस सफलता का पूरा श्रेय बेटी की कड़ी मेहनत और शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन को दिया।

         श्रमसाध्य जीवन जीने वाले परिवारों की इन बेटियों की यह कामयाबी आज ग्रामीण अंचल के हज़ारों छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। सरकार की इस योजना ने न केवल उनका हौसला बढ़ाया है, बल्कि उनके सपनों को एक नई और मजबूत दिशा भी दी है।

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