छत्तीसगढ़

किसानों के लिए मखाना खेती की पहल, लिंगाडीह आरंग में भ्रमण और प्रशिक्षण संपन्न

By Admin|11 Mar 2026, 8:33 PM
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रायपुर

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मध्यप्रदेश के किसानों का ग्राम लिंगाडीह आरंग में मखाना खेती भ्रमण एवं प्रशिक्षण संपन्न

धान के कटोरे कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में अब एक नई फसल अपनी पहचान बना रही है – सुपर फूड मखाना, जिसे काला हीरा भी कहा जाता है। स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर मखाने की खेती अब राज्य में आधुनिक तकनीक और नवाचार के साथ हो रही है।

मखाना उत्पादन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष  चंद्रहास चंद्राकर एवं अध्यक्ष जनपद सदस्य आरंग,  रिंकू चंद्राकर ने की. मध्य प्रदेश के किसानो  सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि  चंद्रहास चंद्राकर ने कहा की केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों के  आर्थिक उन्नति के लिए विशेष रूप से कार्य कर रही है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी के प्रयासों से छत्तीसगढ़ मखाना बोर्ड सेन्ट्रल सेक्टर स्कीम में शामिल हुआ है इसके लिए हम उनका आभार व्यक्त करते हैं.हमारे मुख्य मंत्री  विष्णु देव साय कृषि मंत्री  राम विचार नेताम जी के द्वारा मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने विशेष प्रयास किया जा रहा है  चंद्राकर ने कहा की छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम व्यवसायिक उत्पादन आरंग ब्लॉक के ग्राम लिंगाडीह के किसान स्व.  कृष्ण कुमार चंद्राकर द्वारा प्रारंभ किया गया था। राज्य का प्रथम मखाना प्रसंस्करण केंद्र का उद्घाटन 5 दिसंबर 2021 को ग्राम लिंगाडीह में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। अब मखाना उत्पादन में प्रदेश में आरंग का नाम अपनी अलग पहचान बना चुका है.   कार्यक्रम के अध्यक्ष जनपद सदस्य  रिंकू चंद्राकर ने कहा किया हमारे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश का प्रथम मखाना उत्पादन एवं संस्करण केंद्र हमारे क्षेत्र ग्राम लिंगाडीह में स्थापित हुआ है.छटेरा, निसदा एवं अन्य गांव में भी इसके विस्तार हेतु प्रयास किया जा रहे हैं हमारे इस केंद्र में न केवल हमारे प्रदेश के बल्कि अन्य प्रदेश के लोग भी यहां मखाना की खेती सीखने आ रहे हैं जो हमारे प्रदेश के लिए गर्व की बात है. 

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मध्य प्रदेश के उमरिया जिला से 50 किसानों का एक भ्रमण दल कृषि विभाग के द्वारा मखाना की खेती के भ्रमण हेतु रायपुर जिला के आरंग ब्लॉक स्थित ओजस फॉर्म का भ्रमण किया। इस दौरान किसानों ने मखाना की खेती के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की और अपने अनुभव साझा किए।

राष्ट्रीय मखाना महोत्सव 2024 एवं 2025 में सम्मानित मखाना उत्पादक किसान  एवं ओजस फार्म दाऊजी मखाना के प्रबंधक  संजय नामदेव ने मखाना की खेती के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रति एकड़ में 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और उत्पादन लगभग 10 क्विंटल के आसपास प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि 6 माह की अवधि वाले फसल में किसी भी प्रकार का कीट व्याधि का प्रकोप नहीं होता है और न ही किसी प्रकार की चरी और चोरी की समस्या रहती है। इंदिरा गाँधी कृषि विश्व विद्यालय के सब्जी विज्ञान के पी एच डी छात्र डॉ योगेंद्र चंदेल ने किसानों को मखाना की खेती के लिए आवश्यक तकनीक और संसाधनों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मखाना की खेती तालाब एवं खेत दोनों विधि से की जाती है अधिकतम उत्पादन के लिए धान की तरह खेत की मताई 1 मीटर की दुरी पर 55 दिन के नर्सरी की 4000 पौधो की रोपाई एक मीटर पौधा से पौधा एवं कतार से कतार की दुरी पर रोपाई समय समय पर नींदाई  खाद प्रबंधन वैज्ञानिक तरीके से करने पर अधिकतम उत्पादन मिलता है मखाना की खेती प्रसंसकरण एवं विपणन के लिए हमारे द्वारा किसानों को  प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जाती है।

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ICAR-CIPHET (केंद्रीय कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान), लुधियाना, पंजाब से प्रशिक्षण प्राप्त शिव नारायण साहू ने मखाना के प्रोसेसिंग की जानकारी देते हुए बताया कि 1 किलो मखाना के बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप प्राप्त होता है, जिसकी बाजार में कीमत ₹700 से लेकर ₹1000 तक होती है। उन्होंने बताया कि यदि किसान मखाना का उत्पादन कर स्वयं प्रसंस्करण कर पैकेजिंग करके भेजते हैं तो प्रति एकड़ अधिकतम लाभ प्राप्त हो सकता है।

इस भ्रमण के दौरान किसानों ने मखाना की खेती के बारे में   शिव साहू से विस्तृत जानकारी प्राप्त की और अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मखाना की खेती से उन्हें अच्छा मुनाफा हो सकता है और यह उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकता है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मखाना बोर्ड से इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को मखाना की खेती के लिए प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जाती है, और उन्हें इसके लिए सब्सिडी भी दी जाती है।

इस भ्रमण में मध्य प्रदेश के किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग से भ्रमण दल प्रभारी  दहायत एवं भ्रमण दल में शामिल किसानों ने बताया कि वे मखाना की खेती के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए उत्साहित हैं और इसे अपने खेतों में अपनाने के लिए तैयार हैं।

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