मध्य प्रदेशराज्‍य

06 करोड़ से अधिक लोगों तक डिजिटल एवं सोशल मीडिया के माध्यम से तथा 01 करोड़ से अधिक नागरिकों तक प्रत्‍यक्ष रूप से पहुँचा साइबर सुरक्षा का संदेश

By Admin|08 Jul 2026, 11:01 PM
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भोपाल 

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मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 24 जून से 08 जुलाई 2026 तक संचालित 15 दिवसीय प्रदेशव्यापी "सेफ क्लिक 2.0" साइबर सुरक्षा जन-जागरूकता अभियान का आज नरोन्‍हा प्रशासन अकादमी, भोपाल स्थित स्वर्ण जयंती सभागार में समापन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा रहे। समारोह में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर)  ए. साईं मनोहर, पुलिस आयुक्त भोपाल  संजय कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, सामुदायिक पुलिस सदस्य, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक  मकवाणा ने कहा कि जनवरी 2025 में अधिकारियों को दिए गए नववर्ष संदेश में उन्होंने तीन प्रमुख चुनौतियों—साइबर अपराध, नशे के विरुद्ध जन-जागरूकता तथा सड़क सुरक्षा—को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए निरंतर जन-भागीदारी आधारित अभियान संचालित करने का आह्वान किया था। उसी संकल्प के अनुरूप मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा "सेफ क्लिक"तथा "नशे से दूरी है जरूरी "व्यापक जन-जागरूकता अभियान सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि "सेफ क्लिक 1.0" के सकारात्मक परिणामों के कारण प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों में उल्लेखनीय कमी देखने को मिली है। जागरूक नागरिकों द्वारा समय पर पुलिस को सूचना देने से अनेक मामलों में तत्काल कार्रवाई कर पीड़ितों को राहत दिलाई गई। उन्होंने भोपाल के डिजिटल अरेस्ट प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि पीड़ित की त्वरित सूचना पर पुलिस ने लाइव हस्तक्षेप कर साइबर अपराध को विफल किया।

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि साइबर अपराधी लगातार अपने तौर-तरीके बदल रहे हैं, इसलिए मध्यप्रदेश पुलिस भी समय-समय पर नई एडवाइजरी जारी कर नागरिकों को सतर्क कर रही है। उन्होंने बताया कि "सेफ क्लिक 2.0" को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर)  ए. साईं मनोहर एवं उनकी टीम ने बदलते साइबर परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए और अधिक व्यापक स्वरूप प्रदान किया, जिसके परिणामस्वरूप यह अभियान जन-जन तक पहुँचने में सफल रहा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में साइबर अपराध कानून-व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होंगे। ऐसे में जागरूकता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है। मध्यप्रदेश पुलिस साइबर अपराध पीड़ितों को शीघ्र राहत दिलाने के लिए फर्जी बैंक खातों की पहचान कर उन्हें बंद कराने, फर्जी सिम कार्डों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा साइबर ठगी की राशि समय रहते होल्ड कराकर पीड़ितों को वापस दिलाने जैसे नवाचारों पर निरंतर कार्य कर रही है।

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पुलिस महानिदेशक ने बताया कि 25 दिसंबर 2025 को ग्वालियर से माननीय केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा साइबर ठगी से संबंधित ई-जीरो एफआईआर प्रणाली का शुभारंभ किया गया, जिसके साथ मध्यप्रदेश देश का दूसरा राज्य बना जहाँ साइबर ठगी के मामलों में ई-जीरो एफआईआर की सुविधा लागू की गई। प्रारंभ में यह व्यवस्था एक लाख रुपये या उससे अधिक की साइबर ठगी के मामलों के लिए लागू थी, जिसे बाद में घटाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया, ताकि अधिकाधिक पीड़ितों को त्वरित न्याय एवं राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि इससे पुलिस का कार्यभार अवश्य बढ़ा है, किन्तु नागरिकों को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराना मध्यप्रदेश पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आज प्रत्येक नागरिक का दिन मोबाइल के एक क्लिक से प्रारंभ होता है और उसी पर समाप्त होता है। ऐसे समय में साइबर जागरूकता अत्यंत आवश्यक हो गई है। अभियान के दौरान पुलिस अधिकारियों ने विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, शासकीय एवं निजी संस्थानों सहित विभिन्न स्थानों पर पहुँचकर लाखों विद्यार्थियों एवं नागरिकों को साइबर सुरक्षा के व्यवहारिक उपायों की जानकारी दी।

पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि अभियान का समापन अवश्य हुआ है, किन्तु साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्कता कभी समाप्त नहीं होनी चाहिए। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी, पासवर्ड अथवा बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें तथा किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएँ। उन्होंने कहा कि समय पर दी गई सूचना से ठगी की राशि होल्ड कराने तथा अपराधियों तक शीघ्र पहुँचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। उन्‍होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत स्कूल शिक्षा विभाग के सहयोग से लाखों विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा की शपथ दिलाई गई। 60 हजार से अधिक सीयूजी सिम पर साइबर सुरक्षा संदेश प्रसारित किए गए तथा देश की चार प्रमुख दूरसंचार कंपनियों के माध्यम से लगभग 5 करोड़ बल्क एसएमएस नागरिकों तक भेजे गए।

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महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग की लगभग 60 हजार आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, ग्राम पंचायतों, पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों, जीआरपी, पुलिस वेलफेयर सेंटर, साइबर जागरूकता रथ, चौपाल, मैराथन, रैली, धार्मिक स्थलों तथा एमपीएल क्रिकेट लीग सहित अनेक माध्यमों से साइबर सुरक्षा का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाया गया।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर)  ए. साईं मनोहर ने अपने आभार उद्बोधन में अभियान की सफलता का श्रेय पुलिस महानिदेशक  मकवाणा के दूरदर्शी नेतृत्व एवं सतत मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने कहा कि "सेफ क्लिक 1.0" की सफलता के बाद "सेफ क्लिक 2.0" को और अधिक व्यापक स्वरूप प्रदान किया गया, जिसके परिणामस्वरूप यह अभियान जन-जन तक पहुँचकर एक जन-आंदोलन बन गया। उन्होंने कहा कि "Prevention is Better Than Cure" का सिद्धांत साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में पूरी तरह लागू होता है और जन-जागरूकता ही साइबर अपराधों की रोकथाम का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने अभियान को सफल बनाने में प्रदेश के सभी पुलिस आयुक्तों, पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया, स्कूल शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, दूरसंचार कंपनियों, स्वयंसेवी संगठनों तथा अभियान से जुड़े सभी विभागों का आभार व्यक्त किया। साथ ही साइबर मुख्यालय की टीम एवं विशेष रूप से  प्रणय नागवंशी सहित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पित योगदान की सराहना की।

उप पुलिस महानिरीक्षक डॉ. विनीत कपूर ने अभियान की विस्तृत रूपरेखा एवं उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि 15 दिवसीय अभियान के दौरान प्रत्येक दिवस के लिए अलग-अलग विषय निर्धारित कर प्रदेशभर में योजनाबद्ध गतिविधियाँ संचालित की गईं। विद्यार्थियों एवं युवाओं को साइबर सुरक्षा का "ब्रांड एम्बेसडर" बनाते हुए डिजिटल अरेस्ट, एआई आधारित साइबर अपराध, वॉइस क्लोनिंग, फिशिंग, क्यूआर कोड फ्रॉड, निवेश संबंधी साइबर ठगी तथा सोशल मीडिया सुरक्षा जैसे विषयों पर संवादात्मक कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा की शपथ दिलाकर उन्हें अपने परिवार एवं समाज को भी जागरूक करने का संदेश दिया गया।

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ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों एवं ग्राम सभाओं के माध्यम से किसानों, महिलाओं, युवाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक किया गया। कृषि मंडियों, श्रमिक समूहों एवं ग्रामीण समुदायों तक पहुँचकर डिजिटल लेन-देन के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी गई।

अभियान से पूर्व साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में नवाचार एवं युवाओं की सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रदेश में मेगा हैकाथॉन का भी आयोजन किया गया, जिसमें भोपाल, इंदौर एवं जबलपुर सहित विभिन्न स्थानों पर राष्ट्रीय स्तर की टीमों ने भाग लिया।

उल्लेखनीय है कि "सेफ क्लिक 2.0" अभियान के दौरान प्रदेशभर में 8,600 से अधिक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के अंतर्गत नागरिकों की अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों के बीच प्रतिस्पर्धा रही। जिसका परिणाम है कि 1 करोड़ से अधिक नागरिकों तक प्रत्यक्ष रूप से साइबर सुरक्षा का संदेश पहुँचाया गया, जबकि डिजिटल एवं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से 6करोड़ से अधिक लोगों तक साइबर जागरूकता का व्यापक प्रसार किया गया। उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर भोपाल एवं इंदौर के पुलिस कमिश्‍नर सहित डिंडौरी, अलीराजपुर, दतिया एवं बैतूल जिलों के पुलिस अधीक्षकों को सम्मानित किया गया। 

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