कक्षा 6 से 12 तक के स्कूलों में जेंडर समानता को बढ़ावा देने की पहल, कार्यशाला में व्यवहारिक उपायों पर चर्चा

हजारीबाग
हजारीबाग के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में विद्यालय स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम के तहत जेंडर विषय पर दो दिवसीय जिला स्तरीय गैर-आवासीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का उद्देश्य विद्यालयों में जेंडर से जुड़े विषयों की समझ को मजबूत करना, संवेदनशीलता बढ़ाना और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, समान एवं समावेशी शैक्षणिक वातावरण तैयार करना रहा. इसमें जिले के चयनित 50 विद्यालयों के हेल्थ दूत, प्रधानाध्यापक और जिला स्तरीय साधनसेवियों (डीआरजी) ने भाग लिया.
दो चरणों में आयोजित हुई कार्यशाला
कार्यशाला का पहला चरण 15 सितंबर 2026 को आयोजित हुआ, जिसमें 50 विद्यालयों के स्वास्थ्य एवं आरोग्य दूत और जिला स्तरीय साधनसेवियों ने सहभागिता की. दूसरे चरण में 16 सितंबर को इन्हीं विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और प्रभारी प्रधानाध्यापकों के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया. दोनों चरणों में प्रतिभागियों को विद्यालयों में जेंडर से जुड़े मुद्दों को समझने, विद्यार्थियों के बीच संवेदनशीलता विकसित करने और उनके साथ सकारात्मक एवं प्रभावी संवाद स्थापित करने के व्यावहारिक तरीके बताए गए.
समावेशी विद्यालयी माहौल बनाने पर जोर
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का भी महत्वपूर्ण स्थान है. ऐसे में सभी बच्चों के लिए समान अवसर, सम्मानजनक व्यवहार और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना जरूरी है. प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि जेंडर संबंधी जागरूकता बढ़ाने से विद्यालयों में भेदभाव कम होगा और विद्यार्थी खुलकर अपनी बात रख सकेंगे. प्रशिक्षण में विद्यालय स्तर पर अपनाए जाने वाले व्यवहारिक उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई.
कक्षा 6 से 12 तक के स्कूलों में चल रहा कार्यक्रम
यह कार्यक्रम जिले के कक्षा 6 से 12 तक के सभी विद्यालयों में शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और सेंटर फॉर कैटलाइजिंग चेंज (सी3) के संयुक्त प्रयास से संचालित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य विद्यालयों में स्वास्थ्य, कल्याण और जेंडर समानता को बढ़ावा देना है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक और सामाजिक वातावरण मिल सके.
ये अधिकारी और विशेषज्ञ रहे मौजूद
कार्यशाला में जिला शिक्षा परियोजना कार्यालय से संजय तिवारी, डायट से रंजीत वर्मा, सी3 संस्था से मोहम्मद जियाउद्दीन, शिखा भसीन, ओम प्रकाश सिंह और अभिनव कुमार ने प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया. इसके अलावा जिले के डीआरजी, शिक्षक और अन्य शिक्षा कर्मियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई. कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने विद्यालयों में सीखे गए अनुभवों को लागू करने और विद्यार्थियों के लिए अधिक सुरक्षित, संवेदनशील तथा समावेशी शैक्षणिक माहौल तैयार करने का संकल्प लिया.




