मध्य प्रदेश

सेना की जमीन पर अतिक्रमण: MP में सबसे ज्यादा, यूपी दूसरे स्थान पर, 11,152 एकड़ पर कब्जा

By Admin|16 Dec 2025, 6:01 PM
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भोपाल 

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केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि देशभर में फैली लगभग 18 लाख एकड़ रक्षा भूमि में से करीब 11,152 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण हो चुका है। यह जानकारी रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी।

कितनी रक्षा भूमि पर क्या स्थिति?
देशभर में रक्षा मंत्रालय से यह जानकारी मांगी गई थी कि कु
ल रक्षा भूमि में से कितनी जमीन खाली है, कितनी अवैध कब्जे में है और कितनी कानूनी विवादों में फंसी हुई है। सरकार ने बताया कि कुल 18 लाख एकड़ रक्षा भूमि में से 11,152 एकड़ पर अतिक्रमण है, जबकि 8,113 एकड़ जमीन कानूनी विवादों में चल रही है। इसके अलावा 45,906 एकड़ भूमि को अतिरिक्त श्रेणी में रखा गया है। 

मंत्री ने स्पष्ट किया कि रक्षा भूमि का उपयोग केवल सैन्य गतिविधियों, रणनीतिक जरूरतों, प्रशिक्षण, सुरक्षा और आवास निर्माण जैसी आवश्यकताओं के लिए किया जाता है। कई जमीनें भले ही खाली दिखाई देती हों, लेकिन वे ट्रेनिंग, मोबिलाइजेशन ड्रिल, KLP प्लान और मैरिड अकोमोडेशन जैसी भविष्य की जरूरतों के लिए सुरक्षित रखी जाती हैं।

45,906 एकड़ अतिरिक्त जमीन अन्य विभागों को ऑफर
सरकार ने बताया कि लगभग 45,906 एकड़ जमीन सेना की जरूरत से अधिक है। इसकी जानकारी अन्य केंद्रीय मंत्रालयों को दी गई है, ताकि वे अपनी जरूरत के अनुसार इन भूमि हिस्सों की मांग कर सकें। लगभग 8,113 एकड़ भूमि विभिन्न कानूनी विवादों में फंसी हुई है। इनमें जमीन के मालिकाना हक, सरकारी दस्तावेज, पुरानी अधिग्रहण प्रक्रियाओं और स्थानीय दावों से संबंधित मामले शामिल हैं।

अतिरिक्त डिफेंस लैंड में एमपी पीछे जहां अतिक्रमण के मामले में मध्य प्रदेश पहले नंबर पर है, वहीं अतिरिक्त (सरप्लस) रक्षा भूमि के मामले में मध्यप्रदेश की स्थिति अपेक्षाकृत पीछे है। मध्य प्रदेश में 566.44 एकड़ रक्षा भूमि ऐसी है जिसे सशस्त्र बलों की मौजूदा जरूरत से अधिक बताया गया है।

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क्या ग्रामीण समुदायों पर प्रभाव का आकलन हुआ?
सरकार से पूछा गया कि रक्षा भूमि अधिग्रहण या बेदखली अभियानों के दौरान ग्रामीणों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया गया है या नहीं। जवाब में कहा गया ऐसा कोई आकलन नहीं किया गया है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि निजी जमीन का अधिग्रहण होने पर 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार उचित मुआवजा और पुनर्वास दिया जाता है।

रक्षा खरीद बजट लौटाने की खबरों पर क्या कहा?
एक सवाल में पूछा गया कि क्या रक्षा मंत्रालय ने धीमी खरीद के कारण 12,500 करोड़ रुपये वापस कर दिए? रक्षा राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया ऐसी कोई स्थिति नहीं है। संशोधित बजट का पूरा उपयोग कर लिया गया है। सरकार ने पुष्टि की कि खरीद प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए DAP में प्रस्तावित संशोधन लागू किए जाएंगे।

सरप्लस डिफेंस लैंड वाले टॉप-10 में भी एमपी नहीं

    उत्तर प्रदेश (8,840.70 एकड़)
    उत्तराखंड (8,693.57 एकड़)
    महाराष्ट्र (6,781.35 एकड़) जैसे राज्य काफी आगे हैं, जबकि मध्य प्रदेश टॉप-10 में भी शामिल नहीं है।

13 एकड़ डिफेंस लैंड अदालतों में उलझी

सिर्फ अतिक्रमण ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की 112.95 एकड़ रक्षा भूमि कानूनी विवादों में भी फंसी हुई है। देशभर में कुल 8,113.04 एकड़ रक्षा भूमि अलग-अलग अदालतों में मुकदमों के कारण अटकी हुई है, जिससे उसका उपयोग न सैन्य उद्देश्यों के लिए हो पा रहा है और न ही किसी दूसरे सरकारी प्रोजेक्ट के लिए इन जमीनों का उपयोग हो पा रहा है।

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डिजिटलीकरण के बावजूद क्यों बढ़ा अतिक्रमण?

सरकार ने संसद को बताया कि रक्षा भूमि के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और जियो-टैगिंग पूरी की जा चुकी है, लेकिन सुरक्षा कारणों से यह डेटा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर कमजोर निगरानी, वर्षों पुराने कब्जे और लंबी कानूनी प्रक्रियाएं अतिक्रमण हटाने में सबसे बड़ी बाधा बन रही हैं।

इन कामों में उपयोग होती है डिफेंस लैंड

डिफेंस लैंड का उपयोग सेना, वायुसेना, नौसेना, प्रशिक्षण क्षेत्र, गोदाम, कैंटोनमेंट आदि के लिए होता है। डिफेंस लैंड के रिकॉर्ड डिफेंस एस्टेट्स ऑर्गेनाइजेशन (DEO) और कैंटोनमेंट बोर्ड के पास होते हैं। लेकिन, ये रिकॉर्ड आंतरिक, सीमित उपयोग के लिए होते हैं। और ये रिकॉर्ड सार्वजनिक वेबसाइटों पर अपलोड नहीं किए जाते।

पचमढ़ी में सेना की जमीन पर बना रहे थे सीएम राइज स्कूल

नर्मदापुरम जिले के पचमढ़ी में प्रस्तावित सीएम राइज स्कूल का भवन निर्माण पिछले दो साल से अटका हुआ है। वजह है, जिस जमीन पर स्कूल बनाया जाना है, वह रक्षा मंत्रालय की भूमि है और उसकी लीज वर्ष 1985 में ही समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद जमीन का उपयोग लंबे समय से शैक्षणिक उद्देश्य के लिए हो रहा है, लेकिन नए निर्माण को अब तक कानूनी मंजूरी नहीं मिल पाई है।

10 महीने पहले यूपी में सबसे ज्यादा कब्जे थे, वहां एक हजार एकड़ से कब्जे हटाए

10 महीने पहले भी लोकसभा में रक्षा मंत्रालय ने सेना की जमीनों पर अतिक्रमण की जानकारी साझा की थी, फरवरी 2025 की स्थिति में सेना की जमीनों पर सर्वाधिक अतिक्रमण उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में बताया गया था।

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तब यूपी में 1759.2 एकड़ सेना भूमि अतिक्रमण के दायरे में थी, इसके बाद 1757.9 एकड़ जमीन पर मप्र में अतिक्रमण था। बीते 10 महीने में उत्तरप्रदेश में 1020 एकड़ सेना भूमि से अतिक्रमण हटाकर मुक्त कर लिया गया है, वहीं मप्र में सिर्फ 25 एकड़ सेना भूमि से ही अतिक्रमण हट सका है।

देशभर में 8113 एकड़ सेना भूमि पर है कानूनी विवाद

देशभर में भारतीय सेना की 8113 एकड़ जमीन पर कानूनी विवाद की स्थिति है, जिसको लेकर अदालतों में मुकदमे चल रहे हैं। अदालती मुकदमों से प्रभावित सर्वाधिक 1296.74 एकड़ सेना भूमि उत्तरप्रदेश में हैं। इसके बाद दूसरे स्थान पर 930.367 एकड़ विवादित सेना भूमि जम्मू-कश्मीर में और 727.28 एकड़ भूमि उत्तराखंड में हैं। मध्यप्रदेश में भी 112.946 एकड़ सेना भूमि अदालती मुकदमों में उलझी हुई है।

देशभर में जमीनों और भवनों की जियो टैगिंग

रक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक देशभर में सेना की जमीनों और भवनों के रिकार्ड का कंप्यूटराइजेशन का काम पूरा हो गया है। सामान्य भूमि रजिस्टरों (जीएलआर) और सैन्य भूमि रजिस्टरों (एमएलआर) में दर्ज रक्षा भूमियों के अभिलेखों का डेटा सॉफ्टवेयर में अपडेट किया जा चुका है।

सेना के अधीन सभी भवनों की जियो टैगिंग सौ फीसदी पूरी हो गई है। देशभर में रक्षा मंत्रालय के अधीन 62 कंटोनमेंट क्षेत्र हैं, इनमें सर्वाधिक 13 उत्तरप्रदेश में हैं। जबकि मप्र में 5 कंटोनमेंट क्षेत्र हैं। इनमें जबलपुर, सागर, महू (डॉ. आंबेडकर नगर), मुरार (ग्वालियर), पचमढ़ी (नर्मदापुरम) हैं। इसके अलावा भोपाल के द्रोणांचल समेत मुरैना-श्योपुर, शिवपुरी, नीमच और मंदसौर जिलों में भी सेना की जमीनें हैं।

 

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