छत्तीसगढ़ में सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़ा: मुख्य आरोपी डॉक्टर दो महीने से फरार, 40 पोस्टमार्टम रिपोर्ट अटकीं
छत्तीसगढ़ सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़ा

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित सिम्स (CIMS) में सामने आए सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े के मामले में मुख्य आरोपी फॉरेंसिक विभाग के डॉक्टर एसएन गोले करीब दो महीने से फरार हैं। पुलिस लगातार आरोपी की तलाश कर रही है, लेकिन अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिल सका है। डॉक्टर के फरार होने के कारण उनके द्वारा किए गए करीब 40 पोस्टमार्टम मामलों की रिपोर्ट अटक गई है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट लंबित होने से सड़क हादसे, संदिग्ध मौत और अन्य गंभीर मामलों की पुलिस जांच प्रभावित हो रही है। इसके अलावा जीवन बीमा दावों और मृतकों के परिजनों को मिलने वाले सरकारी मुआवजे की प्रक्रिया पर भी इसका असर पड़ रहा है।
हत्या, दुष्कर्म और संदिग्ध मौत के मामलों की जांच प्रभावित
जानकारी के मुताबिक डॉ. एसएन गोले के फरार होने से हत्या, दुष्कर्म और संदिग्ध मौत सहित 12 से अधिक गंभीर मामलों की जांच प्रभावित हुई है। इन मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विसरा जांच रिपोर्ट पुलिस जांच के साथ-साथ अदालत में चालान पेश करने के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जाती हैं।
रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण पुलिस को आगे की कानूनी प्रक्रिया में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सिम्स प्रबंधन के अनुसार, जिन शवों का पोस्टमार्टम डॉ. गोले ने किया था, उनके चिकित्सीय निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण विवरण उन्हीं के रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
ऐसे में किसी दूसरे डॉक्टर से रिपोर्ट तैयार करवाने पर कानूनी और तकनीकी जटिलताएं उत्पन्न होने की आशंका है। इसी वजह से फॉरेंसिक विभाग के अन्य डॉक्टर भी लंबित रिपोर्ट को लेकर अंतिम निर्णय नहीं ले पा रहे हैं।
40 से ज्यादा बीमा दावे भी अटके
पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिलने से 40 से अधिक जीवन बीमा और अन्य वित्तीय दावों की प्रक्रिया भी प्रभावित होने की बात सामने आई है। जांजगीर, मुंगेली, कोटा और लोरमी सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से मृतकों के परिजन रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए सिम्स पहुंच रहे हैं।
हालांकि रिपोर्ट तैयार नहीं होने के कारण उन्हें अगली तारीख देकर वापस लौटना पड़ रहा है। इससे पीड़ित परिवारों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
सर्पदंश बताकर मुआवजा और बीमा राशि हड़पने का आरोप
यह पूरा मामला बिलासपुर जिले में सर्पदंश से मौत बताकर कथित तौर पर सरकारी मुआवजा और बीमा राशि हासिल करने के फर्जीवाड़े की जांच के दौरान सामने आया था।
पुलिस जांच में कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार करने और झूठी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के जरिए सर्पदंश से मौत दर्शाने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस ने फॉरेंसिक विभाग के डॉक्टर एसएन गोले, डॉ. प्रियंका सोनी समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
अब तक 19 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के मुताबिक इस मामले में अब तक 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं हाईकोर्ट से एक महिला डॉक्टर समेत तीन आरोपियों को जमानत भी मिल चुकी है।
मुख्य आरोपी डॉ. एसएन गोले की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने दो विशेष टीमों का गठन किया है। इसके साथ ही साइबर सेल की टीम भी आरोपी की संभावित लोकेशन का पता लगाने में जुटी हुई है।
जल्द गिरफ्तारी का पुलिस का दावा
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नगर पंकज पटेल ने बताया कि पुलिस फरार आरोपी डॉक्टर की तलाश कर रही है और जल्द ही उसकी गिरफ्तारी की जाएगी।
वहीं सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि मामले की स्थिति को लेकर स्वास्थ्य संचालनालय और उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर आवश्यक मार्गदर्शन मांगा गया है।
फिलहाल मुख्य आरोपी डॉक्टर के फरार होने से न केवल पुलिस जांच बल्कि दर्जनों परिवारों के बीमा दावे और मुआवजे की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। अब पुलिस के सामने आरोपी को गिरफ्तार करने के साथ-साथ लंबित पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़े मामलों को जल्द सुलझाने की चुनौती है।




