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सुरक्षित पुनर्वास की रफ्तार सुस्त, आपदा का इंतजार! धनबाद में लगातार धंस रही जमीन, 15 हजार चिन्हित परिवारों में से मात्र 4% का ही हो सका विस्थापन

By Admin|15 Sep 2026, 5:31 PM
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धनबाद
धनबाद कोयलांचल में भू-धंसान अब छिटपुट घटनाओं की कहानी नहीं रह गयी है. बंद खदानों, भूमिगत खाली जगहों, कमजोर पिलरों, पुराने गोफ और भूमिगत आग की दशकों पुरानी विरासत का असर अब आबादी के बीच दिखाई दे रहा है. 13 सितंबर को बंद रामकनाली प्रोजेक्ट में अवैध खनन के दौरान खदान धंसने से तीन लोगों की मौत हुई.

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इससे पहले आठ सितंबर को सिजुआ की तीनपटिया बस्ती में जमीन धंसने से एक बच्चे की मौत हो गयी और कई लोग मलबे में दबकर घायल हुए. जुलाई-अगस्त में छाताबाद में मकानों के आसपास जमीन धंसने की घटनाएं सामने आयीं. केंदुआडीह में गैस रिसाव ने भी खतरे का संकेत दिया.

आबादी के बीच बढ़ता भू-धंसान का खतरा

इन घटनाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर धनबाद में अगली बार जमीन कहां धंसेगी और खतरे वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को बचाने की तैयारी कितनी है.
100 वर्ग किमी से अधिक इलाका संवेदनशील होने का अनुमानधनबाद कोयलांचल में 100 वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र को किसी न किसी स्तर पर भू-धंसान की संवेदनशीलता से जोड़कर देखा जा रहा है. क्षेत्रवार अनुमान के अनुसार धनबाद शहर से सटे इलाकों में करीब 10 वर्ग किमी, झरिया में 25 वर्ग किमी, कतरास में 40 वर्ग किमी और निरसा में करीब 40 वर्ग किमी क्षेत्र संवेदनशील माना जा रहा है.हालांकि ये क्षेत्रवार अनुमान हैं. इन्हें सरकारी रूप से चिह्नित प्रभावित क्षेत्र का अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता.धनबाद नगर निगम का क्षेत्रफल करीब 355.77 वर्ग किमी बताया जाता है. शहर से सटे हिस्से, झरिया और कतरास के उपलब्ध अनुमानों को जोड़ने पर करीब 75 वर्ग किमी क्षेत्र भू-धंसान की संवेदनशीलता से जुड़ता है. यह नगर निगम के कुल क्षेत्रफल का करीब 21 फीसदी बैठता है. वहीं निरसा का अनुमानित संवेदनशील क्षेत्र अलग है.
2.3 से 2.75 लाख लोग संभावित खतरे की जद में

सबसे बड़ी चिंता यह है कि संवेदनशील जमीन के ऊपर सिर्फ खाली क्षेत्र नहीं हैं. यहां घर, सड़क, स्कूल, बाजार और पूरी बस्तियां बसी हुई हैं.

अनुमानों के मुताबिक धनबाद शहर से सटे संवेदनशील इलाकों में 10 से 15 हजार, झरिया में 50 से 60 हजार, कतरास में 70 हजार से एक लाख और निरसा में करीब एक लाख की आबादी संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में रह रही है.

खनन क्षेत्र में जमीन की बदली तस्वीर

क्षेत्रवार अनुमानों को जोड़ने पर करीब 2.3 से 2.75 लाख लोगों के संभावित रूप से भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों में रहने का अनुमान सामने आता है. यह आंकड़ा भी अनुमान आधारित है, इसलिए इसे प्रभावित आबादी का अंतिम सरकारी आंकड़ा नहीं माना जा सकता.
खतरा सिर्फ झरिया तक सीमित नहींधनबाद में भू-धंसान की चर्चा अक्सर झरिया और भूमिगत आग से जोड़कर की जाती है, लेकिन हाल की घटनाओं ने तस्वीर बदल दी है. कतरास और निरसा में भी संवेदनशील क्षेत्र का दायरा बड़ा बताया जा रहा है.टंडाबाड़ी, छाताबाद और सिजुआ की हालिया घटनाओं ने दिखाया है कि खतरा आबादी के बीच अचानक सामने आ सकता है. ऐसे में सिर्फ पुराने चिन्हित इलाकों पर नजर रखना पर्याप्त नहीं होगा.

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दशकों पुराने खनन की विरासत

धनबाद की जमीन के नीचे खनन का इतिहास काफी पुराना है. राष्ट्रीयकरण से पहले हुए अवैज्ञानिक खनन, भूमिगत खाली जगहों और पुराने खनन क्षेत्रों में समय के साथ होने वाले बदलाव का असर आज भी जमीन की स्थिरता पर पड़ रहा है.

भूमिगत खनन के बाद छोड़ी गयी खाली जगहें और कमजोर पिलर समय के साथ प्रभावित हो सकते हैं. कई इलाकों में पुराने गोफ और भूमिगत आग इस जोखिम को और बढ़ाते हैं. वहीं कमजोर हिस्सों में अवैध और अनियंत्रित कोयला खनन जमीन की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है.

2023 से लगातार सामने आ रही भू-धंसान की घटनाएं

भू-धंसान की घटनाएं पिछले कुछ वर्षों में लगातार सामने आती रही हैं. जनवरी 2023 में गड़ेरिया, ईस्ट बसुरिया में जमीन धंसने से दहशत फैल गयी थी. सितंबर में गोंदूडीह कोलियरी में तीन महिलाएं गोफ में समा गयी थीं. इसी वर्ष कापासारा में अवैध खनन के दौरान खदान धंसने से दो लोगों की मौत हुई.
मकानों के आसपास दिखते खतरे के निशान

2024 में लकड़का नंबर-9 और बांसजोड़ा में जमीन धंसने की घटनाएं सामने आयीं. 2025 में जोगता, केशलपुर और बांसजोड़ा में जमीन में दरार और धंसान ने चिंता बढ़ायी.

सितंबर 2025 में रामकनाली में ओबी डंप धंसने से सर्विस वैन खाई में गिर गयी थी, जिसमें सात लोगों की मौत हुई. इसके बाद 31 मार्च 2026 को टंडाबाड़ी में मकान के नीचे जमीन धंसने से तीन लोगों की जान चली गयी. उसी इलाके में बाद में भी दरार और धंसान की घटनाएं सामने आयीं.

जुलाई-अगस्त में छाताबाद में कई मकान प्रभावित हुए. आठ सितंबर को सिजुआ की तीनपटिया बस्ती में भू-धंसान में एक बच्चे की मौत हो गयी. 13 सितंबर को रामकनाली में बंद प्रोजेक्ट में अवैध खनन के दौरान खदान धंसने से तीन लोगों की मौत ने एक बार फिर खतरे की गंभीरता सामने ला दी.

मार्च के बाद 17 घटनाएं, 11 अकेले कतरास में

उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस साल मार्च के बाद धनबाद में भू-धंसान की 17 घटनाएं सामने आ चुकी हैं. इनमें 11 घटनाएं अकेले कतरास कोयलांचल में बतायी जा रही हैं.

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टंडाबाड़ी, छाताबाद और सिजुआ की घटनाओं ने साफ कर दिया है कि भू-धंसान का खतरा अब सिर्फ पुराने चर्चित क्षेत्रों तक सीमित नहीं है. आबादी वाले नये इलाकों में भी जमीन की स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं.

खतरे के बीच कई परिवार खुद कर रहे पलायन

भू-धंसान और आग से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर बसाना स्थायी समाधान माना जाता है. बेलगड़िया और करमाटांड़ में झरिया पुनर्वास योजना के तहत परिवारों को बसाने की प्रक्रिया चल रही है.

दूसरी ओर खतरे के बीच झरिया के कई परिवार खुद भी सुरक्षित इलाकों की ओर जा रहे हैं. गोविंदपुर तथा धनबाद से सटे वनस्थली कॉलोनी, कोलाकुसमा और सीएमपीएफ को-ऑपरेटिव कॉलोनी जैसे गैर-कोयला बीयरिंग क्षेत्रों में लोग जमीन और मकान लेकर बस रहे हैं.
भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र में जमीन और मकानों की फोटो

इससे संवेदनशील क्षेत्रों में आबादी का दबाव कम हो सकता है, लेकिन बिना समुचित योजना नयी बस्तियों के विस्तार से सड़क, पानी, सीवरेज और शहरी नियोजन की चुनौती बढ़ सकती है. बड़ा सवाल यह है कि खतरे वाली जमीन छोड़ने वाले परिवारों के लिए सुरक्षित और नियोजित पुनर्वास की व्यवस्था कितनी पर्याप्त है.
आग का दायरा घटा, लेकिन खतरा खत्म नहीं

धनबाद में भू-धंसान के पीछे भूमिगत आग भी महत्वपूर्ण कारक है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 1.4 वर्ग किमी क्षेत्र अब भी अग्नि प्रभावित है. लंबे समय तक जलने वाली भूमिगत आग कोयले और आसपास की चट्टानों को प्रभावित कर जमीन की संरचना और स्थिरता पर असर डाल सकती है.

एनआरएससी के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2017-18 में सतही कोयला आग का क्षेत्र 3.26 वर्ग किमी था. 2020-21 में यह घटकर 1.80 वर्ग किमी और 2024-25 में 1.53 वर्ग किमी रह गया. जनवरी 2026 में 27 फायर लोकेशन पर सक्रिय आग का क्षेत्र 1.03 वर्ग किमी दर्ज किया गया.

यानी आग का दायरा कम हुआ है, लेकिन भूमिगत आग से जुड़ा खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. ऐसे क्षेत्रों में दरार, गैस और जमीन की स्थिरता से जुड़ी समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है.

आखिर क्यों धंसती है धनबाद की जमीन?

पुराने गोफ: भूमिगत खनन के बाद बनी खाली जगह समय के साथ कमजोर हो सकती है और ऊपर की जमीन को प्रभावित कर सकती है.

कमजोर पिलर: पुराने भूमिगत खनन में छोड़े गये पिलर कमजोर होने पर जमीन की स्थिरता प्रभावित हो सकती है.

भूमिगत आग: लंबे समय तक जलने से कोयले और आसपास की चट्टानों की संरचना प्रभावित हो सकती है.

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अवैध खनन: कमजोर हिस्सों से अनियंत्रित कोयला निकासी भूमिगत संरचना को प्रभावित कर सकती है.

ओबी डंप: भारी ओवरबर्डन डंप के खिसकने या धंसने से सड़क, वाहन और आसपास की आबादी प्रभावित हो सकती है.

आबादी का दबाव: खनन प्रभावित जमीन पर बसी बस्तियां हादसे की स्थिति में सीधे जोखिम में आ जाती हैं.
81 संवेदनशील साइट, पुनर्वास सिर्फ 4.3 फीसदी

झरिया में आग और भू-धंसान प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए वर्ष 2004 में जेआरडीए का गठन किया गया था. जून 2025 में केंद्र सरकार ने संशोधित झरिया मास्टर प्लान को 5,940.47 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी.

100 वर्ग किमी से अधिक इलाका संवेदनशील

इस योजना में 81 संवेदनशील जगहों की पहचान की गयी है, जहां करीब 15,080 परिवार रहते हैं. इनमें 27 फायर लोकेशन भी शामिल हैं. मास्टर प्लान की समयसीमा दिसंबर 2028 है.

लेकिन पुनर्वास की गति सवाल खड़े करती है. 2022-23 से 2024-25 के बीच 649 परिवारों का पुनर्वास किया गया और करीब 740.17 करोड़ रुपये खर्च हुए. यानी तीन वित्तीय वर्षों में चिह्नित 15,080 परिवारों में सिर्फ 649 परिवारों का पुनर्वास हो सका. यह कुल संख्या का करीब 4.3 फीसदी है.
अब सबसे बड़ा सवाल बचाव और पुनर्वास का

लगातार हो रही घटनाओं के बीच सबसे अहम सवाल सिर्फ यह नहीं है कि जमीन कहां धंसेगी. सवाल यह भी है कि संवेदनशील इलाकों की पहचान, निगरानी और वहां रहने वाले लोगों को समय पर सुरक्षित निकालने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है.

पुराने गोफ की मैपिंग कितनी पूरी हुई है? कौन-सी बस्तियों को तत्काल हटाने की जरूरत है? भू-धंसान की वैज्ञानिक निगरानी कितनी प्रभावी है? संवेदनशील आबादी के लिए समयबद्ध पुनर्वास योजना क्या है?

धनबाद की जमीन के नीचे दशकों पुराने खनन की विरासत मौजूद है. ऐसे में हर नयी घटना सिर्फ एक स्थानीय हादसा नहीं, बल्कि जमीन के नीचे मौजूद जोखिम की चेतावनी भी है. अब चुनौती यह है कि अगली घटना का इंतजार करने के बजाय संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, निगरानी और पुनर्वास की तैयारी पहले से कितनी मजबूत की जाती है.
कहां कितना संभावित खतरा
क्षेत्र    अनुमानित संवेदनशील क्षेत्र    संभावित आबादी
धनबाद शहर से सटे इलाके    10 वर्ग किमी    10-15 हजार
झरिया    25 वर्ग किमी    50-60 हजार
कतरास    40 वर्ग किमी    70 हजार-1 लाख
निरसा    करीब 40 वर्ग किमी    करीब 1 लाख
कुल अनुमान    100 वर्ग किमी से अधिक    करीब 2.3-2.75 लाख

 

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