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बाज़ार, नई उड़ान और पूंजी की व्यवस्था सत्रों मे बड़ी संख्या में जुटे उद्यमी

By Admin|27 Jun 2026, 9:56 PM
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भोपाल

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अंतराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर समृद्ध एमएसएमई विकसित मध्यप्रदेश थीम पर रवींद्र भवन में शनिवार को हुई समिट के दौरान नये बाज़ार, नई उड़ान और पूंजी की व्यवस्था सत्रों मे निवेशको, उद्यमियों और विभिन्न व्यावसायिक तथा बैंकिंग संस्थाओं के बीच सार्थक संवाद हुआ।

एमएसएमई एवं स्वयं सहायता समूहों के लिए नवीन बाज़ार अवसर

इस सत्र में एमएसएमई के समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों, विशेषकर सीमित बाजार पहुंच, पर ध्यान केंद्रित किया गया तथा निर्यात, डिजिटल कॉमर्स, शोध एवं विकास, जोखिम कम करने तथा लॉजिस्टिक्स के क्षेत्रों में व्यावहारिक समाधानों पर विचार-विमर्श किया गया।

सुश्री अंकिता पांडे, सीनियर प्रोजेक्ट कंसल्टेंट एंड यंग एलएलपी (मॉडरेटर) एवं विशेषज्ञों ने संस्थागत सहयोग के महत्व को रेखांकित किया, जिसमें फियो (FIEO) ने प्रथम बार निर्यात करने वाले उद्यमियों को दस्तावेजीकरण, बाजार चयन तथा वैश्विक व्यापार गतिकी के संबंध में मार्गदर्शन देकर निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाने पर बल दिया। सीएसआईआर-एएमपीआरआई के डॉ. भास्कर ने कच्चे एवं अपशिष्ट पदार्थों को मूल्यवर्धित उत्पादों में परिवर्तित करने में नवाचार तथा सतत प्रक्रियाओं की भूमिका पर बल दिया तथा शोध एवं उद्योग के मध्य सुदृढ़ सहयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। ओएनडीसी (ONDC) तथा ईसीजीसी (ECGC) के प्रतिनिधियों ने बाजार पहुंच विस्तार हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तथा विशेष रूप से छोटे एवं नवीन निर्यातकों के लिए भुगतान जोखिमों से सुरक्षा हेतु निर्यात्त ऋण बीमा के लाभों को रेखांकित किया। चर्चा में इंडिया पोस्ट के विस्तृत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को एक विश्वसनीय एवं किफायती समाधान के रूप में उजागर किया गया तथा यह निष्कर्ष निकाला गया कि एमएसएमई डिजिटल उपकरणों, नवाचार, वित्तीय संरक्षण तथा सुदृढ़ सप्लाई चेन सहायता का लाभ उठाकर प्रभावी रूप से अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकते हैं।

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पूंजी तक पहुंच सत्र से एमएसएमई को मिला नया क्षेत्र

नई पीढ़ी के एमएसएमई के लिए वित्त-पोषण सत्र में मॉडरेटर सुश्री ऋचा सिंह, सीनियर मैनेजर, अन्र्स्ट एंड यंग एलएलपी ने तकनीकी सत्र का संचालन किया।विकसित हो रहे वित्त पोषण परिदृश्य पर चर्चा की गई तथा डिजिटल एवं वैकल्पिक वित्त-पोषण माध्यमों के द्वारा ऋण प्राप्ति में आने वाली बाधाओं को कम करने पर बल दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के बावजूद, एमएसएमई को समय पर एवं सुलभ वित प्राप्त करने में कोलैटरल की कमी, अपूर्ण दस्तावेज़ीकरण तथा सीमित क्रेडिट इतिहास जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। चर्चा में डिजिटल लेनदेन के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया गया, जिसमें यूपीआई डेटा को नकद प्रवाह तथा साख-योग्यता के आकलन हेतु एक उपयोगी उपकरण के रूप में प्रस्तुत किया गया। डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। बैंकिंग दृष्टिकोण से एमएसएमई द्वारा वित्तीय अनुशासन बनाए रखने, दस्तावेजीकरण में सुधार करने तथा ऋण पात्रता बढ़ाने हेतु सुदृढ साख प्रोफाइल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। इनवॉइस डिस्काउंटिंग के माध्यम से कार्यशील पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में ट्रेड्स (TReDS) की भूमिका को भी रेखांकित किया गया, जिससे त्वरित नकदी प्रवाह तथा औपचारिक क्रेडिट ट्रेल स्थापित करने में सहायता मिलती है। सत्र में यह निष्कर्ष निकाला गया कि एमएसएमई को विकास के लिए पूंजी तक पहुंच तथा सतत विस्तार सक्षम बनाने में डिजिटल अंगीकरण, वित्तीय साक्षरता, वैकल्पिक वित्त पोषण तथा सुदृढ़ संस्थागत सहयोग को समाहित करने वाला एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र आवश्यक है। दोनों सत्रों में नव उद्यमियों के प्रश्नों और शंकाओं का समाधान भी किया गया।   

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