मध्य प्रदेशराज्‍य

MP में घर बनाने का नियम बदला, 500 वर्गमीटर तक के प्लॉट के लिए स्थानीय स्तर पर ही मिलेगी अनुमति

By Admin|15 Sep 2026, 9:03 AM
f X W

भोपाल / इंदौर 
मध्य प्रदेश में 500 वर्गमीटर (करीब 5,382 वर्गफीट) तक के प्लॉट पर मकान बनाने की अनुमति अब स्थानीय निकाय के स्तर पर ही मिल सकेगी। इसके लिए T&CP से अलग डेवलपमेंट परमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी।
स्वीकृत लैंड यूज वाले प्लॉट का नक्शा नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद 30 दिन में मंजूर कर सकेगा। पहले इस प्रक्रिया में तीन से चार महीने लगते थे। 

Advertisement
Advertisement

500 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर प्रक्रिया होगी सरल
महापौर भार्गव ने कहा कि संशोधन से 500 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर भवन निर्माण और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया अधिक सरल और सुगम होगी। इससे आम नागरिकों को निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं में राहत मिलने की उम्मीद है।

विकास की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी
उन्होंने कहा कि नियमों में बदलाव से नागरिकों को सुविधा मिलेगी और शहरों में विकास की गति भी बढ़ेगी। साथ ही बेहतर शहरी नियोजन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इस निर्णय को जनसुविधा और सुगम विकास की दिशा में स्वागतयोग्य पहल बताया।

मुख्यमंत्री और मंत्री का जताया आभार
पुष्यमित्र भार्गव ने इस संशोधन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का हृदय से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जनसुविधा को प्राथमिकता देते हुए लिए गए ऐसे फैसले नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

डिजिटल दस्तावेज ही होंगे मान्य

मध्य प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में अब घर या अन्य भवन बनाने की अनुमति लेना पहले से आसान होगा। राज्य सरकार ने बिल्डिंग परमिशन के लिए कई विभागों से अनिवार्य रूप से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लाने की बाध्यता खत्म कर दी है।

READ ALSO  मध्यप्रदेश में यात्री परिवहन को मिलेगा नया विस्तार, निवेश-रोजगार और उद्योग को बढ़ावा; गांवों तक पहुंचेगी बस सेवा

अब हाउसिंग सोसायटी, नजूल और बिजली विभाग समेत कई मामलों में आवेदकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही भवन अनुज्ञा की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और केवल डिजिटल दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे।

नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी किए हैं। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, भवन अनुज्ञा प्रक्रिया को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने के लिए यह बदलाव किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे आम नागरिकों के साथ निवेशकों, बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को भी राहत मिलेगी।

कई विभागों की NOC से मिली राहत
नई व्यवस्था के तहत सहकारिता विभाग एवं गृह निर्माण सहकारी समितियों, नजूल और बिजली विभाग से मांगी जाने वाली कई प्रकार की NOC की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में भी अब आवेदकों को स्वयं NOC लाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।

यदि किसी मामले में संबंधित विभाग की राय आवश्यक होगी तो सक्षम प्राधिकारी आवेदन मिलने के सात दिन के भीतर प्रकरण संबंधित विभाग को भेजेगा। विभाग को 21 दिन के भीतर अपनी अनापत्ति या आपत्ति देनी होगी। तय समय में जवाब नहीं मिलने पर भवन अनुमति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।

इन मामलों में अब भी NOC जरूरी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) और हेरिटेज क्षेत्रों से संबंधित NOC केवल उन्हीं मामलों में जरूरी होगी, जहां ऑनलाइन GIS आधारित जांच में भूखंड प्रतिबंधित या प्रभावित क्षेत्र में पाया जाएगा। अन्य मामलों में इनकी जरूरत नहीं होगी।

READ ALSO  दशहरा-दिवाली पर ट्रेन यात्रियों के लिए खुशखबरी, भोपाल रूट पर चलेंगी स्पेशल ट्रेनें; जानें पूरी जानकारी

पर्यावरण और फायर नियमों में भी स्पष्टता
निर्धारित क्षेत्रफल से बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए ही पर्यावरणीय स्वीकृति जरूरी होगी। वृक्ष कटाई की अनुमति भी केवल उन्हीं मामलों में लेनी होगी, जहां वास्तव में पेड़ काटे जाने हों। अग्निशमन (फायर) अनापत्ति के नियम राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुसार लागू रहेंगे।

नियमों में 5 बड़े बदलाव

    दायरा: छूट 500 वर्गमीटर (5,382 वर्गफीट) तक के प्लॉट पर ही लागू होगी।
    T&CP की अनुमति खत्म: भवन निर्माण के लिए T&CP से अलग ‘डेवलपमेंट परमिशन’ लेने की जरूरत नहीं होगी।
    मंजूरी का अधिकार: नक्शा पास करने और निर्माण की अनुमति देने का अधिकार स्थानीय निकाय-नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद के पास होगा।
    अनिवार्य शर्त: प्लॉट का लैंड यूज स्वीकृत डेवलपमेंट प्लान (मास्टर प्लान) के मुताबिक होना जरूरी है।
    प्रक्रिया: सरकार ने 28 अगस्त को संशोधन का ड्राफ्ट जारी कर 5 दिन में आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। अब फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जा रहा है।

इंदौर में 3 साल से अटकी भवन अनुमतियों की प्रक्रिया फिर शुरू होने की उम्मीद

मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव की पृष्ठभूमि इंदौर की भवन अनुमति से जुड़ी समस्या रही। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने यह मुद्दा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने उठाया था।

बाणगंगा, भागीरथपुरा, न्यू देवास रोड और परदेशीपुरा समेत एक दर्जन से अधिक इलाकों में खसरा भूमि और प्लॉटों के लेआउट T&CP से स्वीकृत नहीं थे।

यहां पहले ‘डाटा फॉर्म’ के आधार पर प्लॉट तैयार कर भवन अनुमति दी जाती थी, लेकिन जुलाई 2023 में इस व्यवस्था पर रोक लग गई। इसके बाद इन इलाकों में मकानों के नक्शे पास होने की प्रक्रिया रुक गई।

READ ALSO  टैक्स असेसमेंट में पेट्रोल-डीजल-CNG पंप संचालकों को राहत, 30 दिन में आपत्ति नहीं तो आवेदन मान्य

नए नियम से इंदौर समेत प्रदेश के ऐसे भूखंड मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins