मध्य प्रदेशराज्‍य

चित्रकूट में मंदाकिनी ने बढ़ाई चिंता, घरों में घुसा पानी; अतिक्रमण ने बदली नदी की धारा

By Admin|12 Sep 2026, 3:04 PM
f X W

चित्रकूट /सतना

Advertisement
Advertisement

सतना मुख्यालय और तराई इलाके में शुक्रवार रात हुई तेज बारिश के बाद चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है। शनिवार सुबह तक नदी का पानी लगातार बढ़ता रहा। रामघाट समेत दूसरे घाटों की सीढ़ियां पूरी तरह पानी में डूब गईं। 

सावधानी के तौर पर प्रशासन ने घाटों पर बैरिकेडिंग लगा दी है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को निचले इलाकों में जाने से रोका गया है। घाट किनारे के दुकानदारों को भी सतर्क रहने और नदी के बढ़ते पानी को देखते हुए सामान सुरक्षित जगह पर हटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन लगातार जलस्तर पर नजर रख रहा है।

जलस्तर खतरे से करीब 3 मीटर नीचे फिलहाल राहत की बात यह है कि मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 3 मीटर नीचे है। हालांकि, रातभर हुई बारिश के बाद पानी तेजी से बढ़ने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। पिछले दिनों आई बाढ़ के बाद नदी के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी को लेकर घाटों पर खास नजर रखी जा रही है।

शुक्रवार को दिनभर बादल आते-जाते रहे। कभी हल्की बारिश हुई तो कुछ देर बाद तेज धूप निकल आई। इससे अधिकतम तापमान में करीब 2 डिग्री की बढ़ोतरी हुई और पारा 31.9 डिग्री दर्ज किया गया। यह सामान्य से आधा डिग्री ज्यादा रहा। न्यूनतम तापमान 24.4 डिग्री रहा, जो सामान्य था।

शाम को मौसम ने अचानक करवट बदली और करीब 15 मिनट तक हल्की से मध्यम बारिश हुई। इसके बाद रात 11.30 बजे से तेज बारिश शुरू हुई, जो रातभर रुक-रुककर जारी रही। 24 घंटे में आधा इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। बारिश के कारण उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली।

READ ALSO  खनिज संसाधनों के सदुपयोग से प्रदेश के विकास को मिलेगी रफ्तार, सिंगरौली को मॉडल माइनिंग डिस्ट्रिक्ट बनाने का लक्ष्य

ये है मौसम सिस्टम मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र वर्तमान में ओडिशा के ऊपर बना हुआ है। इसके साथ ही मानसून ट्रफ लाइन बंगाल की खाड़ी से छत्तीसगढ़, दक्षिण-पश्चिम मध्यप्रदेश होते हुए राजस्थान तक बनी हुई है। इसके प्रभाव से सतना समेत रीवा संभाग में अगले दौर में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना बनी हुई है।

1000 करोड़ लीटर पानी घरों में घुसा

सतना जिले के चित्रकूट में 5 दिनों में 3 बार आई बाढ़ के पीछे अतिक्रमण, अव्यवस्थित विकास और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 12 साल पहले मंदाकिनी के किनारे अतिक्रमण के सर्वे के निर्देश दिए थे। दूसरी ओर आरोप ये भी है कि नदी संरक्षण के लिए बने रिवर फ्रंट कॉरिडोर की वजह से भी प्राकृतिक बहाव प्रभावित हुआ है। 29 अगस्त की बाढ़ से चित्रकूट में 500 करोड़ रुपए से अधिक के नुकसान का अनुमान है, जबकि घरों और दुकानों में करीब 1 हजार करोड़ लीटर पानी घुसने का दावा किया गया है।

अब कलेक्टर ने नदी के बहाव में बाधा बने अतिक्रमण चिह्नित करने के लिए 5 सदस्यीय टीम बनाई है। भास्कर ने विशेषज्ञों से बात कर समझा कि अतिक्रमण से मंदाकिनी का बहाव कैसे प्रभावित हुआ, एनजीटी के निर्देश क्या थे और इतने वर्षों में प्रशासन ने क्या कार्रवाई की।

कैसे घरों में घुसा 1000 करोड़ लीटर पानी? समझिए इसका वैज्ञानिक गणित

पर्यावरणविद और प्रोफेसर घनश्यामदास गुप्ता ने इसका वैज्ञानिक आकलन समझाया। उनके मुताबिक चित्रकूट में मंदाकिनी की लंबाई करीब 5 किलोमीटर (5000 मीटर) है और दोनों किनारों पर कम से कम 100-100 मीटर के दायरे में अवैध निर्माण व अतिक्रमण है।

READ ALSO  कानून-व्यवस्था सुदृढ़ रहे, असामाजिक तत्वों पर हो कठोर कार्रवाई

यदि अतिक्रमण वाले दोनों किनारों की लंबाई 5 किलोमीटर और चौड़ाई 100-100 मीटर मानें, तो कुल क्षेत्रफल 10 लाख वर्ग मीटर बनता है। 10 मीटर ऊंचाई मानने पर यह 1 करोड़ क्यूबिक मीटर यानी 1,000 करोड़ लीटर के बराबर होगा।

विशेषज्ञ के इस आकलन के मुताबिक, यदि यह जगह उपलब्ध होती तो इतना पानी वहां समा सकता था। अतिक्रमण और निर्माण के कारण पानी के फैलाव की जगह कम होने से बाढ़ का असर बढ़ा।

अतिक्रमण हटाने 5 सदस्यीय टीम
कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने मंदाकिनी नदी के तटीय क्षेत्रों में हुए निर्माण कार्यों की जांच के लिए मझगवां एसडीएम के नेतृत्व में 5 सदस्यीय टीम गठित की है।

टीम सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की गाइडलाइन के आधार पर नदी किनारे के निर्माणों का परीक्षण कर जरूरी वैधानिक कार्रवाई करेगी।

जांच टीम में चित्रकूट नगर परिषद के सीएमओ, नायब तहसीलदार, पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग के एसडीओ तथा नगर परिषद के सब इंजीनियर को शामिल किया गया है। टीम नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधक सरकारी और निजी निर्माणों को चिन्हित करेगी।

हाई फ्लड लेवल भी होगा तय
जांच के दौरान मंदाकिनी नदी के हाई फ्लड लेवल को भी चिन्हित किया जाएगा। बता दें कि 28-29 अगस्त की रात आई बाढ़ के दौरान आरोग्यधाम में नदी का जलस्तर तय हाई फ्लड लेवल 139.60 मीटर से काफी ऊपर पहुंच गया था।

प्रशासन के अनुसार जलस्तर करीब 145.76 मीटर तक पहुंचने से चित्रकूट में बड़े पैमाने पर तबाही हुई।

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins