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रीवा में जातीय तनाव मामले में बड़ा एक्शन, मनीष पटेल की लगातार चौथी जमानत अर्जी खारिज

By Admin|31 May 2026, 1:21 PM
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रीवा.

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आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में गिरफ्तार यूट्यूबर मनीष पटेल की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अदालतों से राहत मिलने की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है। बीते कुछ दिनों में उनकी जमानत याचिका लगातार चार बार खारिज हो चुकी है।

जिला न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट तक किसी भी अदालत ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया है। वहीं दूसरी ओर, इस मामले ने अब कानूनी दायरे से निकलकर सामाजिक और जातीय बहस का रूप ले लिया है। रीवा और पूरे विंध्य क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध के बीच माहौल लगातार गर्माता जा रहा है।

लगातार चार बार खारिज हुई जमानत याचिका
मनीष पटेल के खिलाफ दर्ज मामले को अदालतों ने गंभीर मानते हुए अब तक कोई राहत नहीं दी है। जानकारी के अनुसार 28 मई को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पन्ना नागेश की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद 30 मई को चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश आर.के. शर्मा की अदालत ने भी याचिका निरस्त कर दी।
इससे पहले जिला न्यायालय और हाईकोर्ट भी मनीष पटेल को जमानत देने से इनकार कर चुके हैं। इस तरह अब तक चार अलग-अलग स्तरों पर उनकी जमानत याचिका अस्वीकार हो चुकी है। कानूनी जानकारों के अनुसार अब निर्धारित अवधि तक हाईकोर्ट में दोबारा जमानत याचिका दाखिल करने का रास्ता भी सीमित हो गया है।

गिरफ्तारी के बाद दो धड़ों में बंटा समाज
मनीष पटेल की गिरफ्तारी के बाद विंध्य क्षेत्र में सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। इंटरनेट मीडिया पर उनके समर्थक और विरोधी लगातार अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। कुछ संगठन उनके समर्थन में खुलकर सामने आए हैं, जबकि कई समूह गिरफ्तारी को उचित कार्रवाई बता रहे हैं। उत्तर प्रदेश के कुछ संगठनों द्वारा भी मनीष पटेल के समर्थन में रीवा पहुंचने की घोषणाएं सोशल मीडिया पर की गई हैं। इससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। पुलिस और जिला प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।

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व्हाट्सएप ग्रुपों में फैल रहा जातीय तनाव
पुलिस के अनुसार आरोपी के समर्थन में बनाए गए कुछ सोशल मीडिया और व्हाट्सएप समूहों में जाति विशेष को लेकर आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणियां साझा की जा रही हैं। इन संदेशों में सामाजिक बहिष्कार, धार्मिक गतिविधियों से दूरी बनाने और व्यापारिक संबंध समाप्त करने जैसी बातें लिखी जा रही हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ संदेशों में लोगों से एक विशेष समुदाय के नेताओं को वोट न देने, धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल न करने, व्यापारिक संबंध खत्म करने और सामाजिक व्यवहार में दूरी बनाने जैसी अपीलें की जा रही हैं। पुलिस का मानना है कि इस तरह की सामग्री सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती है और कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है।
भड़काऊ पोस्ट से बचें
रीवा पुलिस ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सार्वजनिक एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी जाति, धर्म या समुदाय के खिलाफ घृणा फैलाने वाली सामग्री साझा न करें। साथ ही बिना सत्यापन के किसी भी पोस्ट, वीडियो या संदेश को आगे बढ़ाने से बचें। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे संदेशों, वीडियो और टिप्पणियों की लगातार निगरानी की जा रही है। यदि कोई व्यक्ति सांप्रदायिक या सामाजिक वैमनस्य फैलाने का प्रयास करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एसपी ने कहा- माहौल बिगाड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
रीवा पुलिस अधीक्षक गुरुकरण सिंह ने स्पष्ट कहा है कि पुलिस फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और एक्स सहित सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रख रही है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक या भड़काऊ जानकारी साझा न करें। एसपी के अनुसार सोशल मीडिया पर सनसनीखेज दावे, पुराने वीडियो और संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत की गई तस्वीरों का उपयोग अक्सर लोगों को भड़काने के लिए किया जाता है। ऐसे मामलों में सावधानी बरतना आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि समाज में वैमनस्य फैलाने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

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अमृता पटेल ने लगाए धमकियों के आरोप
इस बीच मनीष पटेल के साथ वीडियो बनाने वाली अमृता पटेल भी चर्चा में हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दावा किया है कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। अमृता का आरोप है कि उन्हें इंटरनेट मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर अपमानजनक संदेश भेजे जा रहे हैं और जान से मारने तक की धमकी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसे संदेशों और पोस्ट के स्क्रीनशॉट मौजूद हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि धमकियां देने वाले लोग कौन हैं। दूसरी ओर रीवा पुलिस का कहना है कि अब तक इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि शिकायत मिलती है तो नियमानुसार जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

सोशल मीडिया की लड़ाई से बढ़ी प्रशासन की चुनौती
पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली भड़काऊ सामग्री किस तेजी से सामाजिक तनाव का कारण बन सकती है। मनीष पटेल का मामला अब केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक विमर्श और डिजिटल जिम्मेदारी का विषय भी बन चुका है। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सोशल मीडिया पर फैल रहे भड़काऊ संदेशों पर नियंत्रण रखना है। आने वाले दिनों में अदालत की अगली सुनवाई और पुलिस की जांच इस मामले की दिशा तय करेगी, लेकिन इतना तय है कि रीवा और विंध्य क्षेत्र की नजरें इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

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