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हाईकोर्ट आदेश के बाद बड़ी कार्रवाई, जयपुर में तनावपूर्ण हालात

By Admin|17 Apr 2026, 3:51 PM
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जयपुर

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जयपुर में को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उस समय हालात बिगड़ गए, जब हाउसिंग बोर्ड की टीम को स्थानीय लोगों के विरोध और पथराव का सामना करना पड़ा. मामला बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक फैली करीब 42 बीघा सरकारी जमीन से जुड़ा है, जिसकी कीमत 2200 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है. हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद हाउसिंग बोर्ड प्रशासन कब्जा लेने की कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंचा था. उप-आवासन आयुक्त संजय शर्मा के नेतृत्व में टीम जेसीबी मशीनों के साथ पहुंची और अवैध निर्माणों को हटाने की शुरुआत की. इस दौरान बाउंड्री वॉल और अस्थायी ढांचों को तोड़ा जाने लगा. तभी प्रशासन की टीम को मौके पर विरोध झेलना पड़ा.

महिलाओं ने जेसीबी पर फेंके पत्थर
कार्रवाई शुरू होते ही वहां रह रहे लोगों ने विरोध जताया और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया. कुछ महिलाओं द्वारा जेसीबी पर पत्थर फेंके जाने के बाद स्थिति और बिगड़ गई, जिसके चलते प्रशासन को कुछ समय के लिए कार्रवाई रोकनी पड़ी.

भू-माफियाओं ने किया घोटाला!
बताया जा रहा है कि संबंधित जमीन का अधिग्रहण हाउसिंग बोर्ड ने वर्ष 1989 में किया था और 1991 में इसकी प्रक्रिया पूरी हो गई थी, लेकिन लंबे समय तक कब्जा नहीं लिया जा सका. इसी बीच कथित तौर पर भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यहां

कॉलोनी विकसित कर दी और प्लॉट बेच दिए.
सूत्रों के अनुसार, पुराने दस्तावेजों के सहारे जमीन का सौदा दिखाकर कई लोगों को कम दामों में भूखंड आवंटित किए गए. साल 2019 में कॉलोनी के नियमितीकरण का मामला उठा. तब जयपुर विकास प्राधिकरण ने एनओसी मांगी, लेकिन हाउसिंग बोर्ड ने इसे खारिज कर दिया. इसके बाद मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच एसीबी को सौंप दी गई थी. फिलहाल, प्रशासन की सख्ती और स्थानीय विरोध के बीच यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है.

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