छत्तीसगढ़राजनांदगांव जिला

राजनांदगांव : अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगना और क्षमा करना भी सीखें : श्रेयांशप्रभ…

By kadwaghut|10 Sep 2026, 10:09 AM
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राजनांदगांव , जैन बगीचा स्थित नए हाल में संवत्सरी पर्व के दूसरे दिन बुधवार को अपने नियमित प्रवचन में खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर के शिष्य श्रेयांशप्रभ सागर ने कहा कि क्षमा मांगना व क्षमा देना, दोनों ही महान कार्य है। इससे मन का बोझ हल्का हो जाता है और एक शांति मिलती है। यदि कोई कष्ट में है तो उसकी मदद करें और उसका सपोर्ट करें। जरूरी नहीं है कि पैसे से ही सपोर्ट हो, सपोर्ट कई तरीके से दे सकते हैं। कहा कि हमें गलतियों को दोहराना नहीं चाहिए।

हम इंसान हैं और इंसानों से गलतियां तो होती ही रहती है लेकिन हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि गलतियों की पुनरावृत्ति ना हो। इसके अलावा गलतियों के लिए क्षमा मांगना और क्षमा देना भी सीखें। कहा कि माफ करो तो दिल से करो। झूठे दिल से कभी माफ मत करो। इसी तरह माफी मांगों तो दिल से मांगों, झूठे दिल से कभी भी माफी मत मांगो।

स्वतंत्रता दिवस या संवत्सरी जैसा कोई भी दिन जागरूकता को लाने के लिए आता है। स्वतंत्र तो हम पहले से ही है लेकिन स्वतंत्रता दिवस हमारी स्वतंत्रता के लिए दी गई कुर्बानियों की याद दिलाता है। ठीक इसी तरह संवत्सरी पर्व हमारे भीतर क्षमा भावना की जागरूकता लाने के लिए आता है।

क्षमा करने से कोई व्यक्ति ऊंचा-नीचा नहीं हो जाता क्षमा तो हम कभी भी मांग सकते हैं और कहीं भी मांग सकते हैं लेकिन संवत्सरी के दिन हम खुले मन से बिना किसी हिचक के एक- दूसरे से क्षमा मांगते हैं और क्षमा देते हैं। क्षमा मांगने या क्षमा देने से कोई ऊंचा-नीचा नहीं हो जाता। दोनों ही महान कार्य हैं।

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