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CG : हत्या के प्रकरणों के अनुसंधान पर पुलिस अधिकारियों का हुआ प्रशिक्षण …

By lokesh sharma|29 Apr 2026, 12:24 PM
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रायगढ़। बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग के द्वारा हत्या के गंभीर मामलों में विवेचना के स्तर को वैश्विक मानकों के अनुरूप सुधारने और न्यायालयों में सजा की दर बढ़ाने के उद्देश्य से एक विस्तृत कार्ययोजना और दिशा-निर्देश जारी करते हुए आज दिनांक 28/4/26 को रेंज स्तर के पुलिस अधिकारियों का एक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। आईजी गर्ग ने स्पष्ट किया है कि पुलिस का उद्देश्य केवल आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उसे वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सजा दिलाना है।

इस नई रणनीति के तहत बिलासपुर रेंज के पुलिस अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए हैं, जिसमें एक चेकलिस्ट को जारी किया गया है। अब से हत्या के हर प्रकरण के चालान (Charge-sheet) में इस चेकलिस्ट का पालन अनिवार्य होगा। प्रमुख दिशा-निर्देश और नई कार्यप्रणाली ‘ई-साक्ष्य’ (e-Sakshya) और नए कानूनों का अनुपालन: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 105 के तहत अब सभी प्रकार की जप्ती ‘ई-साक्ष्य’ ऐप के माध्यम से वीडियोग्राफी करते हुए की जाएगी। इससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और गवाहों के मुकर जाने (Hostile) की स्थिति में भी तकनीकी साक्ष्य प्रभावी रहेंगे।

क्राइम सीन का वैज्ञानिक प्रबंधन: घटनास्थल पर ‘गोल्डन ऑवर’ के महत्व को समझते हुए क्षेत्र को तत्काल टेप लगाकर सील किया जाएगा। फोरेंसिक, डॉग स्क्वॉड और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों की उपस्थिति में ही साक्ष्य संकलन होगा। किसी भी साक्ष्य को बिना दस्ताने (Gloves) के छूना प्रतिबंधित रहेगा। चेकलिस्ट के आधार पर समीक्षा: विवेचना में मानवीय त्रुटि को शून्य करने के लिए 124 बिंदुओं का एक प्रोटोकॉल तैयार किया गया है। इसमें एफआईआर से लेकर चार्जशीट फाइल करने तक की हर प्रक्रिया का प्रलेखन (Documentation) शामिल है, ताकि बचाव पक्ष को तकनीकी खामियों का लाभ न मिल सके।

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उन्नत डिजिटल और साइबर फॉरेंसिक: विवेचक अब आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट्स जैसे गूगल टेकआउट (Google Takeout), इंटरनेट हिस्ट्री और व्हाट्सएप लॉग्स की बारीकी से जांच करेंगे। घटनास्थल के आसपास के 100 किमी के दायरेमें लगे सीसीटीवी कैमरों की त्रिनयन ऐप के जरिए मैपिंग की जाएगी। सीसीटीवी फुटेज को सीधे डीवीआर (DVR) से जप्त कर भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की धारा 63(4)(c) के प्रमाण पत्र के साथ केस डायरी का हिस्सा बनाया जाएगा।

DNA एवं जैविक साक्ष्यों से लिंक स्थापित करना: मृतक के नाखूनों में फंसे आरोपी की स्किन, संघर्ष के दौरान टूटे बाल और कपड़ों पर मौजूद डीएनए (DNA) ट्रेस करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि वैज्ञानिक रूप से आरोपी की उपस्थिति घटनास्थल पर सिद्ध की जा सके। रात्रिकालीन पोस्टमार्टम एवं वीडियोग्राफी: संवेदनशील मामलों में भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार पर्याप्त रोशनी में रात में भी पोस्टमार्टम कराया जा सकेगा, जिसकी वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी। पीएम रिपोर्ट में स्पष्टता न होने पर डॉक्टरों से अनिवार्य रूप से एफएसएल (FSL) क्वेरी कराई जाएगी। साक्ष्यों की अटूट श्रृंखला (Chain of Custody): साक्ष्यों के संकलन से लेकर उन्हें थाने के मालखाने और फिर एफएसएल (FSL) तक भेजने का पल-पल का रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा, जिससे साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ की किसी भी संभावना को खत्म किया जा सके। लक्ष्य: त्रुटिहीन विवेचना आईजी बिलासपुर ने कड़े निर्देश दिए हैं कि अप्रैल 2026 के बाद होने वाले सभी हत्या के प्रकरणों की विवेचना इन नए वैज्ञानिक और तकनीकी प्रोटोकॉल के माध्यम से की जाए। बिलासपुर रेंज पुलिस अब सीसीटीएनएस (CCTNS) प्रविष्टि से लेकर साइबर साक्ष्यों (CDR, IPDR, IMEI) के संकलन तक पूरी तरह से पारदर्शी और पेशेवर दृष्टिकोण अपनाएगी, ताकि अपराधियों को कानून के शिकंजे में कसकर सख्त सजा दिलाई जा सके।आज के प्रशिक्षण सत्र में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली श्री भोजराम पटेल के अलावा रेंज के सभी जिलों के एएसपी से लेकर उपनिरीक्षक तक के अधिकारी सम्मिलित हुए।इस प्रशिक्षण सत्र का संचालन virtual mode पर किया गया। आईजीपी श्री गर्ग ने स्वयं पुलिस अधिकारियों को हत्या के प्रकरणों की विवेचना के लिए प्रशिक्षक के रूप में मार्गदर्शन देते हुए, पीपीटी के माध्यम से विवेचना के की-पॉइंट्स और अमल में लाने वाले महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान दी। श्री रामगोपाल गर्ग ने जानकारी दी है, की ऐसे प्रशिक्षण के सत्र प्रति सप्ताह, अलग अलग विषयों पर रेंज के पुलिस अधिकारियों केलिए आयोजित किए जाएंगे, ताकि पुलिस अधिकारी नवीनतम अनुसंधान तकनीकों से खुद को अपग्रेड कर , कमियों को दूर कर सकें।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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