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जैन बगीचा स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय भवन में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर के शिष्य श्रेयांशप्रभ सागर ने बुधवार को कहा कि जंगल में बांसों के टकराने से चिंगारी पैदा होती है जो हवा के संपर्क में आने पर दावानल का रूप धारण कर फैलने लगती है। ठीक इसी तरह हमारी एक बात हवा में मिल जाए तो आग की तरह फैल जाती है। इसलिए हमें सोच समझ कर ही शब्दों का उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम भगवान महावीर तो नहीं बन सकते किंतु उनके कुछ नियमों को तो अपना सकते हैं। कहा कि आप अपने बच्चों को एडजस्ट करना मत सिखाइए बल्कि स्थिति से निपटने का तरीका बताइए। मुनिश्री ने कहा कि दूसरों पर हिंसा करना ही हिंसा नहीं बल्कि हिंसा नहीं है बल्कि खुद पर भी हिंसा करना भी हिंसा है। बच्चों को समझना और समझाना सिखाए। कहा कि चुप रहना भी आवश्यक है लेकिन कहां पर चुप रहना और कहां बोलना है।
