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CG : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस आज लेंगे शपथ …

By kadwaghut|07 Sep 2026, 10:14 AM
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रायपुर: प्रदेश के राज्यपाल रमेन डेका सोमवार की दोपहर 1.30 बजे छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के नए चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। रायपुर स्थित लोकभवन. के छत्तीसगढ़ मंडपम में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन होगा। इतिहास किताबें खोजें कौन हैं जस्टिस कृष्ण राम महापात्र पूरा नाम: जस्टिस कृष्ण राम महापात्र (Justice K.R. Mohapatra) जन्म तिथि: 18 अप्रैल 1965 पिता का नाम: स्वर्गीय जस्टिस शरत चंद्र महापात्र

शिक्षा: कला स्नातक (B.A), एलएलबी (LL.B) वर्तमान पद: जज, उड़ीसा हाईकोर्ट (17 अप्रैल 2015 से) पारिवारिक पृष्ठभूमि और शुरुआती शिक्षा जस्टिस कृष्ण राम महापात्र का जन्म 18 अप्रैल 1965 को हुआ था। कानून और न्यायपालिका से उनका नाता पारिवारिक है। उनके पिता स्वर्गीय जस्टिस शरत चंद्र महापात्र भी न्यायपालिका में अपनी अहम सेवाएं दे चुके हैं। पिता के आदर्शों और कानूनी माहौल में पले-बढ़े कृष्ण राम महापात्र ने शुरुआत से ही वकालत को अपना लक्ष्य बनाया। उन्होंने अपनी शिक्षा के दौरान कला स्नातक (B.A) और बाद में कानून की डिग्री (LL.B) हासिल की।

26 साल का वकालत का शानदार अनुभव अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद जस्टिस केआर महापात्र ने 7 फरवरी 1988 को उड़ीसा स्टेट बार काउंसिल में बतौर एडवोकेट अपना रजिस्ट्रेशन कराया। उन्होंने बार में लगभग 26 वर्षों तक प्रैक्टिस की। इस दौरान उन्होंने सिविल, क्रिमिनल, सर्विस और संवैधानिक कानूनों के मामलों में गहरी महारत हासिल की। उन्होंने गार्डियंस एंड वार्ड्स एक्ट, हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्डियनशिप एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट जैसे संवेदनशील पारिवारिक और बाल संरक्षण मामलों में भी विशेष पहचान बनाई। अपने लंबे करियर में उन्होंने राज्य सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील (Additional Standing Counsel) और उड़ीसा लोक सेवा आयोग (OPSC) के वकील के रूप में काम किया। इसके अलावा उन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा, नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड और केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) का भी कानूनी प्रतिनिधित्व किया।

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उड़ीसा हाईकोर्ट में जज और अब चीफ जस्टिस का सफर लंबे समय तक बार में अपनी काबिलियत साबित करने के बाद 17 अप्रैल 2015 को उन्हें उड़ीसा हाईकोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत किया गया। उड़ीसा हाईकोर्ट में रहते हुए उन्होंने कई अहम और ऐतिहासिक फैसले दिए जिनमें मध्यस्थता (Arbitration) और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े कई संवेदनशील मामले शामिल रहे हैं।

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