छत्तीसगढ़राजनांदगांव जिला

राजनांदगांव : जिस शरीर का हम जतन करते हैं अंत में होती है उसी की दुर्गति…

By kadwaghut|31 Aug 2026, 10:32 AM
f X W

राजनांदगांव , ज्ञान वल्ल्भ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन के तहत खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर के शिष्य समयप्रभ सागर ने रविवार को कहा कि मेरा जो है वह मेरे ही पास रहेगा। उसे मुझसे कोई ले नहीं सकता। मैं एक आत्मा हूं और मेरे पास मेरा शरीर है। शरीर मेरा है लेकिन मैं शरीर का नहीं हूं।

मुनि ने कहा कि हम अपने रास्ते में बढ़ रहे हैं और इस रास्ते में हम मकान बना लेते हैं जिसे हम मेरा मकान कहते हैं। आखिर एक न एक दिन हमें इस मकान से निकलना ही है तो फिर यह मेरा मकान कैसे हो सकता है। मकान बनाना ही है तो ऐसा मकान बनाओ जहां से तुम्हे कोई नहीं निकाल सकता। कहा कि जहां आपको शाश्वता सुख मिल सकता है, वहां हम क्या मांगते हैं! हम अपनों के सुख स्वास्थ्य की कामना करते हैं किंतु शाश्वत सुख की कामना नहीं करते।

हम अपने बच्चों को ठीक से संस्कार नहीं देते और कहते हैं कि बच्चा नासमझ है। कहा कि आखिर हमने बच्चे को समझाने की कब कोशिश की? हमने अपने बच्चों को केवल मां-बाप, भाई-बहन ही सिखाया है जिससे हमारा वास्तविक रिश्ता है उसके बारे में हमने क्या बताया? हमारा काम हमें स्वयं ही करना है। कहा कि आपको जो हासिल करना है, वो कर लो। शरीर को पाल-पोसकार आपने बड़ा किया किन्तु अंत में सबसे ज्यादा दुर्गति उसी की होती है। आप अपने आत्मा के स्वरूप को समझे और मोक्ष मार्ग की ओर आगे बढ़े।

READ ALSO  ओलंपिक मानक के स्विमिंग पूल, सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक और स्केटिंग रिंग के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश
अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button