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अब घर बैठे AIIMS भोपाल की 8 स्वास्थ्य सेवाएं, QR कोड से डॉक्टर की अपॉइंटमेंट और जांच रिपोर्ट पाएं

By Admin|30 Aug 2026, 4:01 PM
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भोपाल 
मध्यप्रदेश के भोपाल एम्स में मरीजों को अब डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लेने, जांच रिपोर्ट और डिस्चार्ज समरी हासिल करने सहित अन्य कामों के लिए बार-बार अस्पताल आने और कतार में लगने की जरूरत नहीं होगी। एम्स ने वाट्एसेप-स्वास्थ्य सेवा शुरू की है। मरीजों को अलग मोबाइल ऐप डाउनलोड करने या किसी नए पोर्टल पर जाने की जरूरत नहीं होगी। बस क्यूआर कोड स्कैन करना होगा और हाई लिखकर ओपीडी सबमिट करना होगा। अभी इसे परीक्षण के तौर पर शुरू किया गया है। संस्थान के डॉ. बाबूलाल सोनी ने बताया कि इसमें और सुधार के साथ अन्य सेवाओं को भी जोड़ा जाएगा।

एक वाट्एसेप, कई स्वास्थ्य सेवाएं
-इस सुविधा के जरिए मरीज मोबाइल से ओपीडी के उपलब्ध समय और स्लाट देख सकेंगे और घर बैठे डॉक्टर से अपॉइंटमेंट ले सकेंगे। केवल डॉक्टर को दिखाने के लिए अस्पताल आने वाले मरीजों को राहत मिलेगी।

-प्रयोगशाला और अन्य नैदानिक जांचों की रिपोर्ट और अस्पताल से डिस्चार्ज होने की समरी रिपोर्ट भी वाट्एसेप पर देखी और डाउनलोड की जा सकेगी।

-आभा पहचान संख्या बना सकेंगे और उसे उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ सकेंगे। अस्पताल द्वारा जारी जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र भी इससे प्राप्त और डाउनलोड किए जा सकेंगे।

वाट्एसेप पर प्रमुख सुविधाएं

-ओपीडी अपॉइंटमेंट और उपलब्ध स्लाट की जानकारी
-प्रयोगशाला व अन्य जांच रिपोर्ट देखना और डाउनलोड करना
-डिस्चार्ज समरी प्राप्त करना
-आभा आइडी बनाना और जोड़ना
-जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र प्राप्त व डाउनलोड करना
-ओपीडी व अन्य मरीज सेवाओं की जानकारी

एम्स ने किया सफल ऑपरेशन
बीते दिनों पहले ही एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने 52 वर्षीय मरीज के दो अलग-अलग कैंसर का एक ही ऑपरेशन में सफल उपचार किया। मरीज लगातार बढ़ते पीलिया, पूरे शरीर में खुजली और तेजी से वजन घटने की शिकायत लेकर एम्स आया था। जांच में पता चला कि कैंसर के कारण पित्त नली जाम हो गई है और दाहिनी किडनी में 6.5 सेंटीमीटर का कैंसर ट्यूमर भी है। मरीज की स्थिति को देखते हुए यूरोलॉजी और सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने संयुक्त सर्जरी की योजना बनाई। सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी टीम ने व्हिपल प्रक्रिया के जरिए पित्त नली और आसपास के कैंसरग्रस्त हिस्से को हटाया। यूरोलॉजी टीम ने राइट रेडिकल नेफ्रेक्टॉमी कर कैसरग्रस्त दाहिनी किडनी को निकाल दिया।

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