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राजनांदगांव | ज्ञानवल्लभ भवन में चातुर्मास पर प्रवचन देते हुए जैन मुनि श्रेयांश प्रभ सागर ने बुधवार को कहा कि अतीत नहीं होता तो आज आप जो हैं वह नहीं होते। अतीत से हमको बहुत कुछ सीखने को मिलता है। डर हमारे विचारों पर बैठ जाने की वजह से हम कोई काम सही ढंग से कर नहीं पाते। प्रेम करने के लिए सामने एक व्यक्ति की जरूरत होती है जबकि पछतावा के लिए किसी की जरूरत नहीं होती।
जब हम पुराने मकान को छोड़कर नए मकान में जाते हैं तो पुराने मकान की ईट-पत्थर को साथ में नहीं लाते, उन्हें वहीं छोड़ देते हैं। ठीक इसी तरह पुरानी बातों को वहीं छोड़ दो। गलतियां तो हर किसी से होती है परंतु गलतियों को सुधारो, ना कि उस पर दुख व्यक्त करते बैठे रहो। उन्होंने कहा कि पुराना जो है उसे छोड़ना पड़ता है किन्तु जो आपके आगे बढ़ाने में सहायक रहा हो उसे आप कभी मत छोड़ो। आप क्या नहीं कर रहे हो वह तो आप देख ही लेते हो किंतु आप क्या कर सकते हो, इसे आप देख नहीं पाते।
