कडुवाघूंट
शहर अपना संस्कारधानी, जिला अपना राजनांदगांव। जिला भले ही अब चार हिस्सों में बंट चुका हो, लेकिन शहर के संस्कार आज भी जिंदा हैं। और शायद इतने जिंदा हैं कि बिजली जाए, सड़क अंधेरे में डूबे, गायें हादसों का शिकार हों या त्योहारी मिठाइयों पर सवाल उठें—हम सब बड़ी शालीनता से देखते, सुनते और फिर अपने-अपने काम में लग जाते हैं।
अंधेरे में हाईवे, हादसे के बाद जागी रोशनी!
जीई रोड पर लंबे समय से कई हिस्सों में अंधेरा कायम है। इसी हाईवे पर दर्दनाक हादसे में 11 गायों की मौत ने प्रशासन को भी झकझोर दिया। हादसे के बाद हाईवे से मवेशियों को हटाने और संबंधित स्थानों पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
सवाल छोटा सा है—
रोशनी हादसे के पहले क्यों नहीं आती?
हमारे यहां व्यवस्था भी शायद बड़ी संस्कारी है। पहले घटना होने देती है, फिर फाइल चलती है, पत्र लिखा जाता है और उसके बाद जिम्मेदार विभाग को याद आता है कि सड़क पर रोशनी भी जरूरी चीज होती है।
काश, सरकारी बल्ब भी दुर्घटना के बजाय समय देखकर जलने लगें।
राखी की मिठास में ‘लेबल’ हुआ गायब!
रक्षाबंधन का त्योहार सामने है। बाजार मिठाइयों से सज चुका है। शहर में रायपुर, नागपुर, आगरा सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से डिब्बाबंद मिठाइयां पहुंचने की बातें सामने आ रही हैं।
*अब मजेदार बात सुनिए—
कुछ पैकिंग पर यह साफ नहीं कि मिठाई कब बनी?
कब तक खाने योग्य है?
कहां बनाई गई?
निर्माता कौन है?
और जहां विवरण मौजूद है, वहां भी उसकी सत्यता की जांच जरूरी है।
शिकायत कलेक्टर सहित संबंधित खाद्य एवं औषधि प्रशासन तक पहुंची तो विभागीय अमला भी निरीक्षण के लिए निकल पड़ा।
लेकिन अपनी पुरानी समस्या वही है—
आज सैंपल लिया जाएगा, रिपोर्ट कब आएगी इसका भरोसा नहीं।
तब तक राखी निकल जाएगी, मिठाई पेट में पहुंच जाएगी और रिपोर्ट शायद फाइल में रास्ता खोजती रहेगी।
त्योहार जनता आज मनाती है, जांच रिपोर्ट सरकारी कैलेंडर देखकर आती है!
अगस्त आया, केक-कटाई का मौसम लाया!
अगस्त महीना इस बार राजनीतिक और सामाजिक जन्मोत्सवों के रंग में रंगा दिखाई दिया।
हाल ही में जननायक कहे जाने वाले हमारे महानायक का जन्मदिन बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। अखबारों के पन्ने शुभकामना संदेशों और विज्ञापनों से सजे रहे। समर्थकों का उत्साह भी देखते बनता था।
25 अगस्त को पूर्व सांसद अशोक शर्मा जी का जन्मदिन भी उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से रात तक बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।
अब 28 अगस्त, रक्षाबंधन के दिन वरिष्ठ भाजपा नेता खूबचंद पारख जी का जन्मदिन है। यहां भी शुभचिंतकों ने तैयारियां पूरी कर रखी हैं।
खैर, जन्मदिन खुशी का मौका है और खुशी मननी भी चाहिए।
बस शहर की जनता की एक छोटी सी इच्छा है
जितनी तेजी से जन्मदिन की तैयारी होती है, उतनी ही तेजी से सड़क, बिजली, सफाई और व्यवस्था की तैयारी भी होने लगे तो संस्कारधानी सच में चमक उठे।
25 साल बच्चों को पढ़ाया, अब गुरुजी देंगे अपना इम्तिहान!
जिस शिक्षक ने 25 से 30 साल तक बच्चों को पढ़ाया…
जिसके पढ़ाए छात्र आज डॉक्टर, इंजीनियर, अफसर और बड़े पदों पर पहुंच चुके हैं…
अब वही शिक्षक परीक्षा देकर यह साबित करे कि वह पढ़ाने योग्य है!
ऐसे सरकारी निर्णय को लेकर शिक्षकों में चिंता स्वाभाविक है।
वर्षों तक एक ही विषय पढ़ाते-पढ़ाते शिक्षक अपने विषय में अनुभवी हो चुके हैं। ऐसे में अचानक परीक्षा का फरमान कई सवाल खड़े करता है।
और गुरुजी की चिंता भी समझिए—
यदि परीक्षा में नंबर कम आ गए तो जिस छात्र को कल तक समझाते थे—
“बेटा, पढ़ाई कर लो वरना नंबर कम आएंगे…”
वही छात्र पूछ बैठेगा—
“गुरुजी, आपके कितने आए?”
तब गुरुजी ब्लैकबोर्ड देखें या सरकार का आदेश?
शिक्षकों का मूल्यांकन होना गलत नहीं, लेकिन अनुभव का मूल्य भी होना चाहिए। परीक्षा व्यवस्था ऐसी हो कि शिक्षक सम्मानित महसूस करें, अपमानित नहीं।
चलते-चलते…
संस्कारधानी में सब कुछ चल रहा है—
*अंधेरे में सड़क चल रही है,
हाईवे पर व्यवस्था चल रही है,
बाजार में मिठाइयां चल रही हैं,
राजनीति में जन्मदिन चल रहे हैं,
गुरुजी की परीक्षा की तैयारी चल रही है,
और बिजली?
वो कभी-कभी चली जाती है!
फिर मिलेंगे संस्कारधानी की कुछ मीठी, कुछ तीखी और कुछ ऐसी खबरों के साथ जिन्हें पढ़कर आप कहेंगे—
“वाह रे शहर… तेरा भी जवाब नहीं!”
*कल्लू की कलम से...*
