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राजनांदगांव : दूसरों के अवगुण नहीं, गुण को देखने की आदत डालें: साध्वी…

By kadwaghut|21 Aug 2026, 11:23 AM
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डोंगरगांव | शांतिनाथ जैन श्वेतांबर मंदिर की धर्मसभा में नियमित प्रवचन के दौरान साध्वी आज्ञांजना जी मसा ने गुरुवार को कहा कि संसार में आए हैं तो जीवन की यात्रा पूरी करनी ही होगी। संसारी जीव के रूप में कर्मबंध होना स्वाभाविक है। कर्मों का उदय होगा तो उन्हें भोगना भी पड़ेगा, लेकिन उनका प्रभाव समाप्त होने के बाद वे चले भी जाते हैं। समस्या यह है कि मनुष्य को जो अच्छा लगता है, वह उसी पर अधिक ध्यान देता है और जो पसंद नहीं आता, उसे तुच्छ समझने लगता है।

कहा कि जीवन की यात्रा कठिन है और मनुष्य के विचार, धारणाएं पल-पल बदलती रहती हैं। एक ही समय में कोई वस्तु या व्यक्ति अच्छा भी लग सकता है और दूसरे ही क्षण वही बुरा प्रतीत हो सकता है। इसलिए किसी के बारे में सुनी-सुनाई बातों के आधार पर धारणा बनाकर अपने शब्दों से ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए, जिससे कर्मबंध और अधिक तीव्र हो जाए।

जटाशंकर का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक व्यक्ति अपने मित्र के घर पहुंचा तो पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद चल रहा था। उसने अपनी धारणा बना ली कि दोनों हमेशा लड़ते रहते हैं। वहीं दूसरा व्यक्ति उसी दंपती के बीच प्रेम और समर्पण देखकर उनकी चार लोगों के बीच प्रशंसा करने लगा। तुरंत निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है: व्यक्ति के बाहरी व्यवहार के आधार पर उसके बारे में तुरंत निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। जिसकी जैसी दृष्टि होगी।

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