छत्तीसगढ़बिलासपुर जिला

CG : अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट का अहम फैसला …

By kadwaghut|21 Aug 2026, 10:44 AM
f X W

बिलासपुर: अनुकंपा नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि दिवंगत शासकीय कर्मचारी की विधवा को नियुक्ति में सर्वोच्च प्राथमिकता मिलेगी। विधवा के पात्र और उपलब्ध होने की स्थिति में उसकी जगह कर्मचारी की बहन या अन्य कोई अनुकंपा नियुक्ति का दावा नहीं कर सकते। यह फैसला जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की सिंगल बेंच ने सुनाया। याचिकाकर्ता दीपशिखा साहू के पिता शासकीय कर्मचारी थे। सेवा के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनके बेटे और याचिकाकर्ता के भाई अभिषेक साहू को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। अभिषेक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, तिलक नगर, गुढ़ियारी में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत थे। 9 जुलाई 2021 को सेवा के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

अभिषेक के परिवार में उनकी पत्नी हीरा साहू, बहन दीपशिखा और दिव्यांग भाई हैं। भाई की मृत्यु के बाद दीपशिखा और उसकी भाभी हीरा साहू, दोनों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने 23 अक्टूबर 2021 को हीरा साहू को भृत्य के पद पर नियुक्ति देने का आदेश जारी किया। डीईओ के आदेश को चुनौती देते हुए दीपशिखा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि उसकी भाभी हीरा साहू अलग रह रही हैं और परिवार को आर्थिक सहायता नहीं दे रही हैं। इसलिए उनकी नियुक्ति निरस्त कर उसे अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।

मामले में राज्य शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 14 जून 2013 की अनुकंपा नियुक्ति नीति के क्लॉज-5 के तहत विधवा को सर्वोच्च प्राथमिकता है और अधिकारियों ने इसी प्रावधान के अनुसार मृत कर्मचारी की पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति दी है। कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में जारी नीति के क्लॉज-5 का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र सदस्यों का क्रम निर्धारित है। इसमें सबसे पहले दिवंगत शासकीय सेवक की विधवा या विधुर, उसके बाद पुत्र या दत्तक पुत्र, फिर अविवाहित पुत्री या दत्तक पुत्री और उसके बाद आश्रित विधवा पुत्री तथा आश्रित तलाकशुदा पुत्री को रखा गया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता मृत शासकीय कर्मचारी की बहन है, जबकि नियुक्ति पाने वाली महिला उसकी विधवा है। नीति में बहन को अनुकंपा नियुक्ति के लिए विधवा से ऊपर कोई प्राथमिकता नहीं दी गई है। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए डीईओ के आदेश को सही ठहराया है।

READ ALSO  CG : अपने नाम जमीन की रजिस्ट्री पर प्रेमलता को मिली आर्थिक राहत ...
अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins