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खरीफ फसल का सीजन शुरू होते ही मवेशी फिर शहर की ओर खदेड़े जा रहे हैं। इससे हाईवे घुमंतू मवेशियों का डेरा बन गया है। जहां रोजाना ट्रकों की चपेट में आकर गायों की मौत हो रही है। सोमवार को एक ही दिन में चार अलग-अलग जगहों पर 15 गायों की मौत हो गई। करीब इतने ही गंभीर रूप से घायल हैं।
नेशनल हाईवे की टीम से मिली जानकारी के मुताबिक सोमवार सुबह तुमड़ीबोड़ के पास 2 गायों की ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई। यहीं तीन गाय गंभीर रूप से घायल हैं। जिनका इलाज तुमड़ीबोड़ के ग्रामीण व व्यापारी करा रहे हैं। सोमवार सुबह ही मलईडबरी के पास 4, सोमनी में 2 और राजनांदगांव शहर से लगे हाईवे पर 7 गायों के शव मिले हैं। जिन्हें ट्रकों ने बुरी तरह कुचल दिया। बीते महीनेभर की बात करें तो ऐसी स्थिति रोज बन रही हैं। वहीं हाईवे पर 50 से अधिक गाय ट्रकों की चपेट में आने से दम तोड़ चुकी हैं। लेकिन सड़क से मवेशी हटाने के लिए बनाई गई टीम औपचारिक की साबित हो रही है।
पंचायत सचिव, रोजगार सहायकों की बनी थी टीम घुमंतू मवेशियों को सड़क से हटाने के लिए टेड़ेसरा से लेकर बागनदी तक हाईवे से लगे पंचायतों में विशेष टीम बनाई गई थी। यह टीम जिला प्रशासन ने बनाई थी। जिसमें पंचायतों के सचिव, रोजगार सहायक, पशु चिकित्सा विभाग के कर्मचारी और डॉक्टरों को भी नोडल अधिकारी बनाया गया था। लेकिन यह टीम सिर्फ कागजों में सिमटकर रह गई। अब तक एक भी हिस्से में हाईवे से मवेशियों को हटाने कोई ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी।
निगम और हाईवे की टीम के पास रखने जगह नहीं सड़क पर घूम रहे आवारा मवेशियों को हटाने की जिम्मेदारी नगर निगम और नेशनल हाईवे की टीम को भी दी गई है। दोनों के पास अपना खुद का काउ कैचर टीम मौजूद हैं। लेकिन सड़क से गाय को पकड़कर ये टीमें दूसरे हिस्से में छोड़ देती है। इसकी वजह निगम के कांजी हाउस में क्षमता की कमी है। अलग-अलग कांजी हाउस में 100 से 150 मवेशी रखने की ही जगह है। जबकि हाईवे पर विचरण करने वाली गायों की संख्या इससे कहीं अधिक है।
