कोर्ट में विचाराधीन जमीन पर पहुंचा राजस्व अमला; 15 जून से 15 अक्टूबर तक सीमांकन पर रोक का हवाला, मुख्यमंत्री-आईजी-एसपी से शिकायत
राजनांदगांव। ग्राम ढाबा स्थित कृषि भूमि में खड़ी धान की फसल के बीच सीमांकन की कार्रवाई को लेकर शुक्रवार को विवाद की स्थिति बन गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि राजस्व अधिकारियों के साथ पुलिस बल खेत में पहुंचा और आपत्ति के बावजूद सीमांकन की कार्रवाई का प्रयास किया गया।

किसानों ने मारपीट, गाली-गलौज और दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से की है।शिकायतकर्ता नवनीत मिश्रा और रजनीश मिश्रा ने पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में बताया है कि संबंधित कृषि भूमि को लेकर व्यवहार न्यायालय राजनांदगांव में सिविल वाद क्रमांक 16-ए/2024, नवनीत कुमार मिश्रा विरुद्ध नीना मिश्रा व अन्य विचाराधीन है। पीड़ित पक्ष भूमि को अपनी स्वामित्व एवं पुश्तैनी कृषि भूमि बता रहा है।

6 अगस्त को खड़ी फसल के कारण नहीं हुआ था सीमांकनशिकायत के मुताबिक इससे पहले 6 अगस्त 2026 को भी पटवारी सहित राजस्व अमला सीमांकन के लिए खेत पहुंचा था। उस समय खेत में धान की खड़ी फसल होने के कारण सीमांकन संभव नहीं होने की बात सामने आई थी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस संबंध में पंचनामा तैयार कर उनके हस्ताक्षर भी लिए गए थे और टीम वापस लौट गई थी।इसके बाद 14 अगस्त को दोबारा सीमांकन के लिए आने की सूचना दी गई। आरोप है कि इस बार राजस्व अधिकारियों के साथ पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा और दूसरे रास्ते से खेत में प्रवेश किया गया।

करीब 50 एकड़ में खड़ी फसल, फिर सीमांकन क्यों?पीड़ित पक्ष का कहना है कि जिस क्षेत्र में सीमांकन का प्रयास किया जा रहा था, वहां बड़े हिस्से में धान की फसल खड़ी है। उनका दावा है कि लगभग 50 एकड़ क्षेत्र में नाप-जोख की कार्रवाई प्रस्तावित थी।

किसानों ने शासन द्वारा बरसात और फसल के मौसम में 15 जून से 15 अक्टूबर तक ग्रामीण कृषि भूमि में सीमांकन नहीं किए जाने की व्यवस्था का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि जब खेत में फसल खड़ी है तो इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों और पुलिस बल के साथ सीमांकन की कार्रवाई क्यों की जा रही थी?लिखित आदेश मांगा तो पुराने आदेश का हवाला देने का आरोपआवेदन में कहा गया है कि पीड़ित पक्ष ने अधिकारियों से पूछा कि सीमांकन किस आदेश के तहत किया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार उन्हें कथित रूप से कलेक्टर तथा न्यायालय के मौखिक आदेश का हवाला दिया गया।

इस पर किसानों ने लिखित आदेश दिखाने की मांग की। उनका आरोप है कि इसके बाद एक पुराना आदेश दिखाया गया, जबकि वर्तमान में संबंधित जमीन को लेकर न्यायालय से कोई नया आदेश नहीं होने की बात शिकायत में कही गई है।मारपीट और पुलिस द्वारा धमकाने का भी आरोपशिकायत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि अधिकारियों को खेत में प्रवेश करने से रोकने पर कुछ लोगों ने शिकायतकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की।
इसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल बुलाए जाने और किसानों के साथ गाली-गलौज तथा कार्रवाई की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।हालांकि ये सभी आरोप शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा आवेदन में लगाए गए हैं और इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।पटवारी, राजस्व अधिकारियों व निजी संस्था का उल्लेखशिकायत पत्र में पटवारी अनुपम बक्शी, आरआई तिवारी तथा तहसील स्तर के अधिकारियों के साथ एक निजी संस्था एस.एस. इंटरप्राइजेज का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की है।
मुख्यमंत्री, आईजी और एसपी स्तर तक शिकायतपीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्होंने घटना को लेकर मुख्यमंत्री, पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक स्तर पर शिकायत भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। किसानों का कहना है कि न्यायालय में मामला लंबित होने और खेत में फसल खड़ी होने के बावजूद इस तरह की कार्रवाई से उनके परिवार में भय और आक्रोश की स्थिति है।
कई सवाल खड़ेइस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—यदि खेत में खड़ी फसल के कारण 6 अगस्त को सीमांकन नहीं किया गया था, तो महज आठ दिन बाद परिस्थितियां बदले बिना दोबारा भारी अमले और पुलिस बल के साथ सीमांकन की कार्रवाई क्यों की गई?
यदि कोई विशेष या न्यायालयीन आदेश था तो संबंधित पक्ष को उसकी लिखित प्रति मौके पर क्यों नहीं उपलब्ध कराई गई? और यदि जमीन का मामला अदालत में विचाराधीन है तो कार्रवाई के लिए किस वैधानिक आदेश को आधार बनाया गया?मामले में राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन का अधिकृत पक्ष सामने आना अभी बाकी है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
