छुईखदान , तेज बारिश के बीच अपने अधिकारों, संस्कृति और अस्तित्व के प्रति उमड़ता आदिवासी समाज का उत्साह विश्व आदिवासी दिवस पर छुईखदान में सामाजिक एकता और आदिवासी स्वाभिमान के आयोजन ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। बारिश आयोजन में बाधा बनी, लेकिन समाज के कदम नहीं रोक सकी। बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल पर डटे रहे और एकजुटता का संदेश दिया। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में गोंड से लेकर बैगा तक विभिन्न आदिवासी समाज एक मंच पर दिखाई दिए।
इसमें गोंड, कंवर, कंडरा, परधान, बैगा, उरांव सहित विभिन्न अनुसूचित जनजाति समुदायों की सक्रिय भागीदारी रही। समाज के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कर्मचारियों, युवाओं तथा महिला-पुरुषों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि विश्व आदिवासी दिवस महज उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों, सम्मान, अस्तित्व, संस्कृति और संवैधानिक संरक्षण पर चिंतन करने का दिन है। आदिवासी समाज की पहचान केवल उसकी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं हैं। जल, जंगल और जमीन से उसका सदियों पुराना रिश्ता उसकी मूल पहचान और जीवन व्यवस्था का आधार है।
