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CG : राग से विराग की ओर ले जाता है गिरनार नेमी तप : मुनि संवेगरत्न सागर …

By kadwaghut|08 Aug 2026, 3:49 PM
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रायपुर । विवेकानंद नगर ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास में तप,त्याग,साधना,आराधना का क्रम जारी है। तप की श्रृंखला में 7 अगस्त से गिरनार नेमी तप प्रारंभ हुआ। 22 दिवसीय इस तप का 100 से अधिक श्रावक और श्राविकाओं ने मुनि संवेगरत्न सागर से संकल्प ग्रहण किया। गिरनार नेमी तप में एक दिन उपवास, एक दिन व्यासना होगा। कुल 9 उपवास व 9 व्यासना और अंतिम क्रम में एक तेला (लगातार तीन उपवास) और तप का पारणा होगा।

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धर्मसभा में मुनि संवेगरत्न सागर ने कहा कि राग से विराग की ओर गिरनार नेमी तप ले जाता है। संसार से मुक्ति की ओर ले जाए, ऐसा गिरनार नेमी तप है। संसार का राग, संसार का स्वार्थ है,राग और स्वार्थ से पीछे हटने का उपक्रम गिरनार नेमी तप है। राग ही स्वार्थ की पूर्ति करता है। संसार में कहा जाता है कि कोई किसी के बिना नहीं रह सकता लेकिन ऐसा नहीं है। व्यक्ति संसार के मोह, माया में उलझकर रहता है। कुछ दिनों के बाद व्यक्ति अपनी दिनचर्या में आ जाता है। संसार में किसी का काम किसी के बगैर नहीं रुकता है।

मुनिश्री ने कहा कि जिन शासन में देव,गुरु और धर्म का सानिध्य मिला है। आप संशय की स्थिति में रहोगे तो कुछ नहीं होगा। गुरु की शरण में जाओगे,धर्म सभा में बैठोगे और जिज्ञासा नहीं रहेगी तो प्रवचन मात्र सुन ही सकोगे। यदि आप के भीतर जिज्ञासा का भाव है तो आप में सीखने का भाव आएगा और उस सीख को अपने जीवन में अपनाकर आत्म कल्याण की ओर अग्रसर होंगे।आत्मकल्याण करना है तो, संसार में आप जिस रथ में सवार होकर भागते जा रहे हो, आपको लौटना ही होगा। ब्रह्मचर्य का तात्पर्य है,ब्रम्ह अर्थात आत्मा और चर्य अर्थात रहना। जो आत्मा में रहता है वह ब्रह्मचर्य है। आत्मा से जुड़ने के लिए ही गिरनार नेमी तप किया जा रहा है।

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100 से अधिक तपस्वियों का हुआ विजय तिलक, लाभार्थी परिवार ने किया सम्मान
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया एवं महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में प्रवचन के बाद मुनि संवेगरत्न सागर के सानिध्य में गिरनार नेमी तप की क्रियाविधि शुरू हुई। लाभार्थी परिवार ने भगवान नेमीनाथ की प्रतिमा को विराजमान किया। तप कल्याणक कलश की स्थापना हुई। 100 से अधिक तपस्वियों ने गिरनार नेमी तप प्रारंभ किया। लाभार्थी परिवार ने तपस्वियों का विजय तिलक व माला से सम्मान किया। लाभार्थी परिवार ने श्रीफल,अक्षत और रोकड़ से सभी तपस्वियों को बधाया। लाभार्थी परिवार ने तप का कलश स्थापित किया। तप के क्रम में 45 से अधिक श्रावक-श्राविकाओं का पंच परमेष्ठी श्रेणी तप जारी है। 49 दिवसीय इस तप की दूसरी श्रेणी का 7 अगस्त को दूसरा उपवास रहा।तपस्वी 8 अगस्त को व्यासना करेंगे। सर्वमंगलमय वर्षावास में रोजाना ज्ञान की गंगा बह रही है। रोजाना बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं जिनवाणी का श्रवण कर आत्मकल्याण की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

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