सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंडई में बिना फार्मासिस्ट योग्यता वाले भृत्य से दवा वितरण का मामला एक बार फिर चर्चा में है। हैरानी की बात यह है कि करीब एक माह पहले इसी मामले की शिकायत के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए भृत्य को दवा वितरण कार्य से हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद वर्तमान में भी वही भृत्य मरीजों को दवा बांटता दिखाई दे रहा है। सीएमएचओ कार्यालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि बिना नियमित नियुक्ति अथवा प्रशिक्षित फार्मासिस्ट के दवा वितरण करना नियमों के विरुद्ध है और इससे मरीजों के स्वास्थ्य एवं जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
आदेश में यह भी कहा गया था कि संबंधित व्यक्ति को दवा वितरण कार्य से हटाकर अन्य कार्य में लगाया जाए तथा भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो। जब अस्पताल में दो-दो फार्मासिस्ट मौजूद हैं, तो आखिर दवा वितरण का काम भृत्य से क्यों कराया जा रहा है? क्या मरीजों की जान से जुड़े मामले में विभाग अपने ही आदेश का पालन कराने में असफल है, या फिर जिम्मेदार अधिकारी आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहे?
बगैर फार्मासिस्ट योग्यता के दवा वितरण करना नियम विरुद्ध: संबंधित भृत्य को दवा वितरण कार्य से हटाया गया है। उसे केवल ओपीडी कक्ष में पर्ची काटने एवं प्रभारी अधिकारी द्वारा सौंपे गए अन्य कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। बिना फार्मासिस्ट योग्यता के दवा वितरण करना नियम विरुद्ध बताया गया है।
जानकारी नहीं थी, जांच कर कार्रवाई की जाएगी बीएमओ छुईखदान डॉ. मनीष बघेल ने कहा एक माह पूर्व शिकायत के बाद आदेशानुसार संबंधित भृत्य को केवल पर्ची काटने व प्रभारी द्वारा बताए गए कार्य करने के निर्देश दिए गए थे। यदि अभी भी वह दवा वितरण कर रहा है तो इस पर कार्रवाई की जाएगी। अभी तक इसकी जानकारी नहीं थी। वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंडई में दो फार्मासिस्ट हैं।
