उत्तर प्रदेशराज्‍य

मुख्यमंत्री योगी बोले – लंबित राजस्व वादों में देरी पर तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही

By Admin|24 May 2026, 9:16 PM
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लखनऊ.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि राजस्व मामलों के त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि भूमि और राजस्व से जुड़े विवाद आमजन के जीवन, किसान हितों और सामाजिक सौहार्द से सीधे जुड़े होते हैं, इसलिए इन मामलों में अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्धारित समय-सीमा के बाद भी लंबित रहने वाले मामलों में संबंधित अधिकारियों और कार्मिकों की जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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शनिवार को राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण की प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक आधारित व्यवस्था, जवाबदेही और समयबद्ध कार्यप्रणाली के माध्यम से राजस्व न्यायालयों की कार्यक्षमता को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि आम नागरिक को शीघ्र न्याय मिल सके।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि निर्धारित समय-सीमा से अधिक अवधि से लंबित वादों का अभियान चलाकर प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि तहसील और जनपद स्तर पर नियमित समीक्षा हो तथा कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों की जवाबदेही तय की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि आमजन को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए। 

बैठक में बताया गया कि आरसीसीएमएस पोर्टल के माध्यम से धारा-80 के अंतर्गत लंबित वादों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। 1 जनवरी 2026 को कुल 85,158 वाद लंबित थे, जिनमें से 77,578 का निस्तारण किया गया था। वहीं 22 मई 2026 तक कुल लंबित वादों की संख्या घटकर 38,166 रह गई, जिनमें 29,543 वादों का निस्तारण किया गया। तीन माह से अधिक समय से लंबित मामलों की संख्या में भी लगातार कमी आई है। धारा-80 के मामलों में बस्ती, चित्रकूट, अयोध्या, बागपत और कन्नौज ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि मेरठ, वाराणसी, अमेठी, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर पाया गया।

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बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि धारा-34 के अंतर्गत लंबित वादों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। 1 जनवरी 2026 को कुल 22,44,466 वाद लंबित थे, जो 22 मई 2026 तक घटकर 10,59,139 रह गए। इस अवधि में 5,40,945 वादों का निस्तारण किया गया। समीक्षा में बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़ और बदायूं का प्रदर्शन बेहतर पाया गया, जबकि गोरखपुर, संतकबीरनगर, प्रतापगढ़, बलिया और देवरिया अपेक्षित प्रगति नहीं कर सके। मुख्यमंत्री ने इन जिलों में विशेष अभियान चलाकर लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए।

धारा-33 के अंतर्गत निर्विवादित वरासत मामलों की समीक्षा में बताया गया कि वर्ष 2025 में कुल 16,89,732 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 16,43,104 का निस्तारण किया गया। वहीं 22 मई 2026 तक प्राप्त 7,15,872 आवेदनों में से 6,52,512 का निस्तारण किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वरासत से जुड़े मामलों में नागरिकों को अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें तथा सभी प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में धारा-24 के मामलों की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 1 जनवरी 2026 को 1,82,710 वाद लंबित थे, जो 22 मई 2026 तक घटकर 92,915 रह गए। समीक्षा में वाराणसी, कुशीनगर, मैनपुरी, बलरामपुर और हमीरपुर का प्रदर्शन बेहतर पाया गया, जबकि गौतमबुद्धनगर, लखनऊ, प्रतापगढ़, अमेठी और मुजफ्फरनगर अपेक्षित प्रगति नहीं कर सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन जिलों में प्रगति संतोषजनक नहीं है, वहां वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।

धारा-116 के अंतर्गत लंबित मामलों की समीक्षा में बताया गया कि जनवरी 2026 में 1,69,693 वाद लंबित थे, जो 22 मई 2026 तक घटकर 1,14,479 रह गए। इस श्रेणी में वाराणसी, एटा, आजमगढ़, लखीमपुर खीरी और महाराजगंज का प्रदर्शन बेहतर रहा, जबकि प्रतापगढ़, मुजफ्फरनगर, कानपुर नगर, गोंडा और बलिया का प्रदर्शन कमजोर पाया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राजस्व न्यायालयों में वर्षों से लंबित पुराने मामलों की अलग सूची तैयार कर उनके निस्तारण के लिए विशेष रणनीति बनाई जाए।

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बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में लंबित वादों का एक समय सीमा तय करके निस्तारण कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व प्रशासन की कार्यशैली ऐसी होनी चाहिए, जिससे जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो तथा लोगों को न्याय के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े।

 

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