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CG : बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और विकास की गाथा को कला के माध्यम से मिलेगी नई पहचान …

By kadwaghut|03 Aug 2026, 11:33 AM
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कार्टून कला के माध्यम से बस्तर की सकारात्मक तस्वीर पहुंचेगी देश-दुनिया तक
रायपुर, ।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल विकास, विश्वास और नई संभावनाओं की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बस्तर की इसी बदलती तस्वीर, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य को रचनात्मक कला के माध्यम से प्रस्तुत करने के उद्देश्य से ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के सहयोग से देश की एकमात्र मासिक कार्टून पत्रिका ‘कार्टून वॉच’ द्वारा 03 अगस्त को जगदलपुर में स्कूली विद्यार्थियों के लिए इस विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे।

कार्यशाला में विद्यार्थियों को कार्टून और कैरिकेचर कला की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही उन्हें यह बताया जाएगा कि किस प्रकार कला के माध्यम से समाज, संस्कृति और विकास के सकारात्मक संदेशों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विजन के अनुरूप बस्तर आज अपनी नई पहचान बना रहा है। प्राकृतिक संपदा, जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और पर्यटन स्थलों से समृद्ध बस्तर विकास की नई कहानी लिख रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, बस्तर दशहरा और यहां की विशिष्ट लोक कला-संस्कृति इसकी पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत कर रही है स ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्यशाला इसी सकारात्मक बदलाव को कला के माध्यम से सामने लाने का प्रयास है। ‘कार्टून वॉच’ के संपादक त्र्यंबक शर्मा ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना और बस्तर की खूबियों को कार्टून कला के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

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कार्यशाला में दिल्ली के वरिष्ठ कार्टूनिस्ट माधव जोशी और पुणे के प्रसिद्ध कैरिकेचर कलाकार शुभम जिंदे लाइव डेमो के माध्यम से विद्यार्थियों को कार्टून एवं कैरिकेचर निर्माण की बारीकियां सिखाएंगे। वे विद्यार्थियों को कला के सामाजिक महत्व, रचनात्मक संभावनाओं और रोजगार के अवसरों से भी अवगत कराएंगे।

‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्यशाला स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ बस्तर की सकारात्मक पहचान को देशभर में पहुंचाने की दिशा में एक अभिनव पहल है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक धरोहर से जोड़ने का रचनात्मक माध्यम बनेगा।

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