छत्तीसगढ़रायपुर जिला

पंजाब कांग्रेस में खुली बगावत: लगे ‘मुर्दाबाद’ के नारे, हाथापाई से बढ़ा सियासी संकट

By kadwaghut|02 Aug 2026, 10:01 PM
f X W

चन्नी खेमा नेतृत्व परिवर्तन पर अड़ा, चुनाव से पहले कांग्रेस में गहराई गुटबाजी

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस में अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के दौरे के दौरान विरोध, नारेबाजी और कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई की घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती फिलहाल विपक्ष नहीं, बल्कि संगठन के भीतर बढ़ती गुटबाजी है।

कांग्रेस हाईकमान के एकजुट होकर चुनावी तैयारियां करने के निर्देशों के बावजूद प्रदेश संगठन दो धड़ों में बंटा नजर आ रहा है। भूपेश बघेल 31 जुलाई से पंजाब के दस दिवसीय दौरे पर हैं। वे ‘हर बूथ कांग्रेस मजबूत’ अभियान के तहत ब्लॉक और जिला स्तर की बैठकों में विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन उनके कार्यक्रमों में ही विरोध के स्वर तेज हो गए।

शनिवार को पटियाला और संगरूर में आयोजित बैठकों के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। संगरूर में प्रदर्शनकारियों ने भूपेश बघेल के खिलाफ भी ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाए। इस दौरान दोनों गुटों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और स्थिति धक्का-मुक्की व हाथापाई तक पहुंच गई। हालांकि बाद में वरिष्ठ नेताओं ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया।

चन्नी खेमा नेतृत्व परिवर्तन की मांग पर अड़ा

पार्टी के भीतर यह विवाद एक जुलाई को नई चुनाव प्रबंधन समितियों की घोषणा के बाद और तेज हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक लगातार प्रदेश संगठन में बदलाव तथा प्रदेश अध्यक्ष बदलने की मांग कर रहे हैं।

READ ALSO  राजनांदगांव : छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के नए ब्लॉक पदाधिकारियों को दिलाई शपथ...

दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ कई दौर की बैठकों के बावजूद चन्नी खेमा अपनी मांगों पर कायम है। इसका असर अब पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों में भी साफ दिखाई देने लगा है।

भूपेश बघेल की कोशिशें अब तक बेअसर

पिछले एक महीने में दूसरी बार पंजाब पहुंचे भूपेश बघेल को गुटों के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन अब तक उनकी कोशिशें सफल होती नजर नहीं आ रही हैं। चन्नी समर्थकों के साथ कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने भी जिला स्तरीय बैठकों से दूरी बनाए रखी। जिन कार्यक्रमों में वे पहुंचे, वहां भूपेश बघेल और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के विरोध में नारे लगाए गए।

हाईकमान के सामने बढ़ी चुनौती

ताजा घटनाक्रम के बाद माना जा रहा है कि पूरी रिपोर्ट कांग्रेस हाईकमान को भेजी जाएगी। अब नेतृत्व के सामने दो विकल्प माने जा रहे हैं—या तो लगातार अनुशासनहीनता और गुटबाजी करने वाले नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, या फिर प्रदेश नेतृत्व में बदलाव कर असंतुष्ट खेमे को साधने की कोशिश की जाए।

विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस के लिए संगठनात्मक एकता सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गई है। इस बीच भूपेश बघेल कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि हाईकमान के फैसले को बार-बार नहीं बदला जा सकता। उन्होंने कहा है कि “फैसला बदलना कोई गुड्डे-गुड़िया का खेल नहीं है।”

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

2

Back to top button