छत्तीसगढ़

सुकमा में पुनर्वास नीति का असर, माओवादियों को मिला सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन

By Admin|18 Dec 2025, 2:23 PM
f X W

रायपुर 
 छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशील और दूरदर्शी नक्सल पुनर्वास नीति ज़मीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव का सशक्त उदाहरण बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के स्पष्ट निर्देशों एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में सुकमा जिले के नक्सल पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई।

आत्मसमर्पण करने वाल 25 युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट

इस क्रम में 75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन तथा 25 युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट वितरित की गई। यह कार्यक्रम कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव एवं पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।

75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन

कार्यक्रम के दौरान 75 पुनर्वासित युवाओं को सैमसंग गैलेक्सी M06 5G स्मार्टफोन प्रदान किए गए, जिनमें 50 मेगापिक्सल डुअल कैमरा तथा 5000 mAh फास्ट-चार्जिंग बैटरी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन स्मार्टफोनों के माध्यम से युवा अब डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास कार्यक्रमों, सरकारी योजनाओं तथा देश-दुनिया की जानकारी से सहजता से जुड़ सकेंगे।

इसके साथ ही 25 पुनर्वासित युवाओं को मेसन किट प्रदान कर निर्माण क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह पहल प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण सहित अन्य विकास कार्यों के लिए कुशल श्रमशक्ति तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आत्मसमर्पण करने वाले लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने संकल्पित

जिला प्रशासन ने बताया कि नक्सल पुनर्वास को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रखते हुए इसे आत्मनिर्भरता, सम्मान और सामाजिक समावेशन से जोड़ा जा रहा है। 5G स्मार्टफोन के माध्यम से पुनर्वासित युवा अब ऑनलाइन प्रशिक्षण, आधुनिक कृषि तकनीकों, छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार के नए अवसरों को समझने और अपनाने में सक्षम होंगे। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने सरकार संकल्पित है।

READ ALSO  योगी ने दिखाया अयोध्या का पुराना और नया रूप, बोले- रामनगरी में विरासत के साथ प्रगति का नया अध्याय

पुनर्वासित युवाओं ने साझा किए अनुभव

पोलमपल्ली निवासी पुनर्वासित पोड़ियम भीमा ने बताया कि वे लगभग 30 वर्षों तक डीवीसी सदस्य के रूप में संगठन से जुड़े रहे। पुनर्वास के बाद उन्हें बेहतर आवास, भोजन और प्रशिक्षण की सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि वे राजमिस्त्री के साथ-साथ इलेक्ट्रीशियन और मैकेनिक का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुके हैं।

पुवर्ती निवासी मुचाकी रनवती ने बताया कि वे 24 वर्षों तक एसीएम सदस्य के रूप में नक्सल संगठन से जुड़ी रहीं। पुनर्वास के बाद उन्होंने सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त किया और वर्तमान में राजमिस्त्री प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने परिजनों से मिलने का अवसर मिला तथा बस्तर ओलंपिक की संभागस्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त किया।

डब्बमरका, सुकमा निवासी गंगा वेट्टी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जिला प्रशासन द्वारा मोबाइल और मेसन किट मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जंगल के जीवन की तुलना में वर्तमान जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक है। शिविर लगाकर उनका आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड एवं जॉब कार्ड बनाया गया तथा शासन की सभी योजनाओं का लाभ उन्हें मिल रहा है।

सुकमा में की गई यह पहल इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ शासन की नीति केवल नक्सलवाद से मुकाबले तक सीमित नहीं है, बल्कि भटके हुए युवाओं को विश्वास, अवसर और सम्मान के साथ नया जीवन देने की ठोस कोशिश भी है। यह मॉडल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और सामाजिक समरसता की मजबूत नींव रख रहा है। इस अवसर पर जिले के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

READ ALSO  स्वच्छ हवा और स्वस्थ जीवन के लिए साइकिल चलाने की अपील, जयपुर में साइक्लोथॉन को मुख्य सचिव ने दिखाई हरी झंडी
अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

2

Back to top button