छत्तीसगढ़बिलासपुर जिला

CG : शराब घोटाला: 110 करोड़ के होटल की कुर्की को चुनौती देने वाली याचिका खारिज …

By kadwaghut|29 Aug 2026, 1:44 PM
f X W

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ी कानूनी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने ED की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने कहा कि जांच एजेंसी के पास कार्रवाई के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को ट्रिब्यूनल और सक्षम अथॉरिटी के समक्ष अपना पक्ष रखने की स्वतंत्रता दी है।

Advertisement
Advertisement

मामला गोवा के नॉर्थ गोवा स्थित अंजुना के फाइव स्टार ‘द वेस्टिन होटल’ की कुर्की से जुड़ा है। ED ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से कथित तौर पर हासिल 110 करोड़ रुपये की अपराध की आय से होटल खरीदे जाने का दावा करते हुए इसे कुर्क किया था। इसी कार्रवाई के खिलाफ कारोबारी डॉ. राहुल अग्रवाल और उनकी कंपनी मेसर्स पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

110 करोड़ की होटल डील पर विवाद
नई दिल्ली निवासी डॉ. राहुल अग्रवाल और मेसर्स पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने ED के 28 मई 2026 के प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर को रद्द करने की मांग की थी। आदेश के तहत होटल को अपराध की आय से अर्जित संपत्ति मानते हुए कुर्क किया गया था। होटल की कीमत करीब 110 करोड़ रुपये आंकी गई है।

ED का आरोप है कि छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट से कथित तौर पर जुटाई गई अवैध कमाई में से करीब 110 करोड़ रुपये नकद के रूप में राहुल अग्रवाल के चाचा और दुर्ग निवासी विजय कुमार अग्रवाल तक पहुंचाए गए। जांच एजेंसी के अनुसार, इसी रकम का इस्तेमाल गोवा में वेस्टिन होटल खरीदने में किया गया।

READ ALSO  CG : PM-AASHA ने दिया उपज का उचित मूल्य, किसान के चेहरे पर लौटी मुस्कान ...

50 करोड़ बैंक से, 60 करोड़ कैश का दावा
ED के मुताबिक, होटल का सौदा मेसर्स सर बायोटेक इंडिया लिमिटेड से हुआ था। इसमें करीब 50 करोड़ रुपये बैंकिंग चैनल के जरिए रजिस्टर्ड सेल डीड के तहत दिए गए, जबकि बाकी 60 करोड़ रुपये नकद भुगतान किए जाने का दावा है।

वहीं, याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में इस दावे का विरोध किया। उनका कहना था कि होटल की खरीदी में इस्तेमाल 60 करोड़ रुपये पूरी तरह वैध कारोबारी आय थी। उन्होंने इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि आयकर विभाग की जांच में रकम के स्रोत को वैध व्यावसायिक कैश माना गया था और इसे अघोषित आय की श्रेणी में नहीं रखा गया।

विजय अग्रवाल के शराब कारोबार से संबंध पर भी विवाद
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी दलील दी गई कि 1 मई 2019 के पारिवारिक समझौते के बाद विजय अग्रवाल कंपनी के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे चुके थे और इसके बाद उनका होटल परियोजना से कोई संबंध नहीं रहा। उनका दावा था कि विजय अग्रवाल का छत्तीसगढ़ के शराब कारोबार से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई संबंध नहीं था और वे मूल FIR या चार्जशीट में भी आरोपी नहीं हैं।

इसके विपरीत, ED ने जांच में सामने आए बयानों और अन्य साक्ष्यों का हवाला देते हुए 110 करोड़ रुपये की कथित लेन-देन श्रृंखला को मनी लॉन्ड्रिंग से जोड़ा।

ED ने बयानों को बनाया आधार
ED के अनुसार, शराब सिंडिकेट के कथित मुख्य कैश डिस्ट्रीब्यूटर लक्ष्मी नारायण उर्फ पप्पू बंसल और प्रबीर कुमार शर्मा के बयानों से 110 करोड़ रुपये नकद विजय अग्रवाल तक पहुंचाए जाने की पुष्टि हुई।

READ ALSO  CG : सेवा संकल्प अभियान में वन विभाग की पर्यावरण संरक्षण पहल…

जांच एजेंसी ने बताया कि राहुल अग्रवाल ने PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयान में स्वीकार किया था कि दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित उनके आवास पर 8 से 10 किस्तों में 60 करोड़ रुपये नकद दिए गए थे।

ED ने यह भी दावा किया कि होटल विक्रेता कंपनी की ओर से नकदी लेने वाले विशाल सक्सेना को बाद में होटल कंपनी में डायरेक्टर बनाया गया। जांच एजेंसी ने इसे मनी लॉन्ड्रिंग के कथित तीसरे चरण यानी ‘इंटीग्रेशन’ का संकेत बताया।

आयकर विभाग की कार्रवाई से PMLA जांच खत्म नहीं होती: हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की उस दलील को स्वीकार नहीं किया कि आयकर विभाग द्वारा नकदी को कारोबार से संबंधित मान लिए जाने के कारण रकम PMLA के तहत अपराध की आय नहीं हो सकती।

कोर्ट ने कहा कि आयकर कानून और PMLA का उद्देश्य, दायरा और कानूनी कसौटियां अलग-अलग हैं। इसलिए आयकर विभाग द्वारा टैक्स के उद्देश्य से किसी रकम को हिसाब में स्वीकार कर लेने मात्र से वह PMLA के तहत अपराध की आय संबंधी जांच से बाहर नहीं हो जाती।

होटल का संचालन पहले की तरह जारी
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रोविजनल अटैचमेंट का होटल के नियमित संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा है। होटल पहले की तरह संचालित हो रहा है, न कोई कमरा बंद किया गया है और न ही किसी कर्मचारी को हटाया गया है।

डिवीजन बेंच ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं को ट्रिब्यूनल या सक्षम अथॉरिटी के समक्ष अपना पक्ष रखने की छूट दी है। इससे फिलहाल ED की कुर्की कार्रवाई बरकरार रहेगी, जबकि संबंधित पक्ष आगे सक्षम मंच पर अपना पक्ष रख सकते हैं।

READ ALSO  आशीर्वाद का दीया’ बना विश्व रिकॉर्ड का साक्षी
अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins