मध्य प्रदेश

बिजली उपभोक्ताओं को झटका! MP में घाटे की भरपाई के लिए बढ़ सकती हैं बिजली दरें

By Admin|08 Mar 2026, 12:51 PM
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भोपाल
प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। ये बिजली चोरी नहीं रोक पा रही हैं। तकनीकी व अन्य कारणों से लाइन लॉस जारी है। बड़े बकायादारों पर करोड़ रुपए बकाया है। उसकी शत-प्रतिशत वसूली नहीं हो पा रही है। इन कमजोरियों की सजा हर बार बिजली के दाम बढ़ाकर उपभोक्ताओं को दी जाती रही है। इस बार भी कंपनियों के प्रबंधन ने पौने दो करोड़ उपभोक्ताओं के सामने यही नौबत ला दी है। असल में मध्य, पूर्व व पश्चिम क्षेत्र बिजली कंपनियों ने विधानसभा में पूछे एक सवाल के जवाब में 9 साल के आय-व्यय का ब्योरा पेश किया है। इसके अनुसार, पूर्व क्षेत्र कंपनी को 16188.48 करोड़, पश्चिम क्षेत्र वितरण कंपनी को 3767 करोड़ व मध्य क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी को 14605.88 का घाटा हुआ। इस तरह तीनों कंपनियों ने 9 सालों में 34 हजार 561 करोड़ का घाटा हुआ है।

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नौ साल से घाटे में पूर्व और मध्य क्षेत्र कंपनी
चिंता की बात ये है कि घाटे को कम करने के लिए 4000 करोड़ से ज्यादा खर्च करने के बावजूद पिछले नौ सालों से पूर्व और मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनियां घाटे में चल रही है। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की बात करें तो इसका घाटा साल 2018-19 में सबसे ज्यादा 2896 करोड़ था। उसके बाद 2022-23 में 2451 करोड़ पर था। अब 2024-25 वित्तीय वर्ष में 1047 करोड़ दिखाया है। ऐसे ही मध्य क्षेत्र वितरण कंपनी का बात करें तो साल 2018-19 में घाटा सबसे ज्यादा 3837 करोड़ पर था। उसके बाद साल 2024-25 में 1570 करोड़ का घाटा दिखाया गया है। ये कंपनियां लगातार घाटे में चल रही हैं।
 
घाटा दिखाकर दाम बढ़ाने की सिफारिश
प्रदेश की तीनों बिजली वितरण कंपनियों में से सिर्फ पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी ने बीच के वर्षों में 2440 का लाभ दिखाया है। इन कंपनियों ने मप्र विद्युत नियामक आयोग को भी इसी तरह घाटा बताकर दाम बढ़ाने संबंधी सिफारिशें भेजी थीं। आयोग ने कंपनियों के प्रस्ताव का परीक्षण लगभग पूरा कर लिया है। यदि ये सिफारिशें मान ली गई तो 1 अप्रेल के बाद कभी भी बिजली के दाम बढ़ सकते हैं। इसका असर पौने वो करोड़ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। यह हाल तब है जब कंपनियों को उक्त घाटा पाटने के लिए बीते वर्षों में केंद्र व राज्य ने विभिन्न योजनाओं के तहत लाखों करोड़ रुपए दिए हैं। हाल के वर्षों में तीनों बिजली कंपनियोंको 4 हजार करोड़ से अधिक की राशि भी मिली थी।

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पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी घाटे के बीच बनी नजीर
पश्चिम विद्युत वितरण कंपनी घाटे के बीच नजीर बनी है। पिछले चार वित्तीय वर्षों की बात करें तो साल 2021 से 2024 के बीच पश्चिम कंपनी भी लगातार 1790, 1130 और 125 करोड़ के घाटे में रही है। लेकिन साल 2024-25 में पश्चिम कंपनी को 730 करोड़ का लाभ हुआ है। ऐसे में बड़ा सवाल ये खड़ा होता है कि मध्य और पूर्व क्षेत्र की कंपनियां पश्चिम के फायदे के फॉर्मूले को क्यों नहीं अपना रही है। विभाग के अनुसार, पश्चिम क्षेत्र कंपनी ने बिजली चोरी रोकने के साथ ही स्मार्ट मीटर और नई तकनीक अपनाने में पहल की। बिल वसूली, फीडर सेपरेशन, डिजिटल मॉनीटरिंग व एनालिटिक्स की भी मदद लेकर नुकसान कम करने का प्रयास किया है। कंपनी का दावा है कि इससे उन्होंने नुकसान कम करने में सफलता पाई।

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