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स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री पर अड़े पटवारी, MP में 102 पर कार्रवाई; डिप्टी CM से बैठक टली

By Admin|09 Oct 2026, 1:05 PM
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भोपाल 
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के विरोध में सामूहिक अवकाश पर गए पटवारियों को प्रशासन ने अब 24 घंटे में काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया है। खासकर परिवीक्षाधीन पटवारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित समय-सीमा में अपने पदस्थापना स्थल पर पहुंचकर कार्यभार ग्रहण करें। ऐसा नहीं करने पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत उनकी सेवाएं बिना किसी अतिरिक्त सूचना के समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

मध्यप्रदेश में 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री की तैयारी के बीच स्वामित्व योजना में पटवारियों की भूमिका को लेकर विवाद बढ़ गया है। पटवारियों के निष्पादक (एग्जीक्यूटर) की भूमिका में साइन नहीं करने के फैसले के बाद प्रदेश में 102 पटवारियों पर बर्खास्त।

सबसे बड़ी कार्रवाई रीवा में हुई, जहां गुरुवार को 15 पटवारियों को एक साथ निलंबित किया गया। इसके बाद ग्वालियर में 19, जबलपुर में 17 और सागर में 13 पटवारियों को निलंबित किया गया। कार्रवाई के विरोध में प्रभावित जिलों में पटवारियों ने राजस्व काम का शटडाउन रखा है। देवास में पटवारी बुधवार देर रात तक कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते रहे।

इधर, नर्मदापुरम में 133, सागर में 137, छिंदवाड़ा में 32, गुना में 52 और भोपाल में 3 पटवारियों को नोटिस दिए गए हैं। रतलाम में 12 पटवारियों को शासकीय कार्यों में लापरवाही पर आरोप-पत्र दिए गए हैं।

सीएम तक पहुंचा मामला, PRC की बैठक बेनतीजा

पटवारियों का विरोध और जिलों में कार्रवाई का मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। विरोध के बीच गुरुवार को प्रमुख राजस्व आयुक्त (PRC) कार्यालय में पटवारी संघ के प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई, लेकिन इसमें कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका।

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संबंधित पटवारियों का वेतन काटने के आदेश
प्रशासन ने सामूहिक अवकाश को अनधिकृत अनुपस्थिति मानते हुए संबंधित पटवारियों का वेतन काटने के आदेश भी दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि अवकाश के लिए प्रत्येक कर्मचारी को व्यक्तिगत रूप से विधिवत आवेदन प्रस्तुत करना जरूरी है। संघ के माध्यम से सामूहिक अवकाश की सूचना देकर लगातार शासकीय कार्य से अनुपस्थित रहना सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है।

अनधिकृत अनुपस्थिति की अवधि का नहीं मिलेगा वेतन, 'ब्रेक इन सर्विस' की चेतावनी
सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों का हवाला देते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व अनुमति सामूहिक अवकाश या हड़ताल में शामिल होने की अवधि का वेतन देय नहीं होगा। इस अवधि को अवकाश भी स्वीकृत नहीं किया जाएगा। संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को अनधिकृत अनुपस्थिति की अवधि का वेतन काटने की जिम्मेदारी दी गई है।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पटवारी आगे भी अनधिकृत रूप से शासकीय कार्य से अनुपस्थित रहते हैं तो संबंधित अवधि को 'सेवा में व्यवधान' (ब्रेक इन सर्विस) मानने संबंधी प्रस्ताव विभागाध्यक्ष को भेजे जाएंगे।

पहले तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों पर हो चुकी कार्रवाई
बता दें कि प्रशासन की सख्ती के बीच तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवाएं पहले ही समाप्त की जा चुकी हैं। इसके विरोध में जिलेभर के पटवारियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन में 1000 से अधिक पटवारी शामिल हुए थे।

डिप्टी सीएम के साथ होने वाली बैठक भी टली
पटवारी प्रतिनिधिमंडल की डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के साथ वल्लभ भवन में होने वाली बैठक भी टल गई। डिप्टी सीएम की व्यस्तता के चलते बैठक नहीं हो सकी। ऐसे में पटवारियों की मांग और उन पर हुई कार्रवाई को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है।

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पटवारी संघ का कहना है कि जब तक उन्हें निष्पादक की भूमिका से हटाया नहीं जाता, उनकी मुख्य आपत्ति बनी रहेगी। संघ कार्रवाई वापस लेने की मांग भी कर रहा है।

50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री का मामला
मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीण इलाकों की करीब 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया पर सरकार के 3,800 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है।

स्वामित्व योजना में ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी भूमि पर काबिज लोगों को मालिकाना हक देने के लिए अधिकार अभिलेख तैयार किए गए हैं। अब इसी आबादी भूमि पर काबिज लोगों को रजिस्ट्री के जरिए मुफ्त में मालिकाना हक देने की प्रक्रिया की जा रही है।

पटवारी संघ ने कहा- कोर्ट में घसीटे जांएगे

पटवारी संघ ने योजना में रजिस्ट्री के निष्पादक के रूप में काम करने से इनकार किया है। संघ का कहना है कि लीज डीड में पटवारी का नाम शामिल होने से भविष्य में जमीन को लेकर विवाद होने पर उन्हें भी कानूनी मामले में पक्षकार बनाया जा सकता है।

 

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