छत्तीसगढ़

CG : जैविक खेती अपनाकर लागत में लाई कमी, कृषि विभाग के मार्गदर्शन से आत्मनिर्भर बनीं एरिन भगत …

By kadwaghut|27 Jul 2026, 1:31 PM
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अम्बिकापुर। कृषि विभाग द्वारा संचालित जैविक खेती को बढ़ावा देने के प्रयास जिले के किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहे हैं। किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में जिले के विकासखंड सीतापुर के ग्राम पेटला की कृषक श्रीमती एरिन भगत ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में जैविक खेती अपनाकर खेती की लागत कम करने के साथ-साथ प्राकृतिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाया है।

श्रीमती एरिन भगत ने बताया कि उन्हें कृषि विभाग द्वारा जैविक खेती के लिए प्रेरित किया गया। विभाग की ओर से उन्हें जीवामृत तैयार करने हेतु विशेष कंटेनर (ड्रम) उपलब्ध कराया गया, जिसकी सहायता से वे गाय के मूत्र का उपयोग कर जीवामृत तैयार करती हैं। इसके साथ ही वे गाय के गोबर से वर्मी खाद बनाकर अपने खेतों में उपयोग कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में वे अपने खेतों में पूर्णतः जैविक खेती कर रही हैं। इसके अलावा वे केंचुआ पालन (वर्मी कल्चर) भी कर रही हैं, जिससे गुणवत्तापूर्ण वर्मी कम्पोस्ट तैयार होता है। जैविक खाद एवं जीवामृत के नियमित उपयोग से उनकी रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता काफी कम हो गई है, जिससे खेती की लागत में कमी आई है।

एरिन भगत का कहना है कि पहले रासायनिक खाद पर अधिक खर्च करना पड़ता था, लेकिन अब जैविक खेती अपनाने से उस खर्च में कमी आई है। प्राकृतिक संसाधनों से तैयार जैविक खाद का उपयोग करने से न केवल आर्थिक बचत हो रही है, बल्कि भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने में भी मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि जैविक खेती पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों के लिए भी लाभकारी सिद्ध हो रही है।

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कृषि विभाग द्वारा किसानों को जैविक खेती, जीवामृत निर्माण, वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन एवं प्राकृतिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। वैज्ञानिक मार्गदर्शन एवं कृषि विभाग के सहयोग से किसान कम लागत में टिकाऊ एवं लाभकारी खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

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