छत्तीसगढ़

मजदूरों की सुरक्षा पर जोर: संभागायुक्त बोले—उद्योगों को निभानी होगी जिम्मेदारी

By Admin|25 Mar 2026, 10:31 PM
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रायपुर

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शून्य दुर्घटना पर कार्यशाला में दिया गया जोर

औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा आज बिलासपुर के पं. देवकीनंदन दीक्षित सभागृह में आयोजित एकदिवसीय औद्योगिक सुरक्षा जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में बिलासपुर के संभागायुक्त  सुनील जैन, कलेक्टर  संजय अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  रजनेश सिंह, आईएचएस के संचालक  मनीष वास्तव ने संबोधित किया। कार्यशाला में औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के डिप्टी डायरेक्टर विजय कुमार सोरी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से औद्योगिक इकाइयों के प्रबंधन एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस कार्यशाला का उद्देश्य क्षेत्र की स्पॉन्ज आयरन फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना था।      

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संभागायुक्त  सुनील जैन ने स्पष्ट कहा कि औद्योगिक सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि उद्योगों का उद्देश्य केवल लाभ अर्जित करना नहीं, बल्कि देश के विकास में योगदान देने के साथ-साथ श्रमिकों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। दुर्घटनाएं भले ही क्षणिक होती हैं, लेकिन उनके दुष्परिणाम लंबे समय तक प्रभावित करते हैं। इसलिए औद्योगिक इकाइयों में जोखिम की पहचान कर समय रहते उचित प्रबंधन, आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की स्थापना, नियमित प्रशिक्षण एवं मेंटेनेंस सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
       
कलेक्टर  संजय अग्रवाल ने कहा कि उद्योग देश के विकास और रोजगार सृजन का प्रमुख माध्यम हैं, लेकिन किसी भी दुर्घटना से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि संस्थान की साख भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन और श्रमिकों के सामूहिक प्रयास से ही सुरक्षित कार्य वातावरण निर्मित किया जा सकता है। श्रमिकों को नियमित प्रशिक्षण देने, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने तथा उनमें स्वामित्व की भावना विकसित करने पर उन्होंने विशेष बल दिया।
         
कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  रजनेश सिंह ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। सुरक्षा उपकरणों का उपयोग न करना गंभीर घटनाओं को जन्म देता है, जिसमें मानव लापरवाही प्रमुख कारण होती है। उन्होंने “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाने तथा किसी भी घटना की स्थिति में उसे छुपाने के बजाय तत्काल प्रशासन को सूचित करने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में औद्योगिक इकाइयों द्वारा सुरक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों पर प्रस्तुतियां दी गईं तथा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से श्रमिकों एवं प्रबंधन को जागरूक किया गया। पावर पॉइंट प्रस्तुति एवं संवादात्मक सत्रों के जरिए प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यशाला में सुरक्षा की शपथ भी ली गई। इस आयोजन के माध्यम से औद्योगिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया।

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