छत्तीसगढ़

CG : दुष्कर्म के आरोपी को हुई 20 साल की सजा…

By kadwaghut|26 Jul 2026, 1:42 PM
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अंबिकापुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट कमलेश जगदल्ला की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष कारावास तथा अर्थदंड की सजा सुनाई है।अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस प्रकरण में दुष्कर्म से नाबालिग गर्भवती हो गई थी और उसने बच्चे को भी जन्म दिया था।अदालत ने पीड़िता को पांच लाख रुपये प्रतिकर की राशि दिए जाने की भी अनुशंसा की है। विशेष लोक अभियोजक विद्याभूषण श्रीवास्तव ने बताया कि सरगुजा जिले के कमलेश्वरपुर थाना क्षेत्र के विमल खाखा (19) ने 20 जुलाई 2022 से 26 जुलाई 2022 तक नाबालिग को अपने कब्जे में रख अलग-अलग स्थान पर ले जाकर दुष्कर्म किया था। नाबालिग के स्वजन की शिकायत पर पुलिस ने विमल खाखा के कब्जे से उसे बरामद किया था। प्रकरण में अपहरण, दुष्कर्म तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धाराओं के तहत केस पंजीकृत किया था। अदालत के आदेश पर आरोपित को पहले जेल भेजा गया था।

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पुलिस द्वारा चालान न्यायालय में प्रस्तुत करने के बाद प्रकरण की सुनवाई हुई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट कमलेश जगदल्ला की अदालत ने प्रकरण के सारे तथ्यों की सुनवाई और पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त को दोषी पाया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियुक्त का कृत्य दंडनीय योग्य है। दंड का प्रश्न अत्यंत ही कठिन प्रश्न होता है लेकिन दंड अधिरोपित करते समय केवल अभियुक्त की उम्र या उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि के अवलंबन होने तक ही विचार योग्य नहीं होता है, बल्कि अपराध की प्रकृति एवं अपराध के परिणामस्वरूप आहत को आई शारीरिक व मानसिक पीड़ा और आहत एवं अभियुक्त का आपसी संबंध भी विचार योग्य होता है।

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अभियुक्त के द्वारा 15 वर्ष नौ माह 25 दिन की पीड़िता के साथ अपराध कारित किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप पीड़िता का गर्भवती होकर एक शिशु को जन्म दिया जाना बताया गया है। अतः ऐसी स्थिति में अभियुक्त के दंड में नरमी दिखाए जाने से इसका समाज पर गलत संदेश जाएगा। अतः अपराध की गंभीरता एवं समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को दृष्टिगत रखते हुए विचारोपरान्त अभियुक्त को धारा-363, 366, 376 (2) (ढ), 376 (3) भारतीय दंड संहिता 1860 एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत दंडित किया गया। अदालत ने अलग-अलग धाराओं में दोषी को अधिकतम 20 वर्ष की सजा तथा अर्थदंड की सजा सुनाई है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। पीड़िता को शासन की योजना के तहत पांच लाख रुपये प्रतिकर की राशि दिए जाने की भी अनुशंसा अदालत ने की है।

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