छत्तीसगढ़

पोड़ियम लक्ष्मी का समर्पण: छत्तीसगढ़-आंध्र सीमा पर सक्रिय महिला माओवादी ने छोड़ा हिंसा का रास्ता

By Admin|11 May 2026, 6:01 PM
f X W

जगदलपुर
टूटे हुए नक्सल कैडर को फिर से एकजुट करने की नई साजिश नाकाम नजर आ रही है. छत्तीसगढ़ सीमा से लगे आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सिताराम राजू जिले में एक ईनामी महिला माओवादी ने मुख्यधारा की ओर कदम बढ़ाते हुए सरेंडर कर दिया. सरेंडर करने वाली महिला माओवादी पोडियम लक्ष्मी पर 5 लाख रुपए का इनाम घोषित है.लक्ष्मी बीजापुर जिले के उसुर थाना क्षेत्र की निवासी है। 

Advertisement
Advertisement

जानकारी के मुताबिक, इनामी माओवादी पोडियम लक्ष्मी लंबे वक्त से नक्सल संगठन के साथ जुड़ी हुई थी. DKSZC के 2 सीआरसी पीएलजीए बटालियन  सक्रीय सदस्य के रूप में लक्ष्मी लंबे समय से छत्तीसगढ़ आंध्र प्रदेश बॉर्डर में सक्रियता थी. सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर माओवादी पोडियम लक्ष्मी ने एटका पुलिस कैंप में अतिरिक्त पुलिस अध्यक्ष पंकज मीणा के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास, रोजगार और सरकारी योजनाओ का लाभ दिया जाएगा। 

नक्सलियों ने जारी किया पत्र
हाल में प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे निर्णायक अभियान और सरकार के राज्य से ‘नक्सल सफाए’ की आधिकारिक घोषणा के बाद नया मोड़ आया. प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) की उत्तर तालमेल कमेटी द्वारा तेलंगाना में जारी किए गए एक विस्तृत पत्र से इस नई साजिश का खुलासा हुआ. माओवादी संगठन ने अपने पत्र में आंदोलन के वर्तमान पतन और मौजूदा संकट का ईमानदारी से जिक्र करते हुए इतिहास का हवाला दिया है। 

पत्र में नक्सलबाड़ी आंदोलन के सूत्रधार चारू मजूमदार के दौर का उदाहरण देते हुए बताया कि भले ही संगठन अभी कमजोर दिख रहा हो, लेकिन उनकी केंद्रीय कमेटी अभी भी रणनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय है और अंततः जीत उन्हीं की होगी. इस पत्र में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात शीर्ष नक्सली नेता ‘देवजी’ के आत्मसमर्पण को लेकर कही गई. संगठन ने देवजी को ‘गद्दार’ और ‘दुश्मन का एजेंट’ करार दिया है. पत्र में आरोप लगाया गया है कि देवजी का रास्ता ‘संशोधनवाद’ का है, जो पार्टी को खत्म करने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। 

READ ALSO  Namaste Scheme में छत्तीसगढ़ का जलवा, पांच राज्यों के साथ संयुक्त रूप से हासिल की नंबर-1 रैंक

पुलिस का कहना है कि यह बयानबाजी पुरानी, अप्रासंगिक और खोखली विचारधारा को जिंदा दिखाने की कोशिश प्रयास है. वहीं पोडियम लक्ष्मी के आत्मसमर्पण ने पुलिस के इस दावे को और मजबूती दी है। 

सीमा क्षेत्र में थी सक्रिय
जानकारी के मुताबिक, लक्ष्मी छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमा पर सक्रिय नक्सली संगठन का हिस्सा थी। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थीं। उस पर राज्य सरकार ने 5 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। लक्ष्मी के आत्मसमर्पण को सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इससे अन्य नक्सलियों को भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरणा मिलेगी।

क्या है छत्तीसगढ़ की नई पुनर्वास नीति?
मार्च 2025 में लागू की गई छत्तीसगढ़ सरकार की नई पुनर्वास नीति का उद्देश्य आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों और नक्सल हिंसा प्रभावित लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक सहायता, आवास सुविधा, बच्चों की शिक्षा, रोजगार के अवसर और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है। सरकार का मानना है कि इस पहल से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास को बढ़ावा मिलेगा।

बस्तर संभाग में नक्सल मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जहां लंबे समय से सक्रिय रही महिला माओवादी उर्मिला उर्फ टेटकी (28) ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। रावघाट एरिया कमेटी की सदस्य रही उर्मिला ने मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला मुख्यालय पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। गुरुवार को पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में उसका विधिवत आत्मसमर्पण कराया जाएगा।

READ ALSO  ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में राज्यपाल रमेन डेका का संदेश, समय का सदुपयोग और मेहनत से मिलेगी सफलता

13 साल तक नक्सली संगठन में रही सक्रिय
उर्मिला मूल रूप से मानपुर ब्लॉक के मुंजाल गांव की रहने वाली है। उसने करीब 13 वर्षों तक सशस्त्र माओवादी संगठन के साथ रहकर काम किया। कम उम्र में ही वह नक्सल गतिविधियों में शामिल हो गई थी और धीरे-धीरे संगठन के भीतर उसकी भूमिका मजबूत होती गई। उसका आत्मसमर्पण इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि उसे मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले का आखिरी सक्रिय माओवादी कैडर बताया जा रहा है।

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins