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AI और आईटी निवेश पर झारखंड का बड़ा दांव, रांची बनेगा टेक हब

By Admin|13 Jul 2026, 6:25 PM
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रांची
झारखंड की पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा से है. जिसने अपनी यात्रा में मानव-निर्मित संसाधनों की अपेक्षा प्रकृति पर अधिक भरोसा किया. आज प्रकृति ही उसकी पहचान है और उसकी सबसे बड़ी ताकत भी. लेकिन अब लगता है कि तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार के विस्तार की उसकी महत्वाकांक्षा आकार ले रही है, और उसने वक्त भी बिल्कुल वाजिब चुना है. पूरी दुनिया जब इस नई तकनीक के साथ अपनी पहचान बना रही है, तब झारखंड भी उसके साथ कदम मिलाकर चलने का रास्ता तलाश रहा है.

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नई दिल्ली से झारखंड की AI यात्रा की शुरुआत
जिस दिल्ली में छह महीने पहले दुनिया भर के तकनीकी विशेषज्ञों का जमावड़ा लगा था, वहीं से झारखंड ने अपनी इस तकनीकी यात्रा की शुरुआत की है. राजधानी में आयोजित दो दिवसीय नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन प्रोग्राम के मंच से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी इस यात्रा को लेकर कई दावे किए. उन्होंने कहा, भारत का औद्योगिक विकास, झारखंड के औद्योगिक विकास के बिना संभव नहीं है. कार्यक्रम में अपनी इच्छा जाहिर करते हुए, उन्होंने कहा कि झारखंड केवल अपनी खनिज संपदा के लिए ही नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचार के साथ आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास की संभावनाओं की तलाश करे, एवं राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर पहचान स्थापित करे.

क्या है झारखंड सरकार की आईटी योजना?
झारखंड विकास विजन 2050 के अंतर्गत सरकार ने राज्य को आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हब के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है. योजना के तहत रांची में करीब 100.97 एकड़ क्षेत्र में अत्याधुनिक आईटी पार्क विकसित होगा और राज्य की अपनी एआई नीति लागू की जाएगी. इस नीति के तहत स्टेट एआई क्लाउड तैयार किया जाएगा, जो केंद्र सरकार के इंडिया एआई इकोसिस्टम के साथ मिलकर काम करेगा.

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क्या है सरकार की ड्राफ्ट एआई पॉलिसी
ड्राफ्ट एआई पॉलिसी 2026 के अनुसार सरकार की नजर फ्यूचर टेक पर है, ताकि एआई आधारित स्मार्ट माइनिंग के जरिए खदानों में दुर्घटनाओं की रोकथाम, खनिज चोरी पर निगरानी तथा राज्य के पहाड़ी इलाकों में डेटा एनालिटिक्स द्वारा मौसम और मिट्टी का विश्लेषण किया जा सके. इसके अलावा स्वास्थ्य, कृषि, ग्रामीण विकास, खनिज प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था में भी एआई का व्यापक उपयोग किया जाएगा. मिशन के तहत डिजिटल गवर्नेंस और सरकारी डेटा प्लेटफॉर्म को एआई से सिंक किया जाएगा, ताकि रियल टाइम मॉनिटरिंग और समस्याओं का डिजिटल समाधान तैयार किया जाए . योजना के तहत अगले पांच वर्षों में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जाएगी, जो राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कार्यान्वयन की निगरानी करेगी.

आईटी शहरों को छोड़कर रांची आएंगी कंपनियां ?
हालांकि सबसे बड़ा सवाल है कि कागज पर आकर्षक दिखने वाली यह योजना, जमीन पर भी सफल हो पाएगी? मौजूदा राजनीतिक और भौगोलिक परिस्थितियों के बीच क्या सरकार अपनी इस महत्वाकांक्षी योजना को सफल बना पाएगी? यदि कोई कंपनी स्थापित आईटी शहरों के बजाय रांची में निवेश करना चाहे तो क्या सरकार उसे सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा सकेगी? बेंगलुरु, हैदराबाद, नोएडा, पुणे और चेन्नई जैसे स्थापित आईटी इकोसिस्टम से कंपनियों को रांची की ओर आकर्षित करने के लिए सरकार पूंजी निवेश पर रिम्बर्समेंट, स्टांप ड्यूटी में 100 प्रतिशत तक छूट और बिजली शुल्क में पूरी तरह माफी जैसे बड़े प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है.ये सुविधाएं आकर्षक जरूर हैं, लेकिन इनका समय पर और पारदर्शी तरीके से लागू होना सबसे महत्वपूर्ण है.

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झारखंड के लिए असली चुनौती है उसके पड़ोसी राज्य
झारखंड के पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल और ओडिशा पहले से ही आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ चुके हैं. भुवनेश्वर में इन्फोसिटी-1 और इन्फोसिटी-2 जैसे आईटी जोन विकसित है, कोलकाता के सॉल्ट लेक और न्यू टाउन में लाखों वर्ग फीट का कमर्शियल स्पेस बना हुआ है. बिहार भी पटना के बिहटा में आईटी पार्क विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है. ऐसे में झारखंड को उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना होगा, जहां वह अपने पड़ोसी राज्यों की तुलना में निवेशकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा सके.

निवेश के लिए क्यों हो सकता है रांची पसंदीदा जगह ?
महंगा ऑफिस किराया, शहरों में जगह की कमी और ट्रैफिक जाम जैसी परेशानी के चलते दुनियाभर की आईटी कंपनियां अब टियर-1 (दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे) जैसे महंगे महानगरों के बदले टियर-2 शहरों ( इंदौर, कोच्चि, भुवनेश्वर, कोयंबटूर) का रुख कर रही हैं.ऐसे में कंपनियां रांची को संभावित निवेश स्थल के रूप में देख सकती है.

तकनीकी विस्तार के लिए कितना तैयार है झारखंड?
हालांकि इन योजनाओं से अलग सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि वर्तमान में झारखंड की आईटी क्षमता क्या है। राज्य का आईटी उद्योग कितना बड़ा है? इंटरनेट, डेटा सेंटर और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति क्या है? पिछले आईटी निवेशों का अनुभव कैसा रहा है? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या यह महत्वाकांक्षी योजना कागज से निकलकर जमीन पर भी उतर पाएगी?

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