छत्तीसगढ़

किसानों के लिए वरदान बनेगी ग्राफ्टेड सब्जियां, धमतरी में वैज्ञानिक प्रशिक्षण से मिली आधुनिक खेती की जानकारी

By Admin|05 Jul 2026, 10:12 AM
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​रायपुर : ​जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए वरदान बनेगी ग्राफ्टेड सब्जी: धमतरी में वैज्ञानिक प्रशिक्षण संपन्न

केरेमुड़ा में किसानों को दी गई ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की वैज्ञानिक खेती की कमान

नगरी विकासखंड में बांटे गए 1 लाख से अधिक पौधे, लागत घटेगी और बढ़ेगी किसानों की आय

जिला पंचायत, प्रदान (PRADAN) संस्था और गट्टासिल्ली FPO की अनूठी साझा पहल

​रायपुर, 

खरीफ और रबी मौसम में बदलती जलवायु (Climate Change) की चुनौतियों के बीच किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें कम लागत में सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन दिलाने के लिए धमतरी जिले में एक बड़ी पहल की गई है। जिले के नगरी विकासखंड के ग्राम केरेमुड़ा में ग्राफ्टेड (कलमी) टमाटर और बैंगन की वैज्ञानिक खेती पर एक दिवसीय ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला पंचायत के मार्गदर्शन में आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण का संचालन प्रदान (PRADAN) संस्था द्वारा किया गया।

    ​इस प्रशिक्षण में नगरी और मगरलोड विकासखंड की कृषि सखियों, मास्टर ट्रेनर्स सहित बड़ी संख्या में स्थानीय किसानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को ग्राफ्टेड सब्जी उत्पादन की आधुनिक व वैज्ञानिक तकनीकों से रूबरू कराकर उन्हें जलवायु-अनुकूल, टिकाऊ और अधिक मुनाफे वाली खेती के लिए प्रेरित करना था।

​बांटे गए 1 लाख से अधिक ग्राफ्टेड पौधे

     ​अधिकारियों ने बताया कि इस आजीविका मिशन के तहत नगरी विकासखंड में किसानों को कुल 1 लाख 1 हजार 800 ग्राफ्टेड पौधों का वितरण किया गया है। इसमें 51 हजार 800 ग्राफ्टेड टमाटर और 50 हजार ग्राफ्टेड बैंगन के पौधे शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्राफ्टेड पौधे सामान्य पौधों की तुलना में बेहद मजबूत होते हैं। इनकी जड़ प्रणाली (Root System) सशक्त होती है, जिससे इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। ये पौधे विपरीत मौसम में भी तेजी से बढ़ते हैं और बंपर पैदावार देते हैं, जिससे किसानों को बाजार में अपनी फसल की बेहतर कीमत मिलती है।

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ग्राफ्टेड पौधा में बीमारियां कम और पैदावार दोगुनी होती है

​      ग्राफ्टिंग एक ऐसी वैज्ञानिक तकनीक है जिसमें एक पौधे के मजबूत जड़ वाले हिस्से (रूटस्टॉक) पर दूसरे अधिक उत्पादन देने वाले पौधे के ऊपरी हिस्से (सायन) को जोड़कर एक नया 'सुपर प्लांट' तैयार किया जाता है। इससे बीमारियां कम लगती हैं और पैदावार दोगुनी तक हो जाती है।

​खेत पर ही दिया गया लाइव डिमांस्ट्रेशन

      ​प्रशिक्षण की सबसे खास बात रहा खेत पर आयोजित 'लाइव फील्ड डेमोंस्ट्रेशन' (व्यावहारिक प्रदर्शन)। इसमें किसानों को सिर्फ किताबी ज्ञान न देकर सीधे खेत में ले जाकर भूमि की तैयारी, पौधों का उपचार, वैज्ञानिक तरीके से रोपण (Plantation), मल्चिंग, नमी संरक्षण और जैविक कृषि तकनीकों का लाइव प्रदर्शन करके दिखाया गया।

    ​इसके साथ ही कृषि विशेषज्ञों ने समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन (IPM), मृदा स्वास्थ्य (Soil Health), जैव उर्वरकों का सही उपयोग और फसल कटाई के बाद के प्रबंधन की बारीकियां सिखाईं। संवाद सत्र में किसानों ने खेती के दौरान होने वाली अपनी रोजमर्रा की समस्याओं को रखा, जिसका विशेषज्ञों ने मौके पर ही वैज्ञानिक समाधान बताया।

​FPO और प्रदान (PRADAN) का मिला मजबूत साथ

    ​इस पूरी मुहिम को धरातल पर उतारने में 'गट्टासिल्ली फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी' (FPO) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसके माध्यम से किसानों को उन्नत ग्राफ्टेड पौधे और जरूरी जैविक खाद-सामग्री उपलब्ध कराई गई। वहीं प्रदान संस्था द्वारा कृषि सखियों और किसानों को पूरे फसल चक्र (Crop Cycle) के दौरान लगातार तकनीकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उनका कौशल विकास किया जा रहा है।

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    ​जिला पंचायत धमतरी के मार्गदर्शन में चल रही यह त्रिकोणीय पहल (प्रशासन, FPO और प्रदान संस्था) नगरी और मगरलोड विकासखंड में आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ खेती का एक नया मॉडल पेश कर रही है। इससे न केवल ग्रामीण आजीविका मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर पोषण सुरक्षा को भी एक नया आयाम मिलेगा।

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