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पंचायत व्यवस्था मजबूत करने की पहल: 25 साल बाद पेसा कानून के जमीनी स्तर पर लागू होने पर फोकस

By Admin|22 May 2026, 5:32 PM
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रांची

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 पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025 को लेकर राज्यस्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा है कि ग्राम सभा को अधिकार दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।

उन्हाेंने पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर कार्यशाला के दौरान इसकी बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया। मंत्री ने कहा कि राज्य में 25 साल बाद पेसा कानून लागू हुआ है और अब बारी गांव-गांव तक बेहतर क्रियान्वयन की है। बैठक में जिलों के उप विकास आयुक्त, समाहर्ता, बीडीओ – सीओ सहित पदाधिकारी शामिल हुए।

धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन के एनेक्सी सभागार में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि अब पारंपरिक ग्राम सभा को उनका अधिकार दिलाना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए गांव-गांव तक पेसा नियमावली के बेहतर एवं मजबूत क्रियान्वयन की आवश्यकता है।

पेसा कानून के दायरे में आने वाले जिलों के अधिकारियों को अपनी जिम्मेवारी का निर्वहन करना होगा। उन्होंने कहा कि इस कानून को धरातल पर उतारने के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्य करना आवश्यक है। दीपिका ने बताया कि देश के दस राज्यों में पेसा कानून लागू होना था, जिनमें झारखंड का कानून सबसे बेहतर और प्रभावी माना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि कानून को लेकर कुछ स्थानों पर भ्रम फैलाने की कोशिश हो रही है, ऐसे में सभी संबंधित लोगों को इसके प्रविधानों का गहन अध्ययन करना चाहिए। गांव के लोगों के हर सवाल और परेशानियों का जवाब पेसा नियमावली के पन्नों में दर्ज है।

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उन्होंने निर्देश दिया कि पारंपरिक व्यवस्था के तहत तीन महीने के भीतर ग्राम प्रधानों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि आगे की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से लागू की जा सकें।

स्थानीय लोगों तक जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचे : सचिव
कार्यशाला को संबोधित करते हुए पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने कहा कि नियमावली लागू होने के बाद से ही इसे जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों तक इसकी जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचे इसके लिए नियमावली का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद कराया गया है।

कानून के विभिन्न प्रविधानों को राज्यभर में प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 125 मास्टर ट्रेनरों को तैयार किया गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर जागरूकता बढ़ा रहे हैं। निदेशक की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी गठित की गई है, जो कानून के लागू होने में आने वाली बाधाओं का अध्ययन कर रही है।

मनोज कुमार ने कहा कि पारंपरिक न्याय व्यवस्था का भी गहन अध्ययन किया जा रहा है, ताकि स्थानीय संदर्भों को ध्यान में रखते हुए नियमावली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

कार्यशाला में पंचायती राज निदेशालय की निदेशक बी. राजेश्वरी ने बताया कि इस कानून को लागू करने से पहले कई आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की गईं, लेकिन इसके क्रियान्वयन के दौरान विभिन्न प्रकार की चुनौतियां भी सामने आई हैं। इन बाधाओं को दूर करने के लिए निरंतर सुधार की प्रक्रिया जारी है।

 

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