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पानी विवाद खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम: राजस्थान-हरियाणा के बीच ऐतिहासिक समझौते की तैयारी

By Admin|23 Jun 2026, 9:41 PM
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जयपुर
राजस्थान में पानी के पुराने और पेचीदा विवाद अब सुलझने के नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं। मध्य प्रदेश के साथ पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) का विवाद सुलझाने के ठीक बाद, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अब पड़ोसी राज्य हरियाणा के साथ दोस्ती का नया हाथ बढ़ाया है। मंगलवार को देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय अंतर्राज्यीय बैठक में शेखावाटी अंचल को यमुना का पानी देने के ऐतिहासिक फॉर्मूले पर सहमति बन गई है।

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केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में हुई इस त्रिपक्षीय बैठक में 'यमुना जल परियोजना' को लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबी और निर्णायक चर्चा हुई।

तैयार हुआ 'पाइपलाइन फॉर्मूला', केंद्रीय जल आयोग पहुंची DPR
इस बैठक का मुख्य फोकस यमुना नदी के पानी को राजस्थान के चूरू, सीकर और झुंझुनूं (शेखावाटी क्षेत्र) तक पहुंचाने के लिए तैयार किए जा रहे 'मेमोरेन्डम ऑफ एग्रीमेंट' के विधिक और तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप देना था। तकनीकी विकास को लेकर सबसे बड़ी खबर यह है कि राजस्थान तक पानी लाने के लिए अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाने की संयुक्त विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पूरी तरह तैयार कर ली गई है। दोनों राज्यों के जल संसाधन विभागों ने इसे आपसी सहमति के बाद केंद्रीय जल आयोग को अंतिम विधिक स्वीकृति के लिए सौंप दिया है।

'खत्म हो रहा है पानी पर लड़ने का दौर'- सीएम भजनलाल
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस मुलाकात को राज्य के सुनहरे भविष्य के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा-

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देश में अब राज्यों के बीच पानी को लेकर चलने वाले पुराने विवादों का दौर खत्म हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में सभी राज्य अब विवाद नहीं, बल्कि समाधान की राह पर बढ़ रहे हैं।

उन्होंने ERCP का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे एमपी और राजस्थान ने मिलकर राह निकाली, वैसे ही अब हरियाणा और राजस्थान मिलकर समाधान की ओर बढ़ चुके हैं। बहुत जल्द ही प्रधानमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में दोनों राज्यों के बीच अंतिम समझौता पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए जाएंगे।

शेखावाटी के अन्नदाता और जनता को मिलेगा भरपूर पानी
यह परियोजना शेखावाटी के लिए 'लाइफलाइन' साबित होने वाली है। इस फॉर्मूले के तहत न केवल आम जनता को पीने का मीठा पानी मिलेगा, बल्कि क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध होगा। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया भी समानांतर रूप से चलाई जा रही है ताकि MoU होते ही धरातल पर काम शुरू किया जा सके। सीएम ने साफ किया कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सुदृढ़ जल प्रबंधन बेहद आवश्यक है।

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