मध्य प्रदेशराज्‍य

जबलपुर में सड़क की बदहाली का दर्दनाक अंजाम, 2 किमी पैदल चली गर्भवती; मां और अजन्मे बच्चे ने दम तोड़ा

By Admin|21 Jun 2026, 6:11 PM
f X W

जबलपुर.

Advertisement
Advertisement

स्मार्ट सिटी और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जबलपुर से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने व्यवस्था की संवेदनशीलता और जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर सीमा से लगे एपीजे अब्दुल कलाम वार्ड की ब्रजपुरी कॉलोनी में सड़क की बदहाली एक गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की जिंदगी पर भारी पड़ गई।

समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण 22 वर्षीय ममता कुशवाहा और उसके गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई। यह केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की विफलता की कहानी है, जो विकास के दावे तो करती है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाती।

प्रसव पीड़ा शुरू हुई, लेकिन रास्ता बना सबसे बड़ी बाधा
शुक्रवार शाम करीब साढ़े सात महीने की गर्भवती ममता कुशवाहा को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उस समय उनके पति अमन कुशवाहा मजदूरी के लिए घर से बाहर गए हुए थे। घर पर मौजूद जेठानी ने तुरंत अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन कॉलोनी तक पहुंचने वाली सड़क कीचड़, गड्ढों और खराब हालात के कारण वाहन चालकों ने अंदर आने से मना कर दिया। दर्द से कराह रही ममता के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा। मजबूरी में उन्हें जेठानी के सहारे पैदल ही मुख्य सड़क तक जाना पड़ा। करीब दो किलोमीटर का यह सफर उनके लिए किसी यातना से कम नहीं था। हर कदम के साथ दर्द बढ़ता जा रहा था और समय हाथ से निकलता जा रहा था।

READ ALSO  CJI सूर्यकांत का संदेश- नशे से जूझ रहे बच्चों को संरक्षण, देखभाल और सम्मान जरूरी

अस्पतालों के बीच दौड़ती रही जिंदगी
मुख्य मार्ग पर पहुंचने के बाद किसी तरह ऑटो मिला और ममता को लेडी एल्गिन अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए तुरंत नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक पहुंचने की इस जद्दोजहद में कीमती समय निकल चुका था। मेडिकल कॉलेज पहुंचते-पहुंचते गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई। कुछ ही देर बाद ममता ने भी अंतिम सांस ले ली। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

अब सवालों के घेरे में व्यवस्था
ब्रजपुरी कॉलोनी के रहवासियों का कहना है कि क्षेत्र की खराब सड़क और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ममता और उसके अजन्मे बच्चे की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर विकास के दावे तब किस काम के हैं, जब एक गर्भवती महिला को इलाज के लिए दो किलोमीटर पैदल चलना पड़े और उसकी कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़े।

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins