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NH और SH की तरह ग्रामीण सड़क परियोजनाएं भी भूमि और वन स्वीकृति से प्रभावित

By Admin|08 Jun 2026, 9:41 AM
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 पटना
 ग्रामीण इलाके में बनने वाली सड़कें भी राष्ट्रीय उच्च पथ (NH) और स्टेट हाईवे (SH) के निर्माण से जुड़ी आधारभूत समस्या को झेल रही हैं। यह समस्या जमीन की उपलब्धता से संबंधित है।

ग्रामीण कार्य विभाग के एक आकलन के अनुसार अगले पांच वर्षों में बिहार के ग्रामीण इलाके में सड़क निर्माण को 3600 करोड़ रुपए अकेले जमीन अधिग्रहण मद में खर्च कर करने होंगे।

इस राशि का आकलन प्रति वर्ष 10 प्रतिशत की वृद्धि को जोड़कर किया गया है।

319 सड़कों के लिए जमीन की जरूरत
ग्रामीण कार्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में 319 सड़कों का मामला जमीन अधिग्रहण के पेच में फंसा है। इनमें 51 स्थायी पट्टा से संबंधित मामले हैं।

इस बारे में ग्रामीण कार्य विभाग का कहना है कि अलग-अलग विभागों से समन्वय कर समस्या का समाधान कराया जाएगा। समस्या समाधान के लिए हर माह संबंधित विभागों के साथ संयुक्त रूप से साइट मीटिंग आयोजित की जाएगी।

यह भी योजना बन रही कि जहां तक संभव हो वैसी परियाेजनाएं प्राथमिकता के आधार पर ली जाएं जिसमें किसी तरह के जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं पड़े।

फाॅरेस्ट क्लियरेंस का भी पेच
जिस तरह से एनएच और एसएच का निर्माण फारेस्ट क्लियरेंस में अटक जाता है उसी तरह का मामला ग्रामीण कार्य विभाग के भी सामने आ रहा।

इस बारे में मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में 47 सड़कों का मामला वन स्वीकृति हासिल नहीं होने की वजह से अटका पड़ा है।

बहुत से मामले ऐसे हैं जहां एलायनमेंट के तहत बिजली पोलों को हटाया जाना है। इस बारे में जानकारी दी गई कि बिजली के जाे पोल संबंधित सड़क के एलायनमेंट के बाहर हैं उसके लिए किसी तरह का शुल्क देय नहीं होगा।

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इसी तरह पुराने जर्जर बिजली पोल के स्थानांतरण के लिए नई दर का भुगतान नहीं होगा।
नए प्रोजेक्ट में कमिश्नर व डीएम की अनुशंसा आवश्यक

ग्रामीण कार्य विभाग ने तय किया है कि अतिरिक्त परियोजनाओं के समावेशन के प्रस्तावों की गहन जांच और स्क्रीनिंग की जाएगी।

प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारी की विधिवत अनुशंसा संबंधित प्रस्ताव पर दर्ज होगी। इसके बाद ही सड़क निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

 

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