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मरा हुआ’ युवक जिंदा लौटा, जेल में हैं आरोपी; अधजली लाश की पहचान पर उठे गंभीर सवाल

By kadwaghut|22 Dec 2025, 10:12 PM
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जशपुर। करीब तीन माह पहले जंगल में मिली एक अधजली लाश के मामले ने अब चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। जिस युवक को पुलिस रिकॉर्ड में मृत मानकर हत्या का मामला दर्ज किया गया था, वही युवक जिंदा सामने आ गया है। इस खुलासे के बाद पूरे प्रकरण में की गई जांच, शव की पहचान और आरोपियों की गिरफ्तारी पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

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22 अक्तूबर को जंगल में मिली थी अधजली लाश

दिनांक 22 अक्तूबर को पुरनानगर–बालाछापर मार्ग के बीच स्थित तुरीटोंगरी जंगल में एक युवक की अधजली लाश मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई थी। शव जंगल के भीतर एक गड्ढे में पड़ा हुआ था। मृतक का चेहरा और शरीर का अधिकांश हिस्सा बुरी तरह जला हुआ था, जिससे पहचान करना मुश्किल हो रहा था।

सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके का पंचनामा तैयार कर मर्ग कायम किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवक की मौत हत्यात्मक पाए जाने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सिटी कोतवाली थाना जशपुर में
बी.एन.एस. की धारा 103(1) एवं 238(क) के तहत हत्या का अपराध दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की।

जांच के दौरान पुलिस ने कथित पहचान के आधार पर कुछ संदेहियों को आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

अब जिंदा लौटा ‘मृत’ युवक

मामला उस वक्त पूरी तरह पलट गया जब मृत घोषित किया गया युवक हाल ही में जिंदा सामने आ गया। युवक के जीवित मिलने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जंगल में मिली अधजली लाश आखिर किसकी थी?

शव की पहचान पर उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण में कई गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं—

  • अधजली लाश की पहचान किस आधार पर की गई?
  • क्या डीएनए जांच कराई गई थी या केवल अनुमान के आधार पर पहचान की गई?
  • निर्दोष लोगों को जेल भेजने की जिम्मेदारी किसकी है?

आरोपी अब भी जेल में

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए आरोपी अभी भी जेल में बंद हैं, जबकि कथित मृतक के जिंदा होने की पुष्टि हो चुकी है। आरोपी पक्ष ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए न्यायिक जांच की मांग की है।

पुलिस कर रही पुनः जांच

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की नए सिरे से जांच की जा रही है और अधजली लाश की वास्तविक पहचान के लिए वैज्ञानिक व तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला न केवल एक बड़ी जांची चूक की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पहचान में की गई लापरवाही कैसे न्याय व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर सकती है।

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