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114 किलोमीटर लंबी परियोजना से मिलेगी जाम से राहत, व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक विकास को मिलेगा नया आधार

By Admin|29 May 2026, 10:16 PM
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भोपाल 

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प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित हो रहे आधुनिक अधोसंरचना नेटवर्क ने भारत की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री  मोदी के विजन के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे, आर्थिक कॉरिडोर और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी परियोजनाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और निवेश को नई ऊर्जा मिल रही है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा मध्यप्रदेश में विकसित की जा रही जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना महाकौशल क्षेत्र के विकास का नया अध्याय लिखने जा रही है। प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण परियोजना है। लगभग 3,540 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हो रही 114 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी परियोजना जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन एवं औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।

लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने बताया कि जबलपुर क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने वाली यह परियोजना शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के साथ-साथ क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करेगी। फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इसके पूर्ण होने के बाद जबलपुर शहर में यातायात का दबाव कम होगा तथा उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

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शहर को मिलेगी ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत

विगत वर्षों में जबलपुर में तेजी से हुए शहरी विस्तार, औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि तथा यात्री एवं मालवाहक वाहनों की संख्या बढ़ने से यातायात दबाव लगातार बढ़ा है। शहर की प्रमुख सड़कों पर जाम, लंबा यात्रा समय और ईंधन की अतिरिक्त खपत आम समस्या बन गई थी।

आउटर रिंग रोड परियोजना इन चुनौतियों का दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत करती है। इसके संचालन से लंबी दूरी के वाहनों का आवागमन शहर के बाहर से होगा, जिससे शहरी सड़कों पर दबाव कम होगा और आम नागरिकों को अधिक सुगम एवं सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध होगी।

पांच पैकेजों में हो रहा निर्माण

परियोजना को प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 5 अलग-अलग पैकेजों में विभाजित किया गया है। इनमें बरेला से मानेगांव, मानेगांव से एनएच-45, एनएच-45 से कुशनेर, कुशनेर से अमझर तथा अमझर से बरेला तक के खंड शामिल हैं। सभी पैकेज मिलकर जबलपुर के चारों ओर एक मजबूत बाहरी परिवहन नेटवर्क तैयार करेंगे। इन मार्गों के विकसित होने से जबलपुर हवाई अड्डे सहित क्षेत्र के प्रमुख कस्बों और ग्रामीण इलाकों को बेहतर सड़क संपर्क प्राप्त होगा। परियोजना के विभिन्न हिस्से इस वर्ष तथा अगले वर्ष चरणबद्ध रूप से यातायात के लिए खोले जाएंगे।

किसानों की उपज समय पर पहुंचेगी बाजार

परियोजना का सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा। वर्तमान में बरेला, शाहपुरा, पाटन, सिहोरा और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में ट्रैफिक जाम और परिवहन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

आउटर रिंग रोड बनने के बाद कृषि उत्पादों का परिवहन तेज होगा, जिससे समय की बचत होगी और किसानों को बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध होंगे। परिवहन लागत कम होने से उनकी आय पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

स्थानीय किसानों का मानना है कि परियोजना के कुछ प्रारंभिक हिस्सों के संचालन से ही यात्रा में होने वाली देरी में कमी महसूस होने लगी है और पूर्ण परियोजना शुरू होने के बाद यह लाभ और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

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लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन को मिलेगी नई गति

जबलपुर मध्य भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है। आउटर रिंग रोड बनने के बाद मालवाहक वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश नहीं करना पड़ेगा, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों में कमी आएगी। ईंधन की बचत होगी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अधिक कुशल बन सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में जबलपुर को मध्य भारत के प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पर्यटन क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ

जबलपुर की पहचान केवल औद्योगिक और प्रशासनिक शहर के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में भी है। भेड़ाघाट की संगमरमरी घाटियां, धुआंधार जल प्रपात, ग्वारी घाट, नर्मदा तट और निकटवर्ती कान्हा राष्ट्रीय उद्यान देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

नई रिंग रोड इन पर्यटन स्थलों तक पहुंच को अधिक तेज और सुविधाजनक बनाएगी। साथ ही अमरकंटक जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक यात्रा भी पहले की तुलना में अधिक सुगम होगी। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।

नर्मदा पर बनेगा आधुनिक इंजीनियरिंग का प्रतीक

परियोजना का सबसे आकर्षक और महत्वपूर्ण हिस्सा नर्मदा नदी पर निर्मित किया जा रहा लगभग 750 मीटर लंबा एक्सट्राडोज्ड ब्रिज है। आधुनिक तकनीक से तैयार किया जा रहा यह पुल न केवल परिवहन सुविधा को बेहतर बनाएगा बल्कि भविष्य में क्षेत्र की एक विशिष्ट पहचान के रूप में भी स्थापित होगा।

मध्यप्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी पर निर्मित यह पुल आधुनिक विकास और सांस्कृतिक विरासत के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण होगा।

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व्यापक अधोसंरचना निर्माण

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत 14 बड़े पुल, 37 छोटे पुल, 4 रेलवे ओवरब्रिज, 3 फ्लाईओवर, 12 वाहन अंडर-पास, 23 हल्के वाहनों के अंडर-पास, 2 एलिवेटेड स्ट्रक्चर, 3 ओवर-पास तथा लगभग 332 पुलियाओं का निर्माण किया जा रहा है।

यह अधोसंरचना न केवल यातायात को निर्बाध बनाएगी बल्कि भविष्य की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को भी पूरा करेगी।

महाकौशल क्षेत्र के विकास को मिलेगा नया आधार

आउटर रिंग रोड का लाभ केवल जबलपुर तक सीमित नहीं रहेगा। बरेला, मानेगांव, शाहपुरा, सिहोरा, पाटन, अमझर, कुशनेर, आधारताल और गढ़ा सहित अनेक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही मंडला, डिंडोरी, नरसिंहपुर और कटनी जैसे जिलों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।

बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण उद्योगों, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स पार्क और नए निवेश के अवसर विकसित होंगे, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित होने की संभावना है।

हरित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। निर्माण कार्य में लगभग 40 लाख मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का उपयोग किया जा रहा है, जो औद्योगिक अपशिष्ट के पुनः उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके अलावा पौधरोपण, हरित पट्टी विकास और आधुनिक जल निकासी व्यवस्था के माध्यम से पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

विकास, संपर्क और समृद्धि का नया अध्याय

जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना केवल एक सड़क निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि महाकौशल क्षेत्र के भविष्य को आकार देने वाली विकास यात्रा है। बेहतर कनेक्टिविटी, तेज आवागमन, कम ईंधन खपत, मजबूत लॉजिस्टिक्स, बढ़ते पर्यटन, औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन के माध्यम से यह परियोजना क्षेत्र की आर्थिक प्रगति का नया अध्याय लिखने जा रही है। आने वाले वर्षों में यह कॉरिडोर मध्य भारत के विकास मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण पहचान स्थापित करेगा।

 

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