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पत्नी का नंबर बंद करवाना पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार

By Admin|02 Jun 2026, 9:32 AM
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प्रयागराज

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ पुलिस को फटकार लगाई है। साथ ही साइबर सेल को निर्देश दिया है कि वह एक महिला के ब्लॉक किए गए मोबाइल नंबर को तुरंत बहाल करे। कोर्ट ने पुलिस की इस कार्रवाई को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए साफ किया कि राज्य की एजेंसियों की लापरवाही के कारण किसी नागरिक को इस तरह परेशान नहीं किया जा सकता।

न्यूज़ वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक यह आदेश जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीजन बेंच ने महिला द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता महिला और उसके पति के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा है। पति ने आपसी अनबन के कारण पत्नी के खिलाफ साइबर सेल में एक झूठी शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने बिना पूरी जांच किए महिला का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया।

हाईकोर्ट ने पुलिस के रवैये पर जताई नाराजगी
अदालत ने लखनऊ के साइबर सेल इंचार्ज द्वारा दाखिल व्यक्तिगत हलफनामे पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी संख्या-5 (पति) के बीच स्पष्ट रूप से वैवाहिक विवाद है और शिकायत भी पति की ओर से की गई है। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की साइबर सेल के प्रभारी अधिकारी द्वारा दाखिल व्यक्तिगत शपथपत्र में अपनाया गया रुख बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने साइबर पोर्टल से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर खातों या सेवाओं को ब्लॉक, डेबिट अथवा फ्रीज करने संबंधी गृह मंत्रालय के आदेशों का हवाला दिया है। ऐसे आदेशों का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। बेंच ने आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य की एजेंसियों की इस तरह की लापरवाही या दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई के कारण किसी भी नागरिक के अधिकारों का दमन नहीं किया जा सकता।

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जियो और पुलिस को एक हफ्ते का अल्टीमेटम
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की साइबर सेल के प्रभारी अधिकारी संबंधित टेलीकॉम सेवा प्रदाता, जो प्रथम दृष्टया जियो टेलीकॉम सर्विसेज लिमिटेड प्रतीत होती है। उससे संपर्क कर याचिकाकर्ता का मोबाइल नंबर तत्काल बहाल कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। साथ ही एक सप्ताह के भीतर इस संबंध में किए गए कार्यों का शपथ पत्र अदालत में दाखिल करें। अदालत ने महिला के पति को भी नोटिस जारी कर पूछा है कि निराधार और तुच्छ शिकायत दर्ज कराने के लिए उस पर हर्जाना क्यों न लगाया जाए। बता दें कि इस मामले में याचिकाकर्ता महिला की ओर से अधिवक्ता प्रशांत पांडेय ने पक्ष रखा था।

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